विविधा कश्मीर: समस्या और समाधान August 9, 2010 / December 23, 2011 by विजय कुमार | 7 Comments on कश्मीर: समस्या और समाधान -विजय कुमार कश्मीर घाटी एक बार फिर सुलग रही है। उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती या अन्य सेकुलरों के अनुसार इसका कारण है सेना की ज्यादती। उनकी राय है कि सेना को यदि स्थायी रूप से हटा दें, तो घाटी में स्थायी शांति हो जाएगी। मुख्यमंत्री तो बहुत समय से यह मांग कर रहे हैं; पर […] Read more » kashmir कश्मीर
विविधा कश्मीरः कब पिघलेगी बर्फ August 9, 2010 / December 22, 2011 by संजय द्विवेदी | Leave a Comment -संजय द्विवेदी इन्तहा हो गई है, कश्मीर एक ऐसी आग में झुलस रहा है, जो कभी मंद नहीं पड़ती। आजादी के छः दशक बीत जाने के बाद भी लगता है कि सूइयां रेकार्ड पर ठहर सी गयी हैं। समस्या के समाधान के लिए सारी ‘पैथियां’ आजमायी जा चुकी हैं और अब वर्तमान प्रधानमंत्री ‘प्राकृतिक चिकित्सा’ […] Read more » kashmir कश्मीर
विविधा वास्तुशिल्प की अनुकृति ‘भोरमदेव’ August 8, 2010 / December 22, 2011 by श्रीकांत उपाध्याय | 2 Comments on वास्तुशिल्प की अनुकृति ‘भोरमदेव’ -श्रीकान्त उपाध्याय मानव सभ्यता विकास के चरमोत्कर्ष पर पहुँच रहा है। वास्तुकला के अद्भुत नमूने, गगनचुम्बी भवनों, मनोरंजन की आधुनिकतम सुविधाएँ आज मानव ने तैयार कर लिए हैं, फिर भी हमें सुकून नहीं मिल रहा हैं। जीवन में कहीं न कहीं रिक्तता महसूस होती है। हम पूर्वजों की परम्पराओं को, रीति-रिवाजों को पिछड़ापन, दकियानुसी और […] Read more » Vastu shilp भोरमदेव
विविधा लोकतंत्र में समानता के लिए काली पट्टी बांधकर पढ़ाते प्राध्यापक August 8, 2010 / December 22, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 4 Comments on लोकतंत्र में समानता के लिए काली पट्टी बांधकर पढ़ाते प्राध्यापक मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने हाल ही में दो नये पाठ्यक्रमों की घोषणा करते हुये कहा था कि ”लोकतंत्र को हमेशा राजनीति से जोड़ा जाता है। हम कभी भी कक्षाओं में लोकतंत्र स्थापित करने के बारे में नहीं सोचते। ये कहते हुये उन्होंने अफसोस जताया कि इस कंसेप्ट को कक्षाओं से इतना दूर […] Read more » Education शिक्षा
विविधा आतंक की टीआरपी और लाइव टीवी का स्रोत August 7, 2010 / December 22, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 3 Comments on आतंक की टीआरपी और लाइव टीवी का स्रोत -जगदीश्वर चतुर्वेदी टेलीविजन में आतंक की खबरों का सबसे ज्यादा उपभोग अमीरों में नहीं होता। अभिजन में नहीं होता। टीवी कवरेज के बारे में यह मिथ है कि टीआरपी बढ़ाने के लिहाज से लाइव कवरेज का इस्तेमाल किया गया। यह संभव है टीआरपी बढ़े और यह भी संभव है टीआरपी घटे। किंतु यह निर्णय तुरंत […] Read more » TRP आतंकवाद टीआरपी
विविधा इसे कहते हैं मति फिरना August 6, 2010 / December 22, 2011 by लोकेन्द्र सिंह राजपूत | 1 Comment on इसे कहते हैं मति फिरना -लोकेन्द्र सिंह राजपूत लगता है सरकार और सरकार के लोग पगलाय गए हैं? हमने कई बार अपने से बड़ी उम्र या हमउम्र लोगों से सुना होगा कि तेरी मति फिर गई है क्या? जो इस तरह का काम कर रहा है। दूसरा वाक्य बदल भी सकता है। जैसे तेरी मति फिर गई है क्या? जो […] Read more » Bias मति
