समाज बिन ब्याही माँ दे सकेगी बच्चे को अपना नाम July 15, 2015 / July 15, 2015 by प्रतिमा शुक्ला | Leave a Comment प्रतिमा शुक्ला दुनिया में हक से जीने का अधिकार सभी को है। आखिर अविवाहित मां बनने पर बच्चे का क्या दोष है। महिलाएं कई बार डर से बच्चे को फेंक देती हैं। अविवाहित मां काफी असुरक्षित महसूस करती हैं। अब ऐसी युवतियों को अपनी संतान के पिता का नाम बताना जरूरी नहीं होगा जो […] Read more » बच्चे को अपना नाम बिन ब्याही माँ
समाज एकल महिलाओ को लेकर अदालत का प्रगतिशील फैसला July 15, 2015 / July 16, 2015 by उपासना बेहार | Leave a Comment उपासना बेहार 6 जुलाई 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला दिया जिसमें कहा गया कि अविवाहित मां अपने बच्चे की अकेली अभिभावक बन सकती है। इसमें उसके पिता की रजामंदी लेने की आवश्यकता नहीं है। जिस केस को लेकर यह फैसला सुनाया गया है वो कुछ इस तरह है कि एक अविवाहित […] Read more »
महिला-जगत समाज सिंगल मदर July 13, 2015 by अभिषेक कांत पांडेय | Leave a Comment कामयाब भी, अच्छी मां भी अभिषेक कांत पाण्डेय आज महिलाएं खुद फैसले ले रही हैं और क्यों न लें, वे पढ़ी-लिखी हैं, कामयाब हैं, उन्हें अपनी जिंदगी अपनी आजादी से जीने का हक है। आज सिंगल मदर बिना पुरुषों के खुद घर और बाहर की जिम्मेदारी बाखूबी उठा रही हैं। ये जीवन में कामयाब हैं […] Read more » सिंगल मदर
जन-जागरण समाज लखनऊ सहित पूरे प्रदेश में भीषण जलसंकट की आहट July 11, 2015 by मृत्युंजय दीक्षित | Leave a Comment मृत्युंजय दीक्षित जिस प्रकार से जलस्रोतों के भंडार सूख रहे हैं व प्रदूषित हो रहे हैं उससे विशेषज्ञों ने कहना प्रारम्भ कर दिया है कि अब अगला विश्वयुद्ध जल के लिए हो सकता है। इसके कुछ दर्दनाक व सामाजिक सरोकार को झकझोर कर रख देने वाली घटनाएं घटी है जिनके बारे में अभी से ही […] Read more » जलसंकट की आहट भीषण जलसंकट की आहट लखनऊ
आर्थिकी समाज अमीरी बनाम गरीबी July 11, 2015 by शैलेन्द्र चौहान | Leave a Comment शैलेन्द्र चौहान जनगणना के ताजा आंकडों के मुताबिक ग्रामीण इलाकों के तीन चौथाई परिवारों की आमदनी पांच हजार रुपए महीने से ज्यादा नहीं है। गांवों में रहने वाले बानबे फीसद परिवारों की आय प्रतिमाह दस हजार रुपए से कम है। शहरी इलाकों के आंकड़े फिलहाल जारी नहीं किए गए हैं। पर वे जब भी सामने […] Read more » अमीरी गरीबी
धर्म-अध्यात्म समाज दलित स्त्रियों के उत्थान में महर्षि दयानन्द का योगदान July 11, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment महर्षि दयानन्द ने अपने जीवनकाल में देश में सर्वांगीण क्रान्ति की थी। वर्णाश्रम व्यवस्था में आये प्रदुषण को उन्होंने दूर किया। उन्होंने समाज में व्यवहृत जन्मना वर्णाश्रम वा जाति-व्यवस्था के दोषों को वेदों एवं वैदिक साहित्य के आधार पर युक्ति व तर्क के आधार पर व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत किया जो महाभारतकाल से पूर्व वैदिक […] Read more » दलित स्त्रियों के उत्थान महर्षि दयानन्द का योगदान
