विविधा संचार क्रांति का मानवाधिकार कार्यकर्ता है ‘ट्विटर’ और ‘ब्लॉगर’ March 31, 2010 / December 24, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | Leave a Comment भारत में ‘ट्विटर’ को अभी भी बहुत सारे ज्ञानी सही राजनीतिक अर्थ में समझ नहीं पाए हैं, खासकर मीडिया से जुड़े लोग भारत के विदेश राज्यमंत्री शशि थरुर के ‘ट्विटर’ संवादों पर जिस तरह की बेवकूफियां करते हैं उसे देखकर यही कहने की इच्छा होती है कि हे परमात्मा इन्हें माफ करना ये नहीं जानते […] Read more » Blogger ट्विटर ब्लॉगर संचार क्रांति
विविधा गर्मी आते ही कई देश के कई इलाकों में भारी जलसंकट March 30, 2010 / December 24, 2011 by संजय द्विवेदी | Leave a Comment आइए बनाएं एक पानीदार समाज मीडिया का काम है लोकमंगल के लिए सतत् सक्रिय रहना। पानी का सवाल भी एक ऐसा मुद्दा बना गया है जिस पर समाज, सरकार और मीडिया तीनों की सामूहिक सक्रियता जरूरी है। कहा गया है- रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून पानी गए न ऊबरे, मोती, मानुष,चून। प्रकृति के […] Read more » water जल संकट पानी
विविधा नरेगा : रोजगार की गारंटी या लूट की – संतोष सारंग March 30, 2010 / December 24, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 2 Comments on नरेगा : रोजगार की गारंटी या लूट की – संतोष सारंग नरेगा अब मनरेगा के नाम से जाना जा रहा है। रोजगार की गारंटी देनेवाली इस अति महत्वाकांक्षी योजना का नाम तो बदल गया लेकिन सरकार लूटेरों से बचाने का कोई ठोस उपाय करने में अब तक असफल रही हैं हमारी सरकारें। सत्ता का, सिस्टम का, जनता के रहनुमाओं का अपना चरित्र होता है, अलग प्रकृति […] Read more » Manrega नरेगा मनरेगा
विविधा बाल तस्करी का धंधा -अखिलेश आर्येन्दु March 29, 2010 / December 24, 2011 by अखिलेश आर्येन्दु | 4 Comments on बाल तस्करी का धंधा -अखिलेश आर्येन्दु कई सचों में एक सच यह भी है कि भारत में बचपन सुरक्षित नहीं है। सरकार भले ही बच्चों की सुरक्षा और उनके विकास के बड़े-बड़े दावे करे लेकिन सच्चाई इससे कहीं बहुत दूर है। इस सच्चाई को संयुक्त राष्ट्र संघ की बाल अधिकार संधि की 20वीं वर्षगांठ पर दिए आंकड़े जारी हुए थे, वे […] Read more » Child Trafficking बाल तस्करी
विविधा बिहार: जो घर जारे आपने चले हमारे साथ March 27, 2010 / December 24, 2011 by पंकज झा | 7 Comments on बिहार: जो घर जारे आपने चले हमारे साथ वाल्मीकि रामायण में भगवान राम से कहलवाया गया है..अपि स्वर्णमयी लंका, न में लक्ष्मण रोचते, जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी…यानी हे लक्ष्मण, लंका भले ही सोने की है लेकिन मुझे बिलकुल पसंद नहीं क्योंकि जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़ कर है. ऐसे ही अपने जन्मभूमि से लौट कर सतीश सिंह जी द्वारा वर्णित वाकया […] Read more » bihar बिहार
विविधा बिहार के विकास के लिए बिहारियों को भी आगे आना होगा March 27, 2010 / December 24, 2011 by सतीश सिंह | 4 Comments on बिहार के विकास के लिए बिहारियों को भी आगे आना होगा चौबीस मार्च को एक तरफ नीतीश कुमार की अगुआई में पूरा बिहार, बिहार दिवस मनाने में जुटा हुआ था तो दूसरी ओर सिर्फ 100 रुपये के लिए दिल्ली से पटना होकर इस्लामपुर जाने वाली मगध एक्सप्रेस को बनाही गाँव के कुछ नौजवानों ने जगदेव प्रसाद हाल्ट से लगभग 1 किलोमीटर पहले और बनाही गाँव के […] Read more » bihar बिहार
