समाज क्यों मुद्दा गौण हो जाता है और राजनीति बड़ी? October 1, 2018 by डॉ नीलम महेन्द्रा | Leave a Comment डॉ नीलम महेंद्र देर आयद दुरुस्त आयद ! सुप्रीम कोर्ट के हाल के फैसलों से-देश का-आम आदमी कुछ बातें सोचने के लिए मजबूर हो गया-है। आईये समझते-हैं कैसे ? इसे समझने के लिए कोर्ट के कुछ ताज़ा फैसलों पर एक नज़र डालते हैं , 1. सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने 4:1 के […] Read more » मस्जिद महिला जज जस्टिस इंदु मल्होत्रा सबरीमाला मन्दिर सुप्रीम कोर्ट
समाज व्यभिचार को सामाजिक स्वीकृति मिलना असंभव September 29, 2018 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment डॉ. वेदप्रताप वैदिक स्त्री-पुरुष संबंधों के बारे में सर्वोच्च न्यायालय ने जो फैसला दिया है, ज्यादातर लोग उसकी तारीफ कर रहे हैं। उसे क्रांतिकारी बता रहे हैं। उनका मानना है कि यह फैसला अंग्रेज के बनाए उस कानून को रद्द कर रहा है, जिसके मुताबिक औरतों का दर्जा पशुओं-जैसा था। 1860 में बने इस कानून […] Read more » ईरान पाकिस्तान यमन सउदी अरब सर्वोच्च न्यायालय
समाज जीवन की राह: शांति की चाह September 29, 2018 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग – आज हर व्यक्ति चाहता है – हर दिन मेरे लिये शुभ, शांतिपूर्ण एवं मंगलकारी हो। संसार में सात अरब मनुष्यों में कोई भी मनुष्य ऐसा नहीं होगा जो शांति न चाहता हो। मनुष्य ही क्यों पशु-पक्षी, कीट-पंतगें आदि छोटे-से-छोटा प्राणी भी शांति की चाह में बेचैन रहता है। यह ढ़ाई अक्षर का […] Read more » अशांति कुंठा घुटन जीवन की राह: शांति की चाह तनाव नाम रूप शब्द शास्त्र संत्रास संस्कार संस्कृति सिद्धांत
समाज कीटाणुओं पर प्रहार करेगा अदालत से सीधा प्रसारण September 28, 2018 by विवेक कुमार पाठक | Leave a Comment विवेक पाठक पारदर्शिता हमेशा पर्दे और कोनों में छिपी बुराइयों पर प्रहार करती है। दुनिया की तमाम बुराइयां पारदर्शिता के अभाव में पनपती हैं। हमें लोग देख रहे हैं, हमें दुनिया देख रही है ये भाव हमें गलत भाव को आगे बढ़ाने से रोकता है। न्यायालय न्याय के मंदिर हैं मगर उनमें न्याय का दान […] Read more » देशवासियों न्यायालयों लाइव स्ट्रीमिंग वकीलों
समाज विकृति को बढ़ावा देनेवाले फैसले September 28, 2018 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment बिपिन किशोर सिंहा सुप्रीम कोर्ट देश का सर्वोच्च न्यायालय है। इसके फैसले कानून बन जाते हैं। अतः जिस फैसले से समाज का स्वस्थ तानाबाना तार-तार होता है, उसपर गंभीरता से विचार करने के बाद ही निर्णय अपेक्षित है। हाल में सुप्रीम कोर्ट के कुछ ऐसे फैसले आये हैं जिससे समाज में विकृति फैलने की पर्याप्त […] Read more » बालक/बालिका विकृति को बढ़ावा देनेवाले फैसले सुप्रीम कोर्ट स्त्री-पुरुषों
मीडिया समाज हाहाकार के बीच आंदोलन …! September 28, 2018 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा दो दिनों के अंतराल पर एक बंद और एक चक्का जाम आंदोलन। मेरे गृह प्रदेश पश्चिम बंगाल में हाल में यह हुआ। चक्का जाम आंदोलन पहले हुआ और बंद एक दिन बाद। बंद तो वैसे ही हुआ जैसा अमूमन राजनैतिक बंद हुआ करते हैं। प्रदर्शनकारियों का बंद सफल होने का दावा और […] Read more » आदिवासियों मातृभाषा शिक्षाराष्ट्रीय चैनलों हाहाकार के बीच आंदोलन ...!
