समाज आरक्षण समानता या विषमता August 10, 2011 / December 7, 2011 by मुकेश चन्द्र मिश्र | 4 Comments on आरक्षण समानता या विषमता आरक्षण का जिन्न आजकल फिर चर्चा में है इसको बाहर लाने का दोषी फिल्म निर्माता प्रकाश झा जी को ठहराया जा रहा है पर इसमें शायद उनका उपनाम “झा” ही दोषी है जो संभवतः अगड़े वर्ग से है, जबिक वो शहर -शहर घूमकर सबको समझा रहे हैं की ये फिल्म समाज के किसी भी वर्ग […] Read more » Reservation आरक्षण
समाज चू चू का मुरब्बा बना लोकपाल बिल July 26, 2011 / December 8, 2011 by शादाब जाफर 'शादाब' | 5 Comments on चू चू का मुरब्बा बना लोकपाल बिल शादाब जफर “शादाब’’ छले चालीस सालो से भ्रष्ट राजनेताओ और भ्रष्ट राजनीति के कारण जो लोकपाल विधेयक कानून का रूप नही ले पाया। कुछ लोग चाहते है कि उसे हम चुटकिया बजा कर पास करा लेगे तो ये उन लोगो की भूल है। जिस अन्ना हजारे के पॉच दिन के आन्दोलन से डर कर सरकार […] Read more » Lokpal Bill लोकपाल बिल
समाज गाँव का भू-स्वामी और शहर का पूंजीपति July 25, 2011 / December 8, 2011 by श्रीराम तिवारी | Leave a Comment श्रीराम तिवारी यह सर्वज्ञात है कि मरण धरमा एवं नित्य परिवर्तनीय सृष्टि में मनुष्य सबसे अधिक सचेतन प्राणी है.इसके वावजूद कि सभ्यता के आरम्भ से ही वह एक ओर तो पृकृति के अवदानों से प्रमुदित था ही किन्तु दूसरी तरफ दुर्दमनीय प्राकृतिक अबूझ आपदाओं से पराजित होकर चुपचाप हाथ पै हाथ धरे नहीं बैठा रहा.नदी […] Read more » Capitalist city गाँव का भू-स्वामी पूंजीपति भू-स्वामी शहर का पूंजीपति
समाज वस्तानवी की विदाई July 25, 2011 / December 8, 2011 by शादाब जाफर 'शादाब' | 2 Comments on वस्तानवी की विदाई मौलाना गुलाम मोहम्मद वस्तानवी साहब को जॉच में क्लीन चिट देने के बावजूद आखिरकार दारूल उलूम के मोहतमिम की कुर्सी के नाकाबिल समझते हुए शुरा के 14 सदस्यो में से 9 ने वस्तानवी के खिलाफ वोट देकर दारूल उलूम के 145 साल के इतिहास में अब तक का सब से बडा फैसला कर उन्हे मोहतमिम […] Read more » मौलाना गुलाम मोहम्मद वस्तानवी वस्तानवी की विदाई
समाज भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सुशासन बाबू हुए चारों खाने चित July 24, 2011 / December 8, 2011 by सतीश सिंह | Leave a Comment सतीश सिंह कर्नाटक, दिल्ली और उत्तरप्रदेश के बाद अब बिहार भी घोटालों के घेरे में आ गया है। सुशासन बाबू के सुशासन की हवा निकल गई है। ताजा विवाद भूमि आवंटन को लेकर है। वैसे तो इस घोटाले की सुगबुगाहट विपक्षी पार्टियों के बीच एक अरसे से थी। किन्तु विगत सप्ताह से असंतोष में जबर्दस्त […] Read more » Corruption भ्रष्टाचार
समाज भ्रष्टाचार …चीन में सजा… भारत में मज़ा July 21, 2011 / December 8, 2011 by एल. आर गान्धी | 2 Comments on भ्रष्टाचार …चीन में सजा… भारत में मज़ा एल. आर गाँधी चीन में गत मंगलवार को दो भ्रष्ट राजनेताओं को फाँसी पर चढ़ा दिया गया – ये थे पूर्व मेयर जो रिश्वत लेने, हेराफेरी और पद के दुर्रपयोग के दोषी पाए गए. १२ मई को मृत्यु दंड की सजा सुनाई गई और महज़ २ महीने नौं दिन के बाद लटका दिया गया. भ्रष्टाचार […] Read more » Corruption चीन में सजा भारत में मज़ा भ्रष्टाचार
