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चीनी वस्तुओं पर भारी पड़ी देशभक्ति

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देश में पूर्व से ही कई संस्थाओं ने विदेशी सामानों का विरोध किया है और आज भी कर रहे हैं। महात्मा गांधी भी पूरी तरह से विदेशी वस्तुओं के विरोध में रहे। यहां तक कि हमारे देश में स्वतंत्रता से पूर्व देश भाव के प्रकटीकरण के लिए विदेशी वस्तुओं की होली जलाई थी, ऐसा केवल इसलिए किया गया ताकि देश में स्वदेशी का भाव प्रकट हो सके, लेकिन आज हम क्या कर रहे हैं। स्वयं ही विदेशी सामान खरीदकर उनको आमंत्रित कर रहे हैं। यह बात सही है कि कोई देश भारत में व्यापार करके भारत का भला नहीं कर सकता, इस व्यापार के माध्यम से वह अपने आपको ही मजबूत करता है।

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भीड़ प्रबंधन में नाकाम प्रशासन

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हमारे धार्मिक-आध्यात्मिक आयोजन विराट रुप लेते जा रहे हैं। कुंभ मेलों में तो विशेष पर्वों के अवसर पर एक साथ तीन-तीन करोड़ तक लोग एक निश्चित समय के बीच स्नान करते हैं। लेकिन भीड़ के अनुपात में यातायात और सुरक्षा के इंतजाम देखने में नहीं आते। जबकि शासन-प्रशासन के पास पिछले पर्वों के आंकड़े हाते है। बावजूद लापरवाही बरतना हैरान करने वाली बात है। दरअसल, हमारे यहां धार्मिक आयोजनों में जितनी भीड़ पहुंचती है और उसके प्रबंधन के लिए जिस प्रबंध कौषल की जरुरत होती है, उसकी दूसरे देश कल्पना भी नहीं कर सकते ? इ

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