व्यंग्य   थानेदार मुर्गा

  थानेदार मुर्गा

इस शीर्षक को पढ़कर मुर्गा नाराज होगा या थानेदार, ये कहना कठिन है; पर कुछ घटनाएं पढ़ और सुनकर लग रहा है कि भविष्य में…

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धर्म-अध्यात्म  सृष्टि के वास्तुकार भगवान विश्वकर्मा

 सृष्टि के वास्तुकार भगवान विश्वकर्मा

देवेंद्रराज सुथार शिल्प, वास्तुकला, चित्रकला, काष्ठकला, मूर्तिकला और न जाने कितनी कलाओं के जनक भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का आर्किटेक्ट व देवशिल्पी कहा जाता है।…

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विविधा कब तक हमारे देश के सैनिक शहीद होते रहेंगे ?

कब तक हमारे देश के सैनिक शहीद होते रहेंगे ?

देवेंद्रराज सुथार कवि कुमार मनोज की कुछ पंक्तियाँ :- सुख भरपूर गया, मांग का सिंदूर गया, नंगे नौनिहालों की लंगोटियां चली गयी। बाप की दवाई…

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विविधा क्या प्रदूषित भारत कभी बन पाएगा स्वच्छ?

क्या प्रदूषित भारत कभी बन पाएगा स्वच्छ?

राजू पाण्डेय 2018 के द्विवार्षिक एनवायरनमेंटल परफॉर्मेन्स इंडेक्स में भारत 180 देशों में 177 वें स्थान पर रहा। दो वर्ष पहले हम 141 वें स्थान…

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कविता तुम याद आये

तुम याद आये

जब हवाओं का रुख मेरी तरफ हुआ उड़ते गुलाल ने आसमान  को छुआ तब तुम याद आये , हल्की तपती दोपहरी में कोयल ने कोई…

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व्यंग्य वाकई ! कुछ सवालों के जवाब नहीं होते … !!

वाकई ! कुछ सवालों के जवाब नहीं होते … !!

तारकेश कुमार ओझा वाकई इस दुनिया में पग – पग पर कंफ्यूजन है।  कुछ सवाल ऐसे होते हैं जिनके जवाब तो मिलते नहीं अलबत्ता वे…

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समाज  आज के स्वेच्छाचारी वक्ता

 आज के स्वेच्छाचारी वक्ता

पण्डित परन्तप प्रेमशंकर आजकल के आध्यात्म वक्ता वडे स्वच्छन्दी एवं पाखंडी हो गए हैं । इस परिपेक्ष्य मे इनको सत्य दर्शन कराना संतो एवं विद्वानों…

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आर्थिकी विदेशी निवेश से किसे होगा लाभ

विदेशी निवेश से किसे होगा लाभ

पुनः एफडीआई चर्चा में है। यदि सन 2000 से 2017 की अवधि को देखें तो एफडीआई के समर्थन में उठाए गए कदमों में एक निरंतरता दिखती…

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राजनीति मतदान के आगे भी है दायित्व

मतदान के आगे भी है दायित्व

25 जनवरी : भारतीय राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर विशेष एक वोट ने फ्रांस में लोकतांत्रिक सरकार का रास्ता प्रशस्त किया; एक वोट के कारण ही जर्मनी.. नाजी हिटलर…

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व्यंग्य अभी थोड़ा बिजी हूँ!

अभी थोड़ा बिजी हूँ!

अमित शर्मा (CA) मैं अक्सर व्यस्त रहता हूँ। यह मेरी आसाधारण प्रतिभा ही है कि व्यस्त रहते हुए भी मैं फेसबुक, वाट्सएप और कई लोगो…

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विविधा भारत की संस्कृति में रची-बसी हैं गणतंत्र की उच्च भावनाएं

भारत की संस्कृति में रची-बसी हैं गणतंत्र की उच्च भावनाएं

राकेश कुमार आर्य भारत के 68वें गणतंत्र दिवस की पावन बेला है। मैंने सोचा कि अपने सुबुद्घ पाठकों के लिए कोई ऐसी भेंट इस अवसर…

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समाज क्यों नहीं रुक रही भ्रूण हत्या और लिंगभेद ?

क्यों नहीं रुक रही भ्रूण हत्या और लिंगभेद ?

24 जनवरी – भारतीय राष्ट्रीय बालिका सशक्तिकरण दिवस पर विशेष लिंगानुपात में बराबरी का स्वप्न और सत्य लेखक : अरुण तिवारी क़ानूनी तौर पर अभी लिंग परीक्षण,…

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