विविधा हिन्दू महाकाव्य और सत्यान्वेषी-1 September 15, 2012 / September 15, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 1 Comment on हिन्दू महाकाव्य और सत्यान्वेषी-1 ऐसे हुआ ह्रदय परिवर्तन हो.वे. शेषाद्रि कुछ साल पहले श्री सुनील मुखर्जी नामक सज्जन कलकत्ता के निकट बेरहामपुर में मुझसे मिलने आए थे। उनके एक निकट के रिश्तेदार श्री दिलीप दा, जो हमारे स्वयंसेवक थे, उन्हें लेकर आए थे। श्री मुखर्जी की पृष्ठभूमि दिलीप दा मुझे पहले ही बता चुके थे। वे बंगाल में नक्सलवादी […] Read more » नक्सलवाद रामायण
विविधा हम स्वयं ही तो कर रहे हैं हिंदी की हिंदी September 15, 2012 / September 15, 2012 by तेजवानी गिरधर | 4 Comments on हम स्वयं ही तो कर रहे हैं हिंदी की हिंदी तेजवानी गिरधर शीर्षक पढ़ कर ही आप समझ गए होंगे कि हमने हिंदी भाषा की हालत क्या कर दी है। शीर्षक में दूसरी बार आया हिंदी शब्द उपमेय है, जिसे आजकल बोलचाल की भाषा में किसी का अपमान करने के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा है। जिस संदर्भ में दूसरी बार आए हिंदी शब्द को […] Read more » status of hindi
विविधा विकास का संदर्भ और स्वरूप September 15, 2012 / September 15, 2012 by के. एन. गोविंदाचार्य | Leave a Comment के एन गोविंदाचार्य भारतीय संदर्भ में विकास के साथ कुछ बुनियादी शर्त जुड़ी हैं। यहां वास्तविक विकास कार्य उसी को कहा जा सकता है जिसमें अंतिम व्यक्ति का हित सर्वोपरि रहे। जबकि आज हो रहा है इसके ठीक उलटा। आज जो नीतियां बनाई जा रही हैं, उनमें आम आदमी की बजाए पूंजीपतियों एवं प्रभावशाली समूहों […] Read more » विकास
विविधा हिन्दी दिवस पर विशेष:कटघरे में हिन्दी…. September 15, 2012 / September 15, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment लखेश्वर चंद्रवन्शी ‘लखेश’ यॉर ऑनर ! ये जो व्यक्ति मेरे सामने कटघरे में खड़ा है। पांच वर्षों से मेरे पीछे पड़ा है। जहाँ भी जाता हूँ, मेरे पीछे लग जाता है। बार-बार, एक ही बात दोहराता है। हिन्दी बोलना सीख जा… नमस्ते बोलना सीख जा… इसकी हरकतों से हम अपना सिर पीट रहे हैं। हम […] Read more » hindi day special
विविधा संघ दर्शन की तरह है सुदर्शन जी का व्यक्तित्व September 15, 2012 by प्रवीण दुबे | 1 Comment on संघ दर्शन की तरह है सुदर्शन जी का व्यक्तित्व प्रवीण दुबे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को अगर समझना है तो पूर्व सरसंघचालक श्री कुप्प. सी. सुदर्शन के व्यक्तित्व और कृतित्व का अध्ययन कीजिए, उनके जीवन में वह सारी बातें निहित हैं जो संघ में हैं। कई बार संघ पर तरह-तरह के आरोप लगते रहते हैं। कोई संघ को सांप्रदायिक कहता है तो कोई कट्टरवादी कोई […] Read more » कुप्प्.सी.सुदर्शन
विविधा कुप्प्. सी. सुदर्शन : एक सच्चे राष्ट्रिय नेता September 15, 2012 by डॉ. धनाकर ठाकुर | Leave a Comment नेपाल से एक मैथिली भक्त प्रवीण कुमार चौधरी के फेसबुक पर दी गयी श्रद्धांजलि “Deep Condolance! “मैथिलिके अष्टम अनुसूचीमे नाम दियौनिहार के सी सुदर्शन अमर छथि. हिनक पुण्यआत्माके इस्वर चिर शांति प्रदान करैथ,” से मैं जान पाया कि सुदर्शनजी अब नहीं रहे और उनकी अनेक स्मृतियाँ माथे में कौंध गयी। कुछ दिन पूर्व उनके मैसूर से […] Read more » कुप्प्.सी.सुदर्शन