समाज वृद्ध जीवन के उजालों का स्वागत करें September 27, 2018 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग – एक अक्टूबर को सम्पूर्ण विश्व में अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस मनाया जाता है। समाज और नई पीढ़ी को सही दिशा दिखाने और मार्गदर्शन के लिए वरिष्ठ नागरिकों के योगदान को सम्मान देने के लिए इस आयोजन का फैसला संयुक्त राष्ट्र ने 1990 में लिया था। इस दिन पर वरिष्ठ नागरिकों और बुजुर्गाें का […] Read more » बुजुर्ग दिवस विश्व स्वास्थ्य संगठन वृद्ध जीवन के उजालों का स्वागत करें
राजनीति समाज तभी भारत आयुष्मान बन सकेगा! September 25, 2018 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग आदिवासी जननायक बिरसा मुंडा की धरती रांची से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘आयुष्मान भारत’ के नाम से जिस आरोग्य योजना को शुरु किया है, वह निश्चय ही दुनिया की सबसे बड़ी योजना है। 50 करोड़ लोगों को पांच लाख तक का स्वास्थ्य बीमा देने वाली यह दुनिया की अपनी तरह की सबसे बड़ी […] Read more » ‘आयुष्मान भारत’ आरोग्य योजना आंख-दांत का ऑपरेशन इम्पैक्ट गुरु क्राउडफंडिंग एमआरआई कैंसर की सर्जरी सीटी स्कैन हार्ट की बाइपास सर्जरी
राजनीति समाज एकात्म मानववाद – एक दिव्य सिद्धांत September 25, 2018 by प्रवीण गुगनानी | Leave a Comment प्रवीण गुगनानी महान दार्शनिक प्लेटो के शिष्य व सिकंदर के गुरु अरस्तु ने कहा था – “विषमता का सबसे बुरा रूप है विषम चीजों को एक सामान बनाना।” The worst form of inequality is to try to make unequal things equal. एकात्म मानववाद, विषमता को इससे बहुत आगे के स्तर पर जाकर हमें समझाता है. भारत को देश से […] Read more » अंग्रेज शासन ईश्वरीय भाव फासीवाद मार्क्सवाद राष्ट्र राष्ट्रहित
धर्म-अध्यात्म समाज -आर्यसमाज धामावाला, देहरादून का साप्ताहिक सत्संग-“माता-पिता व पितरों की सेवा से सन्तानों द्वारा उनका ऋण चुकता होता है : आचार्य वीरेन्द्र शास्त्री” September 24, 2018 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य, आर्यसमाज, धामावाला, देहरादून सन् 1879 में महर्षि दयानन्द जी द्वारा स्थापित आर्यसमाज है जहां उन्होंने विश्व में पहली बार एक मुस्लिम मत के बन्धु मोहम्मद उमर व उसके परिवार को उसकी इच्छानुसार वैदिक धर्म में दीक्षित कर उसे अलखधारी नाम दिया था। आज रविवार के सत्संग में यहां आरम्भ में अग्निहोत्र हुआ […] Read more » आचार्य वीरेन्द्र शास्त्री जी आर्यसमाज ईश्वर याज्ञवल्क्य श्राद्ध श्री वीरेन्द्र शास्त्री
समाज महिला होना कुछ खास होता है। September 24, 2018 by डॉ नीलम महेन्द्रा | Leave a Comment डॉ नीलम महेंद्र अभी हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो जिसका शीर्षक था, ” रन लाइक अ गर्ल” अर्थात एक लड़की की तरह दौड़ो, काफी सराहा गया जिसमें 16- 28 साल तक की लड़कियों या फिर इसी उम्र के लड़कों से जब “लड़कियों की तरह” दौड़ने के लिए कहा गया तो लड़के तो छोड़िए लड़कियाँ भी अपने हाथों […] Read more » ईकवीटेबल सोसायटी " रन लाइक अ गर्ल" महिला होना कुछ खास होता है।
समाज भारत में वेश्यावृत्ति, नर्तकियां और कला September 24, 2018 by अनिल अनूप | Leave a Comment अनिल अनूप पुरातन काल में संगीत में, नृत्य और रंगमंच अक्सर वेश्यावृत्ति से जुड़े होते थे और परंपरागत रूप से निम्न जातियों से संबंधित मनोरंजन करते थे। नर्तकियां पारंपरिक रूप से कुछ मनोरंजक जातियों के सदस्य रहे हैं। उन्होंने जाति व्यवस्था और शुद्धता पैमाने में कम स्थान दिया और यात्रा के मैदानों में काम करके […] Read more » एक्रोबैट्स क्वालैंडर्स कुशल जॉगलर्स जादूगर नर्तकियां और कला भारत में वेश्यावृत्ति भालू हैंडलर