समाज दक्षिण एशिया में लड़कियों की शिक्षा January 5, 2014 / January 11, 2014 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment -सोम पाटीदार- संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों में सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा – सभी लड़कों और लड़कियों का स्कूलों में नामांकन एवं नियमित स्कूल जाना प्राप्त करना है लेकिन तमाम प्रयासों के बावजुद यह लक्ष्य हासिल नहीं हो पाया है। खासकर उप-सहारा अफ्रीका और दक्षिण एशिया इस लक्ष्य से काफी दूर हैं। संयुक्त राष्ट्र […] Read more » Girls' education in South Asia दक्षिण एशिया में लड़कियों की शिक्षा
समाज खतरे में आदिवासी बच्चों की जान December 30, 2013 / January 11, 2014 by संजय कुमार | Leave a Comment हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग गठित नहीं करने वाले राज्यों को कड़ी फटकार लगाई है। कई राज्यों में अभी तक बाल आयोगों का गठन नहीं होने के कारण बच्चों के अधिकारों की निगरानी एवं उनका संरक्षण नहीं हो पा रहा है। परिणामस्वरूप राज्यों में बच्चों के शोषण की घटनाएं निरंतर […] Read more » help tribesmen children खतरे में आदिवासी बच्चों की जान
समाज समलैंगिकता प्रकृति के नियमों के विरूद्घ December 22, 2013 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य प्राचीनता और नवीनता दो विरोधी धाराएं नही हैं। समाज की उन्नति के लिए इन दोनों का समन्वय बड़ा आवश्यक है। विज्ञान के नवीन आविष्कारों का और अनुसंधानों का लाभ लेने के लिए हमें सदा नवीनता का समर्थक रहना चाहिए। इसी से सभ्यता का विकास होता है। इसीलिए कालिदास जैसे महाकवि ने अपनी […] Read more » समलैंगिकता प्रकृति के नियमों के विरूद्घ
समाज अपराध जगत में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी December 20, 2013 / December 20, 2013 by निर्मल रानी | 1 Comment on अपराध जगत में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी निर्मल रानी भारतवर्ष में महिलाओं को प्रायः अबला व बेचारी के रूप में देखा जाता है। महिला उत्पीडऩ की घटनाएं भी देश में प्रतिदिन कहीं न कहीं घटित होती ही रहती हैं। खासतौर पर पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों ने विशेषकर सेक्स अपराधों ने पूरे देश को हिला कर रख […] Read more » अपराध जगत में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
समाज डायन कुप्रथा से जूझता झारखण्ड December 20, 2013 / December 20, 2013 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 1 Comment on डायन कुप्रथा से जूझता झारखण्ड काली कान्त झा इक्सवीं सदी के भारत में आज जहाँ देशवासी दिन प्रतिदिन नित्य नए आयाम को छु रहे है वही झारखण्ड आज भी विभिन्न प्रकार की कुरीतियों से जूझ रहा है | झारखण्ड को बने लगभग १३ साल हो गए है लेकिन आज भी डायन कुप्रथा के नाम पर औरतो खास कर विधवाओ को […] Read more » डायन कुप्रथा से जूझता झारखण्ड:-
समाज लालबत्ती पर न्यायालय की लगाम December 18, 2013 / December 18, 2013 by अरविंद जयतिलक | Leave a Comment अरविंद जयतिलक यह स्वागतयोग्य है कि देश की सर्वोच्च अदालत ने वाहनों पर लालबत्ती और सायरन के इस्तेमाल को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया है। न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी और न्यायमूर्ति सी नागप्पा की पीठ ने लालबत्ती के दुरुपयोग रोकने वाली याचिका पर फैसला देते हुए कहा है कि सिर्फ उच्च संवैधानिक पदों पर आसीन लोगों […] Read more » लालबत्ती पर न्यायालय की लगाम
