विविधा निराशा असमय मृत्यु और आशा जीवन की वीणा है February 27, 2010 / December 24, 2011 by डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' | 1 Comment on निराशा असमय मृत्यु और आशा जीवन की वीणा है मित्रों, हममें से अधिकतर लोग इस कारण से दुःखी, परेशान और तनावग्रस्त रहते हैं, क्योंकि हम जाने-अनजाने अपने वर्तमान को, स्वयं ही नष्ट कर रहे हैं। कोई भी सामान्य व्यक्ति यदि ईमानदारी से स्वयं का आकलन करेगा तो वह पायेगा कि गुजर चुका समय और आने वाला समय हमेशा उसे परेशान रखता है और भूत […] Read more » Death निराशा मृत्यु
विविधा गांधी केवल बहस का मुद्दा न बने February 26, 2010 / December 24, 2011 by शिवानंद द्विवेदी | Leave a Comment भारतीय स्वतंत्रता इतिहास के पन्नो को अगर पलट कर देखा जाय तो महात्मा गाँधी के अलावा शायद ही कोई व्यक्तित्व मिलेगा जो गाँधी के बराबर में विश्व समुदाय को प्रभावित किया हो। अफ्रीका की बात करें या अमेरिका की, गाँधी का प्रभाव सार्थक परिणाम के साथ देखने को मिलता है। चाहे मार्टिन लूथर किंग हों […] Read more » Mahatma Gandhi महात्मा गांधी
विविधा आज भी प्रासंगिक हैं गांधी के विचार February 26, 2010 / December 24, 2011 by पवन कुमार अरविन्द | Leave a Comment भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सत्य और अहिंसा का उद्घोष कर आंदोलन की धार को और पैनी करने वाले महात्मा गांधी किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उन्होंने स्वतन्त्र भारत के पुनर्निर्माण के लिए रामराज्य का स्वप्न देखा था। वे कहा करते थे कि “नैतिक और सामाजिक उत्थान को ही हमने अहिंसा का नाम दिया […] Read more » Mahatma Gandhi महात्मा गांधी
विविधा हाय महंगाई… February 25, 2010 / December 24, 2011 by गोपाल सामंतो | 2 Comments on हाय महंगाई… आज देश में न जाने कितने ही लोग ऐसे है जो अपनी जेब में दो-दो मोबाईल फोन रखते हैं पर आश्चर्य की बात यह है कि अब खाने की थाली में एक साथ दो सब्जियां मुश्किल से ही देखने को मिलता है। दिन-ब-दिन ऐशो-आराम की वस्तुएं सस्ती होती जा रही है, पर मूलभूत आवश्यकताओं की […] Read more » Inflation महंगाई
विविधा नई परीक्षा प्रणाली की संकल्पना February 25, 2010 / December 24, 2011 by सतीश सिंह | Leave a Comment भले ही हाल में आईआईएम के द्वारा संचालित कैट की ऑनलाईन परीक्षा त्रुटिपूर्ण और विवादस्पद रही है, बावजूद इसके इस परीक्षा ने हमारे सामने एक नजीर कायम है। यह सच है कि आईआईएम के द्वारा संचालित कैट की ऑनलाईन परीक्षा कोई पहली ऑनलाईन परीक्षा नहीं थी, लेकिन इसके साथ यह भी सच है कि इतने […] Read more » Examination परीक्षा
विविधा अप्रत्यक्ष गुलामी है स्क्रीन संस्कृति February 25, 2010 / December 24, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 2 Comments on अप्रत्यक्ष गुलामी है स्क्रीन संस्कृति हाइपररीयल का प्रतिरोध करने के लिए स्क्रीन के खेल को जानना जरूरी है। परवर्ती पूंजीवाद के प्रौपेगैण्डा और संचार की धुरी स्क्रीन है। स्क्रीन के बिना आज कोई भी संप्रेषण संभव नहीं है। सारा देश स्क्रीन के सहारे सूचनाएं ग्रहण कर रहा है। टेलीविजन, मोबाइल से लेकर कम्प्यूटर स्क्रीन तक स्क्रीन का वातावरण फैला हुआ […] Read more » Screen culture स्क्रीन संस्कृति