विविधा डोगरी की तीव्रगामी प्रगति March 27, 2010 / December 24, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment जम्मू और कश्मीर में डोगरा लोगों की भाषा डोगरी एक जीवन्त भाषा है। भारत की क्षेत्रीय भाषाओं में डोगरी का भी महत्त्वपूर्ण स्थान है और यह भी भारतीय साहित्य की समृध्दि में उल्लेखनीय योगदान दे रही है। डोगरी लोक संगीत और विश्व प्रसिध्द बाशोली लघुचित्र भारत की समृध्दि धरोहर के गौरवशाली अंश हैं। इसके अतिरिक्त, […] Read more » language डोगरी भाषा
विविधा क्या यह हिंसा ही अल्लाह की खिदमत है! March 27, 2010 / December 24, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 15 Comments on क्या यह हिंसा ही अल्लाह की खिदमत है! उत्तर प्रदेश में घट रही घटनाएं साधारण नहीं हैं। यूपी के मायाराज और दिल्ली के सोनियाराज में सेकुलर राजनीति के दुष्परिणाम हिंदू अपनी बहन-बेटियों की अस्मत और अपने तीर्थ-त्योहारों की कीमत देकर चुका रहे हैं। विगत दिनों जो कुछ बरेली में हुआ और जो अब रायबरेली में हो रहा है, उससे तो यही सबक मिलता […] Read more » communal riot सांप्रदायिक दंगा
विविधा हिन्दी समीक्षकों का बेसुरा हिन्दीराग March 26, 2010 / March 26, 2010 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 3 Comments on हिन्दी समीक्षकों का बेसुरा हिन्दीराग हिन्दी शोध जगत गंभीर गतिरोध के दौर से गुजर रहा है। नए और चुनौतीपूर्ण विषयों के प्रति रूझान घटा है। वर्तमान के प्रति हमने आंखें बंद कर ली हैं। शोध को दोयमदर्जे का लेखन मान लिया है। अनुसंधान और गंभीर चिन्तनरहित विवेक का ही चारों ओर जयगान हो रहा है। शोध के प्रति गंभीर उपेक्षा […] Read more » शोध समीक्षक हिंदी
विविधा संचार क्रांति और पोर्न उद्योग March 25, 2010 / December 24, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 1 Comment on संचार क्रांति और पोर्न उद्योग सन् 1994 मे नेटस्केप नामक मल्टीमीडिया कंपनी द्वारा वर्ल्ड वाइड वेब शुरू करने के साथ ही पोर्न ने विश्वव्यापी उद्योग की शक्ल लेली। कुछ तथ्य हैं जिनको ध्यान में रखा जाना चाहिए। कम्प्यूटर तकनीक खरीदने वाले पांच खरीददारों में एक खरीदार सेक्स उद्योग भी है। सेक्स उद्योग ने व्यापार में पहले खर्चीली ‘टी 3 ‘ […] Read more » Porn Profession पोर्न उद्योग
विविधा डॉ. लोहिया का इतिहास चिंतन – डॉ. मनोज चतुर्वेदी March 25, 2010 / December 24, 2011 by डॉ. मनोज चतुर्वेदी | 1 Comment on डॉ. लोहिया का इतिहास चिंतन – डॉ. मनोज चतुर्वेदी इतिहास की अवधारणा एवं उसकी प्रकृ ति पर अनेक मौलिक चिंतन हुए हैं। विभिन्न धर्मों और संप्रदायों में इतिहास की पौराणिक परिकल्पनाओं का प्रस्थान बिंदू मानव समाज में नैतिकता और सदाचार का अनुपालन ही रहा है। परंपराओं में यह माना जाता रहा है कि इतिहास वास्तव में उच्चावस्था लगातार उसके नैतिक पतन की कहानी है […] Read more » history इतिहास राममनोहर लोहिया
विविधा स्त्री की गुलामी का वातावरण है पोर्नोग्राफी March 24, 2010 / December 24, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 1 Comment on स्त्री की गुलामी का वातावरण है पोर्नोग्राफी अनेक अर्थों में पोर्न नैतिक मानदण्डों का उल्लंघन करती है। लोगों को स्वायत्त बनाती है। जिन विचारकों ने मालिक-गुलाम के संबंधों के नजरिए से पोर्न पर विचार किया है उनमें एलिसन स्टीयर का नाम प्रमुख है। स्टीयर का मानना है पोर्न में आमतौर पर औरत अन्य के लिए वस्तु या ऑब्जेक्ट होती है। पोर्नोग्राफी में […] Read more » Pornography पोर्नोग्राफी