विविधा अंधेरे में उजाले की दस्तक August 3, 2010 / December 22, 2011 by सतीश सिंह | 1 Comment on अंधेरे में उजाले की दस्तक -सतीश सिंह ‘कौन कहता है आसमान में सुराख नहीं हो सकता है, जरा तबियत से पत्थर तो उछालो यारों’। इस कथन को सच कर दिखाया है बिहार के सारण जिला में चल रहे सारण रिन्यूबल एनर्जी प्राईवेट लिमिटेड (कंपनी) के चार प्रमोटरों ने। योगेन्द्र प्रसाद, जर्नादन प्रसाद, रमेश कुमार और विवेक गुप्ता ने सन् 2006 […] Read more » Dark अंधेरे
विविधा प्रायोजित विमर्श के खतरे और बहुलतावाद August 3, 2010 / December 22, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 1 Comment on प्रायोजित विमर्श के खतरे और बहुलतावाद -जगदीश्वर चतुर्वेदी उत्तर-आधुनिक स्थिति में बहुसांस्कृतिकवाद की धारणा हठात् चर्चा के केन्द्र में आ गई है। इस धारणा का बौद्धिकों के द्वारा विमर्श के लिए बढ़ता आकर्षण इस बात का संकेत है कि इसके पीछे मंशाएं कुछ और हैं। ये लोग फैशनेबुल वस्त्रों की तरह धारणाएं बदल रहे हैं, धारणाओं के प्रति मनमाना व्यवहार कर […] Read more » Dangers विमर्श के खतरे
विविधा भू-संपदा का अवैध दोहन करते यह ‘बाहुबली देशभक्त’ August 3, 2010 / December 22, 2011 by तनवीर जाफरी | Leave a Comment -तनवीर जाफ़री पिछले दिनों गुजरात उच्च न्यायालय के समक्ष दिन दहाड़े अमित जेठवा नामक एक युवा सामाजिक कार्यकर्ता की दो अज्ञात मोटर साईकल सवार युवकों द्वारा गोली मार कर हत्या कर दी गई। अमित जेठवा सूचना के अधिकार के अंतर्गत पर्यावरण एंव अन्य सामाजिक क्षेत्रों में बड़ी ही सक्रियता एंव निर्भीकता से कार्य करते थे। […] Read more » Patriot भू-संपदा
विविधा रामफल सिंह : समरसता के नव संशोधक August 3, 2010 / December 22, 2011 by विजय कुमार | 10 Comments on रामफल सिंह : समरसता के नव संशोधक – विजय कुमार अस्पृश्यता, जातिभेद तथा ऊंचनीच हिंदू परंपरा का अंग नहीं हैं। उक्त बीमारियां मुसलमान आक्रांताओं की देन हैं जिन्हें अंग्रेजों ने अपने हित के लिए खूब हवा दी। इस विचार को समाज में स्थापित कर समरसता अभियान को नयी दिशा देने वाले श्री रामफल सिंह का जन्म ग्राम मऊ मयचक (अमरोहा, उ.प्र.) में […] Read more » Ramfal Singh रामफल सिंह
विविधा भारत की गुलामी August 2, 2010 / December 22, 2011 by विश्वमोहन तिवारी | 22 Comments on भारत की गुलामी एयर वाइस मार्शल विश्व मोहन तिवारी, से. नि चित्र देखें। इसमें और आज की स्थिति में उतना ही अन्तर है जितना कि उस जमाने की प्रौद्योगिकी में और आज की प्रौद्योगिकी में है। आप शायद सहमत न हों, किन्तु थोडा सा गौर तो करें। आज इस वैज्ञानिक युग में जहां विज्ञान की खोज के प्रकाशन […] Read more » India भारत
विविधा सत्याग्रह और गांधी जी July 30, 2010 / December 22, 2011 by विजय कुमार | 4 Comments on सत्याग्रह और गांधी जी – विजय कुमार कुछ बातें कुछ लोगों के साथ चिपक जाती हैं, या यों कहें कि जबरन चिपका दी जाती हैं। कुछ ऐसा ही सत्याग्रह और गांधी जी के साथ है। निःसंदेह गांधी जी ने सत्याग्रह रूपी शस्त्र का प्रयोग कर जन-जन में स्वाधीन होने की इच्छा जगाई। लाखों लोग सड़कों पर उतरे। यद्यपि ऐतिहासिक […] Read more » Mahatma Gandhi महात्मा गांधी सत्याग्रह