समाज अंतहीन होता आज भ्रष्टाचार का मुद्दा July 8, 2011 / December 9, 2011 by आर.अस.शर्मा (नागेश) | 2 Comments on अंतहीन होता आज भ्रष्टाचार का मुद्दा आर.एस.शर्मा ‘नागेश’ आज समूचे भारत में ही नहीं पूरे विश्व में भारतवर्ष में चल रहे काला धन और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चल रही गर्माहट की चर्चा जोर-शोर से चल रही है। बच्चा, बूढ़ा, जवान, स्त्री, पुरुष और हर वर्ग से जुड़ा समाज इसी को लेकर बड़ा ही गंभीर है। ऐसा नहीं कि भ्रष्टाचार का […] Read more » Corruption अंतहीन भ्रष्टाचार मुद्दा
समाज सामाजिक लड़ाई जारी है समलैंगिकों की July 5, 2011 / December 9, 2011 by महेश दत्त शर्मा | Leave a Comment महेश दत्त शर्मा भारतीय समलैंगिकों को कानूनी लड़ाई जीतकर क्या मिला है, यकीनन कानूनी संरक्षण तो मिला ही है। लेकिन स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने इसे एक बीमारी कहकर एक नई बहस छेड़ दी है। इससे लगता है कि समलैंगिकों को अभी लंबी लड़ाई के लिए तैयार रहना चाहिए। हमारा समाज जो अभी अंतर-जातीय […] Read more » Social War समलैंगिकों सामाजिक लड़ाई
समाज मंहगाई का बोझ लादती कांग्रेस July 2, 2011 / December 9, 2011 by सत्येन्द्र सिंह 'भोलू' | Leave a Comment सत्येन्द्र सिंह भोलू हिन्दुस्तान पहले से ही भीषण महंगाई से त्रस्त था ऊपर से केन्द्र की यू0पी0ए0 सरकार ने गैस 50 रूपये, डीजल 3 रूपयें, मिट्टी (केरोसिन) का तेल 2 रूपयें तथा पिछले महीने पेट्रोल का दाम 5 रूपयें बढ़ाकर आम आदमी को सकते में डाल दिया है। जिसका असर भारत वर्ष में रहने वाले […] Read more » Inflation कांग्रेस बोझ मंहगाई
राजनीति समाज मुस्लिम समाज का दर्द July 2, 2011 / December 9, 2011 by डॉ. मनीष कुमार | 3 Comments on मुस्लिम समाज का दर्द डॉ. मनीष कुमार बिहार में आश्चर्यजनक चीजें होती हैं. मुसलमानों की समस्याओं पर सेमिनार हो, वक्ता राजनीतिक दलों के नेता और सामाजिक कार्यकर्ता हों और कोई आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद की बात न करे, अगर कोई संघ परिवार और बजरंग दल को दोषी और अपराधी न बताए, अगर बाबरी मस्जिद का मुद्दा न उठे, […] Read more » Muslim मुसलमान मुस्लिम
धर्म-अध्यात्म विविधा समाज सच सच बतलाना निगमानंद.. June 27, 2011 / December 9, 2011 by सुनील अमर | 13 Comments on सच सच बतलाना निगमानंद.. सुनील अमर प्रिय निगमानंद, पैंतीस साल की उम्र कुछ कम तो नहीं होती! खासकर उस मुल्क में जहाँ के बच्चे इन दिनों पैदा होने के बाद 35 महीने में ही जवान हो जाते हों, तुम बच्चे ही बने रहे? साधु के साधु ही रह गये तुम और उसी निगाह से इस मुल्क के निजाम को […] Read more » Swamy Nigmanand स्वामी निगमानंद
पर्यावरण समाज आधुनिक बच्चों का टूट रहा है कुदरत से नाता… June 4, 2011 / December 12, 2011 by अशोक बजाज | 1 Comment on आधुनिक बच्चों का टूट रहा है कुदरत से नाता… जैव विविधता को बचाने के काम को वे बच्चे और मुश्किल बना रहे हैं जो टेलीविजन, इंटरनेट, विडियोगेम्स या दूसरे इलेक्ट्रॉनिक मनोरंजन की गिरफ्त में हैं. संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि ये सब प्रकृति को बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं. संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी ने कहा है कि ज्यादातर नौजवान शहरों में […] Read more » Modern kids आधुनिक बच्चों कुदरत से नाता टूट रहा है