समाज दलित साहित्य मनुष्य को मानव बनना सिखाता है December 18, 2013 / December 18, 2013 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 1 Comment on दलित साहित्य मनुष्य को मानव बनना सिखाता है पिछले कुछ दशकों पहले साहित्य के अथाह, असीम सागर में एक ऐसा बवंडर-तूफान आया, जिससे अबतक से सारे मापदंड तहेस-नहेस हो गए | उसने अपना स्थान सम्पूर्ण विश्व सहित्य के पटल पर नीले अक्षरों से अंकित कर दिया | वह था, परम्परागत साहित्य में जन्मा मैला, कुचैला, उपेक्षित, […] Read more » दलित साहित्य मनुष्य को मानव बनना सिखाता है
समाज अप्राकृतिक कृत्य बनाम रिश्तों की मर्यादा December 18, 2013 by सुरेश हिन्दुस्थानी | 1 Comment on अप्राकृतिक कृत्य बनाम रिश्तों की मर्यादा सुरेश हिन्दुस्थानी भारत जैसे देश में अप्राकृतिक कृत्य का समर्थन करना निश्चित ही भारतीयता को तार तार करने का षडयंत्र है, भारत एक सांस्कृतिक देश है, जहां अनेक संस्कार हैं। पूरा जीवन इन्हीं संस्कारों के साए में आगे बढ़ता है लेकिन जब हम संस्कारों को भूलकर कुसंस्कारों की ओर बढ़ते हैं तब निश्चित ही भारत […] Read more » अप्राकृतिक कृत्य बनाम रिश्तों की मर्यादा
समाज असमानता के धरातल पर बसा शहरी गरीब लोक December 17, 2013 / December 17, 2013 by संजय कुमार | Leave a Comment संजय सिंह एक तरफ पंचसितारा संस्कृति में पलते बच्चे हैं तो दूसरी तरफ 10/10 के झुग्गियों मे सिसकता बचपन। अमीर और गरीबों के बीच आवासीय स्थितियों और सामाजिक नजरिये को देखें तो एक बड़ा निर्मम विभाजन दिखाई देता है । जबकी दोनो ही वर्गों के लोग एक दूसरे के पूरक हैं और दोनों की आजीविका […] Read more » असमानता के धरातल पर बसा शहरी गरीब लोक
समाज समलैंगिकों के समर्थन का मतलब समलैंगिक होना नहीं December 16, 2013 by इक़बाल हिंदुस्तानी | Leave a Comment इक़बाल हिंदुस्तानी आईपीसी की धारा 377 को निरस्त करना इतना आसान नहीं है! एल जी बी टी यानी लेस्बियन,गे, बायोसैक्सुअल और ट्रांस्जेंडर जिनको हिंदी में हम समलैंगिक के नाम से जानते हैं चार तरह के लोग पाये जाते हैं। लेस्बियन यानी महिला के महिला से अंतरंग संबंधगे यानी पुरूष के पुरूष के रिश्ते, […] Read more » समलैंगिकों के समर्थन का मतलब समलैंगिक होना नहीं
समाज सोनिया कांग्रेस के लिये देश में प्रमुख मुद्दा समलैंगिकता है December 15, 2013 / December 15, 2013 by डॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री | Leave a Comment डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री सोनिया कांग्रेस की हाल ही में , पांच राज्यों की विधानसभाओं के लिये चुनावों में जबरदस्त हार हुई है । केवल हार ही नहीं , दिल्ली राजस्थान और मध्य प्रदेश में तो उसका सूपडा ही साफ हो गया है । थोडी बहुत लाज मिजोरम में चर्च ने बचा दी , अन्यथा […] Read more » Homosexuality मुद्दा समलैंगिकता समलैंगिकता
समाज मल्लिका, शहज़ादा और समलैंगिकता December 14, 2013 / December 14, 2013 by विपिन किशोर सिन्हा | 6 Comments on मल्लिका, शहज़ादा और समलैंगिकता समलैंगिक संबन्धों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के खिलाफ़ एक बार सारी अनैतिक शक्तियां एकजूट हो रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को विवादास्पद बनाने की मुहीम में समलैंगिकों के साथ मल्लिका-ए-हिन्दुस्तान, शहज़ादा-ए-हिन्दुस्तान और दिल्ली के बेताज़ बादशाह भी शामिल हो गये हैं। नीचे पेश है, उनके वक्तव्य – ‘दिल्ली हाईकोर्ट के […] Read more »