विविधा समाज विनाश की ओर बढ़ती मानवता July 11, 2015 / July 16, 2015 by अनिल कुमार पाण्डेय | 1 Comment on विनाश की ओर बढ़ती मानवता 11 तारीख को मनाए जाने वाले विश्व जनसंख्या दिवस पर अनिल कुमार पाण्डेय विश्व जनसंख्या दिवस कोई साधारण दिवस नहीं, बल्कि सयुंक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित एक अंतर्राष्ट्रीय दिवस है। विश्व में सुपर सोनिक गति से बढ़ती जनसंख्या के प्रति लोगों में जागरुकता लाने के उद्देश्य से ही यह दिवस मनाया जाता है। ये बात […] Read more » विश्व जनसंख्या दिवस
जरूर पढ़ें महत्वपूर्ण लेख समाज आचार्य शंकर का ऐतिहासिक योगदान July 11, 2015 by डॉ. मधुसूदन | 10 Comments on आचार्य शंकर का ऐतिहासिक योगदान —– डॉ. मधुसूदन (एक ) “हिमालय का प्रवास” पुस्तक। “हिमालय नो (का) प्रवास” नामक गुजराती पुस्तक के लेखक, काका कालेलकर के, आदि-शंकराचार्य की प्रशंसा में लिखे, शब्दों ने ध्यान खींचा। वें आदि शंकराचार्य को असामान्य ऐतिहासिक व्यक्तित्व मानते हैं। वें कहते हैं। ===================== **शंकराचार्य धर्म के क्षेत्र में समुद्रगुप्त और नेपोलियन थे; **प्रबंधन में, राजा […] Read more » आचार्य शंकर
राजनीति समाज अच्छे दिन की कल्पना और सामाजिक विद्रूपताएं July 8, 2015 by प्रवक्ता ब्यूरो | 2 Comments on अच्छे दिन की कल्पना और सामाजिक विद्रूपताएं घनश्याम भारतीय- प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेन्द्र मोदी ने जिस अच्छे दिन की कल्पना की थी और देश वासियों को उसके सपने दिखाये थे उन्हें साकार होने में सामाजिक विदू्रपताएं बाधक बनी हुई है। जिन्हें दूर किये बिना अच्छे दिन की कल्पना बेमानी होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि व्यक्तियो की एक लम्बी श्रृंखला से बनने वाला […] Read more » सामाजिक विद्रूपताएं
विविधा समाज जीवन का पुनर्मूल्यांकन और जर्जर समाज July 8, 2015 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on जीवन का पुनर्मूल्यांकन और जर्जर समाज घनश्याम भारतीय भारत गांवो का देश है, क्योंकि देश की अधिकांश आबादी गांवो में बसती है। इसलिए गांवो और ग्रामीणो की दशा सुधारने के लिए सरकार द्वारा कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से प्रयास तो किये जा रहे है परन्तु वह परिणाम सामने नही आ पा रहा है जो आना चाहिए। इसका अर्थ यह हुआ कि […] Read more » जर्जर समाज जीवन का पुनर्मूल्यांकन
समाज अभेद्य सुरक्षा घेरा देता है माता-पिता का सान्निध्य June 28, 2015 by डॉ. दीपक आचार्य | Leave a Comment जो लोग माता-पिता को सिर्फ इंसानी देह मानते हैं वे सारे के सारे लोग भ्रमों, शंकाओं और मूर्खताओं में जी रहे हैं। माता-पिता स्रष्टा हैं और धरती के वे देवता हैं जिनका जितना अधिक सान्निध्य हमें प्राप्त होता है उतने दिन हमारे जीवन के स्वर्णकाल से कम नहीं हैं। जब तक माता-पिता का संरक्षण और […] Read more » अभेद्य सुरक्षा घेरा माता-पिता का सान्निध्य
विविधा समाज संतान को देकर जाएं June 20, 2015 / July 20, 2015 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment श्री राम कृष्ण श्रीवास्तव 1 हम अपने माता पिता होने का दायित्व बड़ी कुशलता से निभाते हैं। अपने बच्चे को योग्यतम शिक्षा और ज्ञान देकर समाज में सम्मान के साथ रहने के लिए उसे उचित मार्ग दर्शन देते हैं। जिसके आधार पर वह अपनी योग्यता से वो सब कुछ अर्जित करने की क्षमता और सामर्थ्य […] Read more » ’’एक संतान’’ Featured give your child relationships इकलौती संतान को सम्पूर्ण पारिवारिक सम्बन्ध संतान को देकर जाएं