विविधा समाज सामुदायिक सदभाव का सही आधार July 12, 2011 / December 9, 2011 by शंकर शरण | 3 Comments on सामुदायिक सदभाव का सही आधार शंकर शरण दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मौलाना वस्तानवी के गुजरात सम्बन्धी बयान को दूसरी तरह भी देखा जा सकता है। अब दो राय नहीं रह गई है कि पिछले नौ वर्ष में उस राज्य की सामाजिक-आर्थिक प्रगति स्पृहणीय है, कि हिन्दू-मुस्लिम दोनों उससे संतुष्ट हैं और अपने-अपने काम-धंधे लगे हैं। सामुदायिक सहयोग की यही […] Read more » Rabindranath Tagore रवीन्द्रनाथ टैगोर सामुदायिक सदभाव
समाज न गांधी का देश न अन्ना हजारे का गांव July 12, 2011 / December 9, 2011 by जावेद उस्मानी | 3 Comments on न गांधी का देश न अन्ना हजारे का गांव जावेद उस्मानी पूरे देश मे भ्रष्टाचार की गूंज है । अरब देशो मे हुए आन्दोलन के बाद देश मे भ्रष्टाचार की चर्चा चरम पर हैं । आम आदमी से लेकर देश के मुखिया तक सभी या तो की दुहाई दे रहे है या अपनी सफाई दे रहे हैं । रिश्वत खाने वाले की अपनी डफली […] Read more » Corruption भ्रष्टाचार
समाज भ्रष्टाचार : कारण एवं निवारण July 12, 2011 / December 9, 2011 by राजेश करमहे | 3 Comments on भ्रष्टाचार : कारण एवं निवारण राजेश करमहे श्रीमद्भगवद्गीता के सोलहवें अध्याय के इक्कीसवें श्लोक में कहा गया है – “त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं नाशनमात्मनः। कामः क्रोधस्तथा लोभस्तस्मादेतत्त्रयं त्यजेत्॥ “ “नरक के तीन द्वार हैं – काम, क्रोध तथा लोभ। प्रत्येक बुद्धिमान व्यक्ति को चहिए कि इन्हें त्याग दें, क्योंकि इनसे आत्मा का पतन होता है|” आत्मा का पतन ही तो भ्रष्टाचार […] Read more » Corruption भ्रष्टाचार
समाज बाजार के निशाने पर अब गाँव July 12, 2011 / December 9, 2011 by सुनील अमर | 1 Comment on बाजार के निशाने पर अब गाँव सुनील अमर देश के गाँव इन दिनों कई तरह से बाजार के फोकस पर हैं! घरेलू उपयोग की वस्तुऐं बनाने वाली बड़ीबड़ी कम्पनियाँ को अगर वहाँ अपनी बाजारु संभावनाऐं दिख रही हैं, तो बिल्कुल शहरी व्यवसाय माने जाने वाले बी.पी.ओ. क्षेत्र ने भी अब गॉवों की तरफ रुख कर लिया है। सरकार अगर देश के […] Read more » village
समाज फटा है समाज सेवा का ढोल July 10, 2011 / December 9, 2011 by सतीश सिंह | Leave a Comment सतीश सिंह क्नॉट सर्कस को दिल्ली का दिल माना जाता है। विगत दो सालों से इस दिल के एम ब्लॉक में तकरीबन प्रति दिन मेरा आनाजाना है। इन दो सालों में मैंने लगभग 3035 लावारिस लाशों को अपनी आँखों से इस ब्लॉक के आसपास देखा है। दायरा ज्यादा बड़ा नहीं है एम, जी, एन, एच […] Read more » Social Service समाज सेवा
समाज समलैंगिता शारीरिक नहीं, मानसिक बीमारी है.. July 8, 2011 / December 9, 2011 by गिरीश पंकज | 8 Comments on समलैंगिता शारीरिक नहीं, मानसिक बीमारी है.. गिरीश पंकज स्वास्थ्यमंत्री गुलामनबी आज़ाद के बयान के बाद समलैंगिक संबंधों के पक्षधर लोगों ने बड़ा बवाल मचा कर रखा है. जबकि आज़ाद ने ऐसा कुछ नहीं कहा है, जिससे इतनी हाय-तौबा मचे. उन्होंने यही तो कहा है कि समलैंगिक सम्बन्ध बनाना एक तरह की बीमारी है.और अप्राकृतिक भी है. इसमे गलत बात कुछ भी […] Read more » Mental illness मानसिक बीमारी शारीरिक समलैंगिता