विविधा कोई क्यों बन जाता है नक्सली March 18, 2010 / December 24, 2011 by संजय द्विवेदी | 12 Comments on कोई क्यों बन जाता है नक्सली नक्सली समस्या जिस विकराल रूप में आज हमारे सामने है उसने देश की व्यवस्था के सामने कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं। यह सोचना बहुत रोमांचक है कि आखिर ऐसे कौन से हालात हैं जिनमें कोई व्यक्ति किसी अतिवादी विचार से प्रभावित होकर नक्सली बन जाता है। वो कौन से हालात है जिनमें एक सहज-सरल […] Read more » Maoist Naxalism आतंकवाद नक्सलवाद माओवाद
विविधा त्रासद अतीत से पलायन के खतरे March 18, 2010 / December 24, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | Leave a Comment जब भी किसी चीज को सौंदर्यबोधीय चरम पर पहुँचा दिया जाता है उसे हम भूल जाते हैं। अब हमें विभीषिका की कम उसके कलात्मक सौंदर्यबोध की ज्यादा याद आती है। अब द्वितीय विश्वयुद्ध की तबाही की नहीं उसकी फिल्मी प्रस्तुतियों, टीवी प्रस्तुतियों के सौंदर्य में मजा आता है। सौंदर्यबोधीय रूपान्तरण त्रासदी को आनंद में तब्दील […] Read more » Dangers खतरे
विविधा भानुमति के पिटारे से फिर निकला कुपोषण का जिन्न March 16, 2010 / December 24, 2011 by सतीश सिंह | 1 Comment on भानुमति के पिटारे से फिर निकला कुपोषण का जिन्न सरकारी आंकड़ों पर यदि विश्वास करें तो हमारे देश में छह करोड़ दस लाख से भी अधिक बच्चे कुपोषण से ग्रसित हैं। कुपोषण से ग्रसित होने के बाद बच्चों में बीमारियों से लड़ने की क्षमता या उनके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता धीरे-धीरे छीजने लगती है। इसके परिणामस्वरुप बच्चे खसरा, निमोनिया, पीलिया, मलेरिया इत्यादि से दम […] Read more » Jinn कुपोषण
विविधा मोरेल नदी बस दुर्घटना : उत्तर मांगते सवाल? March 16, 2010 / December 24, 2011 by डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' | Leave a Comment राजस्थान के सवाई माधोपुर जिला मुख्यालय के निकट स्थित मोरेल नदी के पुल पर तूडे (चारे) से भरे जुगाड से टकराकर बस नदी में गिर गयी और छब्बीस निर्दोष विद्यार्थी असमय काल के गाल में समा गये। जिनमें बस चालक, परिचालक, एक अध्यापिका और एक हलवाई भी शामिल हैं। बस दुर्घटना में मरने वाले सभी […] Read more » Bus accident मोरेल नदी बस दुर्घटना
विविधा विकासमूलक संचार की तलाश में March 12, 2010 / December 24, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | Leave a Comment विकासमूलक सम्प्रेषण का लक्ष्य है शोषण से मुक्ति दिलाना। व्यक्तिगत और सामुदायिक सशक्तिकरण। इस अर्थ में विकासमूलक सम्प्रेषण सिर्फ संदेश देने का काम नहीं करता बल्कि ‘मुक्तिकामी सम्प्रेषण’ है। आम लोगों में यह भाव पैदा करता है कि वे स्वयं भविष्य निर्माता बनें। इस प्रक्रिया में सभी शामिल हों। न कि सिर्फ लक्ष्यीभूत ऑडिएंस। इस […] Read more » Developement विकासमूलक संचार
विविधा कहां गई गौरैया की चहचहाहट March 12, 2010 / December 24, 2011 by लिमटी खरे | 1 Comment on कहां गई गौरैया की चहचहाहट याद है, जब छोटे थे, तब स्कूल जाने के लिए अलह सुबह उठाया जाता था, यह कहकर देखो चिडिया आई, देखो कौआ आया, वो देखो मोर आया। घर की मुंडेर पर छोटी सी चिडिया चहकती रहती, और उठकर स्कूल के लिए तैयार होने लगते। गरमी में कोयल की कूक मन को अलग ही सुकून देती […] Read more » Sparrow गौरैया
