विविधा भुला बैठे हैं स्वाधीनता का स्वाद August 17, 2012 / August 17, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | Leave a Comment भुला बैठे हैं स्वाधीनता का स्वाद दासता के नवाचार हो रहे हावी डॉ. दीपक आचार्य जिस ज़ज़्बे के साथ स्वाधीनता पाने के लिए हमारे पुरखों ने संघर्ष और बलिदान का इतिहास कायम किया है वह ज़ज़्बा स्वाधीन होने के बाद एक तरह से खत्म सा होता जा रहा है। स्वाधीनता का स्वाद अब फीका पड़ने […] Read more »
विविधा दोनों हाथों लुटता असंगठित उपभोक्ता August 16, 2012 / August 16, 2012 by निर्मल रानी | Leave a Comment निर्मल रानी दिन-प्रतिदिन निरंतर बढ़ती जा रही मंहगाई के बोझ तले जहां आम लोग दबते जा रहे हैं तथा उनका जीना मुहाल हो गया है वहीं यह आम उपभोक्ता मंहगाई के अतिरिक्त और भी तरह-तरह की ठगी का शिकार होते देखे जा सकते हैं। परंतु ज़ाहिर है जो सरकार या प्रशासन उत्पादकों व व्यापारियों को […] Read more » दोनों हाथों लुटता असंगठित उपभोक्ता लुटता असंगठित उपभोक्ता
विविधा आजाद देश के गुलाम August 15, 2012 by डॉ0 आशीष वशिष्ठ | 2 Comments on आजाद देश के गुलाम डॉ. आशीष वशिष्ठ आजादी मिले 65 वर्ष हो चुका है लेकिन देश की आबादी का बड़ा हिस्सा आज भी गुलामों सी जिन्दगी बसर करने को मजबूर है। यह वो कड़वी हकीकत है जिसे पचा पाना शायद थोड़ा मुशकिल है लेकिन इससे सच्चाई बदलने वाली नहीं है। आजादी के बाद आम आदमी के जीवन में मामूली […] Read more » स्वतंत्रता दिवस
विविधा स्वतंत्रता-दिवस की सार्थकता August 15, 2012 by राजीव गुप्ता | Leave a Comment राजीव गुप्ता 15 अगस्त 1945 को जापान के आत्मसमर्पण के साथ द्वितीय विश्व युद्ध हिरोशिमा और नागासाकी के त्रासदी के रूप में कलंक लेकर समाप्त तो हुआ परन्तु जापान पिछले वर्ष आये भूकंप और सूनामी जैसी त्रासदी के बाद भी बिना अपने मूल्यों से समझौता किये राष्ट्रभक्ति, अपनी ईमानदारी और कठिन परिश्रम के आधार पर […] Read more » स्वतंत्रता दिवस
विविधा भ्रष्टाचार की शुरुआत कहाँ से…? August 13, 2012 / August 13, 2012 by डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' | 2 Comments on भ्रष्टाचार की शुरुआत कहाँ से…? डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ आजादी के बाद से अनेक मोर्चों पर मनमानी और भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ छोटे-बड़े अनेक आन्दोलन देश में होते रहे हैं। जिनमें से अधिकतर का इतिहास है कि वे भ्रष्टाचार की गंगोत्री में डुबकी लगाने के बाद समाप्त होते रहे हैं। पिछले एक वर्ष के दौरान समाज के एक वर्ग और […] Read more » start of corruption भ्रष्टाचार की शुरुआत
विविधा गोगोई सरकार की देन है असम की वर्तमान समस्या August 8, 2012 by गौतम चौधरी | 1 Comment on गोगोई सरकार की देन है असम की वर्तमान समस्या गौतम चौधरी इन दिनों असम कई मामलों को लेकर सुर्खियों में है। संयोग कहिए या साजिश इन सारे मामलों में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बांग्लादेशी मुसलमानों का हाथ बताया जा रहा है। पहली घटना एक महिला विधायक का है, जिसने अपनी राजनीति की शुरूआत भारतीय जनता पार्टी से की फिर कांग्रेस मे चली गयी। […] Read more » असम में हिंसा
