समाज आप जानते हैं भारत की ‘रोटी टोकरी’ किसे कहा जाता है? December 10, 2018 / December 10, 2018 by अनिल अनूप | Leave a Comment अनिल अनूप पंजाबी व्यंजन सबसे विशिष्ट और लोकप्रिय भारतीय व्यंजनों में से एक है और पंजाब के क्षेत्र से आंशिक रूप से भारत और पाकिस्तान में स्थित है। यह विविध पारंपरिक पाक शैली, विशेष रूप से तंदूरी शैली के साथ तैयार किए जाने वाले मनोरंजक और विदेशी शाकाहारी और मांसाहारी व्यंजनों की एक विस्तृत विविधता प्रदान […] Read more » आप जानते हैं भारत की ‘रोटी टोकरी' किसे कहा जाता है? घी जन दही पनीर मक्खन मसालेदार समृद्ध स्पष्ट मक्खन
समाज कोठे पर “रखैल” और “चादर ” प्रथा December 10, 2018 / December 10, 2018 by अनिल अनूप | 1 Comment on कोठे पर “रखैल” और “चादर ” प्रथा अनिल अनूपबिना किसी दलाल के हमलोग सामने वाली गली के ही एक पक्के दो मंजिली मकान में जा घुसे। अंदर जाते ही सामान्य साज सज्जा के एक बड़े हॉल में बैठी दो उम्रदराज महिलाओं ने स्वागत किया। मेरे साथ वाले छायाकारों ने दनादन इनकी तस्वीर समेत हॉल के रंग रूप को कैमरे में बंद कर […] Read more » कोठे पर “रखैल” और “चादर ” प्रथा महिलाओं वेश्याओं
समाज कुरीतियों से लड़ते जीत गई ‘माँ’ December 10, 2018 / December 10, 2018 by अनिल अनूप | Leave a Comment अनिल अनूप एक बार जब मेरी मां कोलकाता से मुंबई मुझसे मिलने आयी, तो उन्होंने मुझसे पूछा, ‘ये कंप्यूटर-इंटरनेट पर कितने सारे लोगों की तस्वीरें आती हैं, तूने मेरी फोटो क्यों नहीं लगाई?’उन्हें लगा कि मैंने उनसे शर्मिंदा होकर उनकी तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर नहीं की है, लेकिन मैंने इस बारे में कभी सोचा […] Read more » (समाज की भाषा कंप्यूटर-इंटरनेट कुरीतियों से लड़ते जीत गई ‘माँ’ घुँघरू तबला बाजा
प्रवक्ता न्यूज़ समाज क्या आत्महत्या समस्या का समाधान है या नयी समस्या का सर्जक December 10, 2018 / December 10, 2018 by अनिल अनूप | Leave a Comment अनिल अनूपहाल ही में शाहाबाद (कुरुक्षेत्र) में एक व्यक्ति ने फांसी लगा कर खुदकुशी कर ली और मरने से पहले उसने अपने घर की दीवारों और फेसबुक पर लिखा कि मेरी मौत के लिए मेरी पत्नी जिम्मेवार है। अपनी पत्नी के साथ हुई अनबन को इसका कारण बताया गया। हिसार में एक दंपति ने ट्रेन […] Read more » क्या आत्महत्या समस्या का समाधान है या नयी समस्या का सर्जक नातेदारी परिवार मित्रता विवाह संबंध व्यावसायिक
समाज प्रवासी मजदूर बनाम सच्चे सर्वहारा December 7, 2018 / December 7, 2018 by अनिल अनूप | Leave a Comment अनिल अनूप मज़दूरों का प्रवासी होना (‘माइग्रेशन’, आप्रवास या प्रव्रजन) पूँजीवाद की आम परिघटना, लक्षण और परिणाम है। यूँ तो ज़्यादातर औद्योगिक मज़दूर या अन्य शहरी मज़दूर भी ऐसे ही लोग हैं जो (या जिनकी पूर्ववर्ती पीढ़ियाँ) कभी न कभी गाँव से प्रवासी होकर शहर आये थे। धीरे-धीरे वे किसी एक शहर या औद्योगिक क्षेत्र […] Read more » कैजुअल ठेका दिहाड़ी प्रवासी मजदूर बनाम सच्चे सर्वहारा भारतीय पूँजीपतियों