विविधा शांति का आधार: शिक्षा – डॉ रामजी सिंह March 12, 2010 / December 24, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on शांति का आधार: शिक्षा – डॉ रामजी सिंह शांति जीवन की आधारभूत अशंका है, लेकिन विडंबना है, वह आदिकाल से इसके लिए अशांति के आयोजन में लगा रहा है। यही कारण है अशांति कभी धर्म के रथ पर आती है तो कभी राजनीति की सखी बनकर प्रस्तुत होती है। यही कारण है कि विश्व मानवता हिंसा से लहूलुहान हो चुकी है और लगभग […] Read more » Education शिक्षा
विविधा सफ़ेद दूध का काला कारोबार March 11, 2010 / December 24, 2011 by फ़िरदौस ख़ान | Leave a Comment उपभोक्तावादी संस्कृति के चलते धन की चाहत ने लोगों को संवेदनहीन बना दिया है। वे पैसा कमाने के लिए खाद्य पदार्थों में भी मिलावट करने लगे हैं। कुछ जालसाज और स्वार्थी लोगों द्वारा शुद्ध दूध के नाम पर ‘सिंथेटिक दूध’ पीने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यह सिंथेटिक दूध रिफाइंड आयल, कास्टिक सोडा, […] Read more » Milk दूध का काला कारोबार
विविधा ऊर्जा का वैकल्पिक स्त्रोत है शैवाल March 1, 2010 / December 24, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 9 Comments on ऊर्जा का वैकल्पिक स्त्रोत है शैवाल बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में संपन्न हुई अंतराष्ट्रीय विज्ञान संगोष्ठी में ऊभर कर आई यह बात वाराणसी, 28 फरवरी (हि.स.)। शैवाल मानव जीवन के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण और बहुगुणी है। यह न केवल खाद्य पदार्थ के रूप में उपयोग में लाई जा सकती है बल्कि गंदगी साफ करने तथा स्वास्थ्य की ह्ष्टि से भी विशेष महत्व […] Read more » Energy ऊर्जा
विविधा मंदी व मंहगाई की मार झेलती जनता हो रही है ठगी का भी शिकार February 27, 2010 / December 24, 2011 by निर्मल रानी | Leave a Comment अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर छाई मंदी जहां बड़े -बडे उद्योगों तथा कारपोरेट जगत से जुडे लोगों को आर्थिक संकट से ठीक तरह से उबरने नहीं दे रही है वहीं बेतहाशा बढ़ती महंगाई ने भी आम लोगों की कमर तोड़ कर रख दी है। हालांकि सरकार द्वारा मंदी व महंगाई को लेकर तरह तरह के तर्क पेश […] Read more » Inflation ठग
विविधा छोटी खबर बडा असर! February 27, 2010 / December 24, 2011 by डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' | Leave a Comment राजस्थान के एक दैनिक समाचार पत्र के स्थानीय संस्करण में छोटी सी खबर प्रकाशित हुई कि राजस्थान के पूर्व में स्थित करौली जिले के एक गाँव के युवक की इस कारण से मौत हो गयी, क्योंकि उसकी आँख में चेंपा घुस गया, जिसके चलते उसने मोटरसाईकल का सन्तुलन खो दिया और वह पत्थरों से जा […] Read more » Bike चेंपा बाइक मोटरसाइकिल
विविधा ‘तेरा’ ‘मेरा’ ग्लोबल प्रेत February 27, 2010 / December 24, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | Leave a Comment प्रेत कभी अकेले नहीं आते हमेशा अनेक के साथ आते हैं। यह वर्णशंकर प्रेत है। यह आधा भारतीय है और आधा विलायती है। इसका राजनीतिक शरीर भी वर्णशंकर है। आधा ”हमारा” और आधा ”तुम्हारा”। यह अद्भुत मिश्रित क्लोन है। ग्लोबल कल्चर की उपज है। इसके कपड़े और मुखौटे जरूर राजनीतिक दलों के हैं किंतु इसकी […] Read more » Global प्रेत