समाज गरीब के लिये महंगी और मिलावटी होती चिकित्सा June 2, 2011 / December 12, 2011 by शादाब जाफर 'शादाब' | 1 Comment on गरीब के लिये महंगी और मिलावटी होती चिकित्सा आज बीमारी के नाम से गरीब की रूह कांप जाती है वजह है देश में दिन प्रतिदिन मंहगा होता इलाज। बडे बडे पूंजीपतियो ने चिकित्सा के नाम पर आज जगह जगह दुकाने खोल ली है जिस कारण आज देश में प्राईवेट अस्पतालो की बा सी आई हुई है। इन में अधिकतर अस्पताल फाईव स्टार सुविधाओ […] Read more » Poor गरीब चिकित्सा महंगी मिलावटी
समाज वशीर साहब आप से यह उम्मीद नहीं थी । May 24, 2011 / December 12, 2011 by डॉ. मनोज जैन | 3 Comments on वशीर साहब आप से यह उम्मीद नहीं थी । मुझे याद नहीं है कि मैनें कहां पॄा था कि शहद से डूबें हुये हाथ में चिपके हुये तिलों के बराबर भी एक मुसलमान कसमें खाये तो उसका भरोसा नहीं करना चाहियें परन्तु मुझे लगता है कि किसी व्यक्ति के सम्बन्ध तो कोई भी जुमला सटीक हो सकता हो पर पूरी कौम को कैसे एक […] Read more »
समाज भारतीय अफसरशाही की दशा और दिशा May 1, 2011 / December 13, 2011 by जावेद उस्मानी | 7 Comments on भारतीय अफसरशाही की दशा और दिशा कोषपूर्वा: सर्वारम्भाः। तस्मात पूर्वं कोषमवेक्षेत। कौटिल्य अर्थशास्त्रमःअघ्याय 8 प्रकरण 24 श्लोक 1 (सभी कार्य कोष पर निर्भर है। इसलिये राजा को चाहिये कि सबसे पहले कोष पर ध्यान दे।) सभ्यता के प्रारंभ से ही मानवों ने पहले समाज एंव फिर एक सामाजिक सत्ता की आवश्यकता महसूस कर ली थी। शक्ति आधारित राजतंत्रीय ब्यवस्था मे प्रारंभिक […] Read more » Indian अफसरशाही दशा दिशा भारतीय
समाज मजदूरों के लिए क्या आजादी और क्या गुलामी! May 1, 2011 / December 13, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment एक दिन बाद यानी 1 मई को देशभर में बड़ी-बड़ी सभाएं होगी, बड़े-बड़े सेमीनार आयोजित किए जाएंगे, जिनमें मजदूरों के हितों की बड़ी-बड़ी योजनाएं भी बनेगी और ढ़ेर सारे लुभावने वायदे किए जाएंगे, जिन्हें सुनकर एक बार तो यही लगेगा कि मजदूरों के लिए अब कोई समस्या ही बाकी नहीं रहेगी। इन खोखली घोषणाओं पर […] Read more » Freedom आजादी गुलामी मजदूरों
समाज बेहतर शादी शुदा जिन्दगी के लिये… April 21, 2011 / December 13, 2011 by शादाब जाफर 'शादाब' | 4 Comments on बेहतर शादी शुदा जिन्दगी के लिये… शादाब जफर ”शादाब” बात सन् 1999 की है। मण्डी हाऊस के नजदीक नई दिल्ली स्थित रूसी ऑडिटोरियम के सभागार में बालकन जी बारी इन्टरनेशल नई दिल्ली द्वारा आयोजित देश भर से आये कवि शायरों के सम्मान समारोह का कार्यक्रम चल रहा था। मुझे भी इसी वर्ष इस संस्था ने मेरी काव्य रचना पर राष्ट्रीय […] Read more » Marrige शादी
समाज अनुराधा की मौत आधुनिक समाज पर तमाचा April 21, 2011 / April 21, 2011 by शादाब जाफर 'शादाब' | Leave a Comment शादाब जफर ”शादाब” कहते है कि इन्सान एक सामाजिक प्राणी है। अल्लाह ने इन्सान को दुनिया में सब चीजों में श्रेष्ट बनाया है। पर आज इन्सान का इन्सान के प्रति जो नजरिया सामने आ रहा है उससे नहीं लगता कि आज इन्सान इन्सान कहलाने के लायक रहा है। क्योंकि ये सब बाते गुजरे जमाने की […] Read more »