राजनीति समाज किसान ऋण माफ़ी योजनाएँ एवं उनके सामाजिक सरोकार December 7, 2018 by अभिलेख यादव | Leave a Comment डॉ. जीतेंद्र प्रताप भारत सदियों से कृषि प्रधान देश रहा है। विगत वर्षों में या यूँ कहें आजादी के बाद से ही विविध सरकारों ने अपने-अपने तरीकों से किसानों का उपयोग ही किया है। लेकिन जिस तरह से आजकल किसान या उनके मुद्दे चर्चा में रह रहे हैं, वह खासकर एक किसान के लिए, थोड़ा […] Read more » आंध्र प्रदेश किसान ऋण माफ़ी योजनाएँ एवं उनके सामाजिक सरोकार कृषि लोन गरीब बिचौलियों बैंकों मजदूर मध्य प्रदेश महाजनों महाराष्ट्र
राजनीति समाज उन चिराग़ों को बुझा दो तो उजाला होगा December 5, 2018 by अभिलेख यादव | Leave a Comment निर्मल रानी उत्तर प्रदेश के बुलंद शहर में पिछले दिनों गौमांस की अफ़वाह को लेकर फैली हिंसा में एक जांबाज़ व कर्मठ पुलिस अधिकारी सुबोध कुमार सिंह की उग्र भीड़ ने हत्या कर दी। पुलिस व उग्र भीड़ के मध्य हुए संघर्ष में भारतीय जनता पार्टी के एक कार्यकर्ता की भी हत्या हो गई। इस […] Read more » उन चिराग़ों को बुझा दो तो उजाला होगा हिंदू-मुस्लिम
समाज कितनी किरदार निभाती औरत December 4, 2018 / December 4, 2018 by अनिल अनूप | 1 Comment on कितनी किरदार निभाती औरत अनिल अनूप हर समय हर लम्हा दूसरों की फिक्र करने वाली औरत के रुप में मां,एक बेटी, एक पत्नी और एक बहू ना जाने कितने ही किरदार निभाती !महिला चाहे कुछ भी करे लेकिन ये एक ऐसा कठोर सत्य है जो हमेशा से होता आया है और शायद होता भी रहेगा.. हमेशा दर्द औरतों को […] Read more » -ऐसि़ड एटेक कितनी किरदार निभाती औरत छेड़छाड़ रेप
समाज अजब गजब रिवाज थे राज रजवारे के December 4, 2018 / December 4, 2018 by अनिल अनूप | Leave a Comment अनिल अनूप पटियाला (पंजाब) में पुरानी रियासत के महल आज भी महाराजा भुपिंदर सिंह की 365 रानियों के किस्से बयान करते हैं। महाराजा भुपिंदर सिंह ने यहां वर्ष 1900 से वर्ष 1938 तक राज किया। महाराज भुपिंद्र सिंह का जीवन रंगीनियों से भरा हुआ था। इतिहासकारों के मुताबिक महाराजा की 10 अधिकृत रानियों के समेत […] Read more » गेट महाराजा नरेन्द्र सिंह महाराजा भूपिंदर सिहं शिव मंदिर
समाज मीणा भाषा की उत्पत्ति और विकास December 3, 2018 by अभिलेख यादव | 1 Comment on मीणा भाषा की उत्पत्ति और विकास श्री पिंटू कुमार मीना “निज भाषा उन्नति अहे, सब उन्नति को मूल, बिन निज भाषा ज्ञान के, मिटे न हिय को शूल ।” भारतेंदु हरिश्चन्द्र का उक्त प्रसंग आज भी प्रासंगिक बना हुआ है । हम अपनी भाषा के अभाव में न अपना विकास पर पाएंगे और न ही अपने हृदय को आत्मसंतुष्टि दे पाएंगे […] Read more » उदई कऊ- (सिगरी) गंगापुर ग्रामीण गड्डमड्ड- (ऊपर-नीचे) चीना- (चिन्ह) जाहिरा डांडी डोल/डोड़- (मेंड) दचकी- (पिचकी) निपजी-(उपजी) न्यांहा- (यहाँ) पदड़ता- (भागता) पिण- (लेकिन) बड़ीला बामणवास तहसील ब्यालू- (शाम का खाना) भेड़े- (इकट्टे) भौत- (बहुत) रपेटी- (दवाई) राणीला लग्गे-ढग्गे- (आस-पास) लड्डी- (ऊट गाड़ी) लोही- (खून) तथा छांद हम्बे रे- (हाँ रे)