विविधा नवीन सोच के धनी : श्री कुप्.सी. सुदर्शन September 15, 2012 by विजय कुमार | 1 Comment on नवीन सोच के धनी : श्री कुप्.सी. सुदर्शन विजय कुमार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पांचवें सरसंघचालक श्री कुप्.सी. सुदर्शन मूलतः तमिलनाडु और कर्नाटक की सीमा पर बसे कुप्पहल्ली (मैसूर) ग्राम के निवासी थे। कन्नड़ परम्परा में सबसे पहले गांव, फिर पिता और फिर अपना नाम बोलते हैं। उनके पिता श्री सीतारामैया वन-विभाग की नौकरी के कारण अधिकांश समय मध्यप्रदेश में ही रहे और […] Read more »
विविधा सुदर्शन जी का होना, जाना और बार-बार आना September 15, 2012 by अनिल सौमित्र | 5 Comments on सुदर्शन जी का होना, जाना और बार-बार आना अनिल सौमित्र 81 वर्ष की उम्र में भी बच्चों के बीच बाल-सुलभ व्यवहार। सुबह और सायं काल दोनों वक्त शाखा जाने का स्वयं का आग्रह। किसी भी बीमारी के लिये आयुर्वेद, योग और भारतीय पद्धति से इलाज का आग्रह। दवाई कम परहेज ज्यादा। देश-समाज की उन्नति के लिये देशज और परंपरागत उपायों का आग्रह। यह […] Read more » कुप्प्.सी.सुदर्शन
विविधा कमज़ोर नहीं है हिन्दी September 15, 2012 / September 15, 2012 by राघवेन्द्र कुमार 'राघव' | 1 Comment on कमज़ोर नहीं है हिन्दी राघवेन्द्र कुमार ”राघव” हर बार की तरह इस बार भी १४ सितम्बर हिन्दी की याद दिला गया | हिन्दी का विकास हो रहा है , प्रचार – प्रसार में बड़ी -बड़ी बातें कहते हुए नीति नियन्ता, सब कितना अच्छा लगता है | मन को भी यह जानकर सांत्वना मिल जाती है कि वर्ष में एक […] Read more » hindi
विविधा हिंदी का सफ़र: अर्श से फर्श तक …. September 14, 2012 / September 14, 2012 by प्रशांत राय | 1 Comment on हिंदी का सफ़र: अर्श से फर्श तक …. प्रशांत राय हिंदी हमारी राज भाषा होने के साथ साथ विश्व की चौथी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है | यह विश्व के लगभग ३० करोड़ (४.४६ %) लोगो द्वारा बोली जाती है; जिसके ऊपर सिर्फ मंदारिन (१४.१ %), स्पेनिश (५.८ %) और अंग्रेजी (५.५२ %) भाषा ही आती हैं | इसकी प्रसारता भारत के […] Read more » हिंदी
विविधा हिन्दी के ह्रास का सबब बनी ‘हिंग्लिश’ September 14, 2012 / September 14, 2012 by राजेश कश्यप | 5 Comments on हिन्दी के ह्रास का सबब बनी ‘हिंग्लिश’ राजेश कश्यप 14 सितम्बर/राष्ट्रीय हिन्दी दिवस विशेष आजकल राष्ट्रभाषा हिन्दी बेहद नाजुक दौर से गुजर रही है। वैश्विक पटल पर अपनी प्रतिष्ठा को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए विभिन्न चुनौतियों से जूझ रही हिन्दी के समक्ष भारी धर्मसंकट खड़ा हो चुका है। इस धर्मसंकट का सहज अहसास भारत सरकार के गृह मंत्रालय और राजभाषा विभाग […] Read more » हिंग्लिश
विविधा व्यंग्य बाण: हिन्दी ओढ़ें, देवनागरी बिछाएं September 11, 2012 by विजय कुमार | Leave a Comment विजय कुमार पिछले दिनों किसी काम से शर्मा जी के घर गया, तो उनकी मेज पर चिट्ठियों और निमन्त्रण पत्रों का ढेर लगा था। उन्होंने मेरी ओर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया और पत्रों से उलझे रहे। – क्या बात है शर्मा जी, बड़े व्यस्त लग रहे हैं ? – हां भई, 14 सितम्बर आ […] Read more » हिंदी दिवस