विविधा असम में हिंसाचार : एक स्थायी उपाय / मा.गो. वैद्य August 8, 2012 / August 10, 2012 by मा. गो. वैद्य | 1 Comment on असम में हिंसाचार : एक स्थायी उपाय / मा.गो. वैद्य मा. गो. वैद्य असम के कोक्राझार जिले में फूटा हिंसाचार अब रूका है. ‘अब’ यह शब्द महत्त्व का है. वह फिर कब फूट पड़ेगा इसका भरोसा नहीं. दोनों पक्ष के लाखों लोग निर्वासित शिविरों में रह रहें हैं. कई गांव बेचिराख हुए हैं. अंतर इस हिंसाचार में एक पक्ष ‘बोडो’ जनजाति का है, तो दूसरा […] Read more » असम में हिंसा दंगा
विविधा चारित्रिक सदाचार बनाम व्यक्तित्व सदाचार August 6, 2012 by लालकृष्ण आडवाणी | Leave a Comment लालकृष्ण आडवाणी पुस्तकों के प्रति मेरे लगाव को जानने वाले मित्र और परिचित अक्सर मुझसे पूछते हैं कि क्या पुस्तकों की ऐसी कोई श्रेणी है जिसे मैं विशेष रूप से पसंद करता हूं। एक समय था जब मैं हल्की-फुल्की पुस्तकें पढ़ना पसंद करता था। उपरोक्त सम्बन्ध में मेरा उत्तर हुआ करता था: थ्रीलर (रोमांचक पुस्तकें)। […] Read more »
विविधा अठन्नी की ताजपोशी August 6, 2012 by एल. आर गान्धी | Leave a Comment एल.आर.गाँधी जब से एक अर्थशास्त्री ने देश की कमान सम्हाली है….देश की अर्थव्यवस्था ही ज़मींदोज़ नहीं हुयी बल्कि राजनैतिक व्यवस्था भी रसातल में जा समाई है. सिंह साहेब ने जब से ‘चवन्नी’ का चलन बंद किया है तब से लोग अठन्नी को भी उसी नज़र से देखने लगे हैं और इसका चलन भी लगभग ख़तम […] Read more » अठन्नी की ताजपोशी
विविधा और भी हैं बदनसीब जफ़र दफ्न के लिए August 3, 2012 / August 3, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment आशुतोष शर्मा अपने देश से मुहब्बत इंसान की प्राकृतिक देन है। हजारों मील दूर रहने के बावजूद वह जन्मभूमि को चाहकर भी भूल नहीं पाता है। चाहे नौकरी की तलाश में अपनी सरजमीं से दूर हो या फिर शरणार्थी के रूप में उसे वतन छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा हो, देश की मिट्टी की खुशबू […] Read more »
महत्वपूर्ण लेख विविधा हिंदी हितैषियों के चिन्तनार्थ-भाग एक / डॉ. मधुसूदन July 30, 2012 by डॉ. मधुसूदन | 10 Comments on हिंदी हितैषियों के चिन्तनार्थ-भाग एक / डॉ. मधुसूदन ~~ केल्टिक भाषा का ह्रास क्यों हुआ? ~~ अपने हाथों, अपने पैरों में शृंखलाएं डालिए । ~~ ६५ वर्षों से पिंजरा खुला, पर पंछी उड़ता नहीं है। ~~ माई-बाप सरकार वापस बुलाओ ! ~~ जब तक अंग्रेज़ी रहेगी, भारत पिछड़ा रहेगा। ~~ संस्कृति और भाषा: फूल और सुगंध ~~भाषा विज्ञानी शेल्डन पॉलॉक का, पाणिनि अनुकरण […] Read more » हिंदी
विविधा आखिर ये दंगे होते ही क्यों है July 28, 2012 / July 28, 2012 by राजीव गुप्ता | 3 Comments on आखिर ये दंगे होते ही क्यों है राजीव गुप्ता 1948 के बाद भारत में पहला सांप्रदायिक दंगा 1961 में मध्यप्रदेश के जबलपुर शहर में हुआ ! उसके बाद से अब तक सांप्रदायिक दंगो की झड़ी सी लग गयी ! बात चाहे 1969 में गुजरात के दंगो की हो , 1984 में सिख विरोधी हिंसा की हो, 1987 में मेरठ के दंगे हो […] Read more » communal riots सांप्रदायिक दंगा