विविधा समय पर काम नहीं करना भी भ्रष्टाचार! February 25, 2010 / December 24, 2011 by डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' | 1 Comment on समय पर काम नहीं करना भी भ्रष्टाचार! जनता के काम को समय पर नहीं करने वाले लोक सेवकों के बारे में मैंने जयपुर से प्रकाशित राष्ट्रीय पाक्षिक समाचार-पत्र प्रेसपालिका के 1 से 15 जनवरी, 2010 के अंक में लिखा था कि-“समय पर काम नहीं करना भ्रष्टाचार ही तो है।” अब इसी बात को मध्य प्रदेश के लोकायुक्त जस्टिस पी.पी. नावलेकर ने इस […] Read more » Corruption भ्रष्टाचार
विविधा ममता की रेल या रेल में ममता February 24, 2010 / December 24, 2011 by केशव आचार्य | 3 Comments on ममता की रेल या रेल में ममता साल 2010-11 का रेल बजट ममता बैनर्जी ने संसद में पेश कर दिया है। बजट को पेश करते वक्त दीदी का कहना है उन्होंने इस बात का खास ध्यान रखा है कि उनकी योजनाएं आर्थिक पैमाने पर कितना खरा उतरती है, साथ इस बजट का आम लोगों पर क्या प्रभाव पडेगा। ममता बैनर्जी ने कहा […] Read more » Mamta Benerji ममता बनर्जी रेल बजट
विविधा गूगल के सोशल नेटवर्क बज़ (Buzz) में प्राइवेसी पर धावा February 24, 2010 / December 24, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | Leave a Comment हाल ही में गूगल ने सोशल नेटवर्क की दुनिया में Buzz के नाम से नेट यूजरों को एक नया मंच प्रदान किया है। इसका लक्ष्य है ट्विटर और फेसबुक को चुनौती देना। इस सामाजिक नेटवर्क ने बहुतों को निराश किया है। जो लोग इस नेट पर गए उनके साथ सबसे बुरी हुई है, जो व्यक्ति […] Read more » GOOGLE गूगल
विविधा फेसबुक के वर्चुअल सत्य की लीलाएं February 23, 2010 / December 24, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 1 Comment on फेसबुक के वर्चुअल सत्य की लीलाएं इंटरनेट में प्रत्येक संचार व्यापार है। मुनाफा है। फेसबुक के आने के साथ संचार और व्यापार के क्षेत्र में एक नयी उत्तेजना देखी गयी है। निजी संचार का मार्ग प्रशस्त हुआ है। दूसरी ओर व्यापारिक संचार सहज बना है। पहले सोचा जा रहा था कि सोशल मीडिया के जरिए सामाजिक संचार में इजाफा होगा लेकिन […] Read more » Facebook फेसबुक
विविधा आतंकवाद से कैसे निपटें -बी.एल. शर्मा ‘प्रेम सिंह शेर’ February 23, 2010 / December 24, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 2 Comments on आतंकवाद से कैसे निपटें -बी.एल. शर्मा ‘प्रेम सिंह शेर’ ”मरीजे इश्क पर रहमत खुदा की मर्ज बढ़ता गया ज्यों-ज्यों दवा की।” आतंकवाद का मर्ज भी बढ़ता ही जा रहा है, उसका कारण यह है कि मर्ज का पता नहीं, फिर इलाज कैसे हो? इस्लाम की विचारधारा के अनुसार सारे संसार को ‘दारुल इस्लाम’ बनाना है। इस संकल्प को पूर्ण करने के लिए पाकिस्तान का […] Read more » terrorism आतंकवाद
विविधा रिलायंस फ्रेश की बदौलत बढ़ी है देश में महंगाई February 21, 2010 / December 24, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on रिलायंस फ्रेश की बदौलत बढ़ी है देश में महंगाई आम आदमी का जीना मुहाल कर देने वाली महंगाई पर तरह-तरह के विश्लेषण किए गए हैं लेकिन किसी ने भी यह जहमत उठाने की कोशिश नहीं की है कि आखिर हमारे देश में प्रचुर उत्पादन के बावजूद एकाएक शक्कर के साथ अन्य सभी खाद्य पदार्थों की कीमतों में क्यों बढ़ोत्री हुई है। कुछ दिन पहले […] Read more » Inflation महंगाई