समाज भुखमरी के प्रति संवेदनाशून्य होता वैश्विक समाज December 3, 2018 / December 3, 2018 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य आज की तथाकथित सभ्य दुनिया के लिए यह बहुत ही दुखद और आश्चर्यजनक है कि जब धरती के कुछ मुट्ठी भर लोग आसमान से बातें कर रहे हो तब इस भूमंडल पर ऐसे करोड़ों लोग कीड़े मकोड़ों की भांति अपना जीवन यापन करने के लिए विवश हैं जिन्हें भुखमरी की अवस्था में […] Read more » अंतर राष्ट्रीय कृषि विकास कोष बाल विकास कोष भुखमरी के प्रति संवेदनाशून्य होता वैश्विक समाज विश्व खाद्य संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन
समाज देश की आजादी और शिक्षा के क्षेत्र में अहम् योगदान रहा परमपूज्य स्वामी ब्रह्मानंद जी का December 3, 2018 / December 3, 2018 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment ब्रह्मानंद राजपूत स्वामी ब्रह्मानंद का व्यक्तित्व महान था। उन्होंने समाज सुधार के लिए काफी कार्य किएदेश की स्वतंत्रता के लिए उन्होंने जहां स्वयं को समर्पितकर कई आंदोलनों में जेल काटी।आजादी के बाद देश की राजनीति में भी उनका भावी योगदान रहा हैस्वामी जी ने शिक्षा के क्षेत्र में बहुत ही कार्यकिए।समाज के लोगों को शिक्षा की ओर ध्यान देने का आहवान किया। स्वामी ब्रह्मानंद महाराज का जन्म 04 दिसंबर 1894 को उत्तर प्रदेश केहमीरपुर जिले की राठ तहसील के बरहरा नामक गांव में साधारण किसान परिवार में हुआ था।स्वामी ब्रह्मानंद महाराज जी के पिता का नाममातादीन लोधी तथा माता का नाम जशोदाबाई था। स्वामी ब्रह्मानंद के बचपन का नाम शिवदयाल था। स्वामी ब्रह्मानंद ने बचपन से ही समाज मेंफैले हुए अंधविश्वास और अशिक्षा जैसी कुरूतियों का डटकर विरोध किया। स्वामी ब्रह्मानंद जी की प्रारम्भिक शिक्षा हमीरपुर में ही हुई। इसकेपश्चात् स्वामी ब्रह्मानंद जी ने घर पर ही रामायण, महाभारत, गीता, उपनिषद और अन्य शास्त्रों का अध्ययन किया। इसी समय से लोग उन्हेंस्वामी ब्रह्मानंद से बुलाने लगे। कहा जाता है कि बालक शिवदयाल के बारे में संतों ने भविष्यवाणी कि थी कि यह बालक या तो राजा होगा याप्रख्यात सन्यासी। बालक शिवदयाल का रुझान आध्यात्मिकता कि तरफ ज्यादा होने के कारण पिता मातादीन लोधी को डर सताने लगा कि कहीं वेसाधु न बन जाए। इस डर से मातादीन लोधी ने स्वामी ब्रह्मानंद जी का विवाह 7 वर्ष की उम्र में हमीरपुर के ही गोपाल महतो कि पुत्री राधाबाई सेकरा दिया। आगे चलकर राधाबाई ने एक पुत्र और एक पुत्री को जन्म दिया। लेकिन स्वामी जी का चित्त अब भी आध्यात्मिकता कि तरफ था। स्वामीब्रह्मानंद जी ने 24 वर्ष की आयु में पुत्र और पत्नी का मोह त्याग गेरूए वस्त्र धारण कर परम पावन तीर्थ स्थान हरिद्वार में भागीरथी के तट पर‘‘हर कि पेड़ी’’ पर सन्यास कि दीक्षा ली। संन्यास के बाद शिवदयाल लोधी संसार में ‘‘स्वामी ब्रह्मानंद’’ के रूप में प्रख्यात हुए। संन्यास ग्रहण करनेके बाद स्वामी ब्रह्मानंद ने सम्पूर्ण भारत के तीर्थ स्थानों का भ्रमण किया। इसी बीच उनका अनेक महान साधु संतों से संपर्क हुआ। इसी बीच उन्हेंगीता रहस्य प्राप्त हुआ। पंजाब के भटिंडा में स्वामी ब्रह्मानंद जी की महात्मा गाँधी जी से भेट हुई। गाँधी जी ने उनसे मिलकर कहा कि अगर आपजैसे 100 लोग आ जायें तो स्वतंत्रता अविलम्ब प्राप्त की जा सकती है। गीता रहस्य प्राप्त कर स्वामी ब्रह्मानंद ने पंजाब में अनेक हिंदी पाठशालाएंखुलवायीं और गौबध बंदी के लिए आंदोलन चलाये। इसी बीच स्वामी जी ने अनेक सामजिक कार्य किये 1956 में स्वामी ब्रह्मानंद को अखिलभारतीय साधु संतों के अधिवेशन में आजीवन सदस्य बनाया गया और उन्हें कार्यकारिणी में भी शामिल किया गया। इस अवसर पर देश के प्रथम राष्ट्रपति स्वर्गीय डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी सम्मिलित हुए। स्वामी जी सन् 1921 में गाँधी जी के संपर्क में आकर स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। स्वतंत्रताआन्दोलन में भी स्वामी ब्रह्मानंद जी ने बढ चढकर हिस्सा लिया। 1928 में गाँधी जी स्वामी ब्रह्मानंद के प्रयासों से राठ पधारे। 1930 में स्वामी जीने नमक आंदोलन में हिस्सा लिया। इस बीच उन्हें दो वर्ष का कारावास हुआ। उन्हें हमीरपुर, हरदोई और कानपूर कि जेलों में रखा गया। उन्हें पुनःफिर जेल जाना पड़ा। स्वामी ब्रह्मानंद जी ने पूरे उत्तर भारत में उन्होने अग्रेजों के खिलाफ लोगों में अलख जगाई। स्वतंत्रता आन्दोलन के समयस्वामी जी का नारा था उठो! वीरो उठो!! दासता की जंजीरों को तोड फेंको। उखाड़ फेंको इस शासन को एक साथ उठो आज भारत माता बलिदानचाहती है। उन्होने कहा था की दासता के जीवन से म्रत्यु कही श्रेयस्कर है। बरेली जेल में स्वामी ब्रह्मानंद की भेट पंडित जवाहर लाल नेहरू जी से हुई। जेल से छूटकर स्वामी ब्रह्मानंद शिक्षा प्रचार में जुट गए। 1942 में स्वामी जी को पुनः भारत छोडो आंदोलन में जेल जाना पड़ा। स्वामी जी नेसम्पूर्ण बुन्देलखंड में शिक्षा की अलख जगाई आज भी उनके नाम से हमीरपुर में डिग्री कॉलेज चल रहा है। जिसकी नीव स्वामी ब्रह्मानंद जी ने 1938में ब्रह्मानंद विद्यालय के रूप में रखी। 1966 में गौहत्या निषेध आंदोलन में स्वामी ब्रह्मानंद ने 10-12 लाख लोगों के साथ संसद के सामने आंदोलनकिया। गौहत्या निषेध आंदोलन में स्वामी ब्रह्मानंद को गिरप्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया गया। तब स्वामी ब्रह्मानंद ने प्रण लिया कि अगली बारचुनाव लड़कर ही संसद में आएंगे। स्वामी जी 1967 से 1977 तक हमीरपुर से सांसद रहे।जेल से मुक्त होकर स्वामी जी ने हमीरपुर लोकसभा सीटसे जनसंघ से 1967 में चुनाव लड़ा और भारी मतों से जीतकर संसद भवन पहुंचे देश की संसद में स्वामी ब्रह्मानंद जी पहले वक्ता थे जिन्होनेगौवंश की रक्षा और गौवध का विरोध करते हुए संसद में करीब एक घंटे तक अपना ऐतहासिक भाषण दिया था। 1972 में स्वामी जी पूर्व प्रधानमंत्रीइंदिरा गाँधी के आग्रह पर कांग्रेस से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी और राष्ट्रपति वीवी गिरि से स्वामी ब्रह्मानंद केकाफी निकट संबंध थे। स्वामी जी की निजी संपत्ति नहीं थीसन्यास ग्रहण करने के बाद उन्होने पैसा न छूने का प्रण लिया था और इस प्रण कापालन मरते दम तक किया। स्वामी ब्रह्मानंद अपनी पेंशन छात्रछात्राओं के हित में दान कर दिया करते थे।समाज सुधार और शिक्षा के प्रसार केलिए उन्होने अपना जीवन अर्पित कर दिया। वह कहा करते थे मेरी निजी संपत्ति नहीं है, यह तो सब जनता Read more » डॉ. राजेंद्र प्रसाद डॉ. राजेंद्र प्रसाद पंडित जवाहर लाल नेहरू महात्मा गांधी संन्यास स्वामी ब्रह्मानंद जी