समाज संवेदनहीन होता समाज 

संवेदनहीन होता समाज 

अक्सर बच्चे गलती करते हैं और बच्चों की गलती सुधारने के लिए इस दुनिया में माता-पिता होते हैं, बच्चे की पहली पाठशाला भी माता-पिता ही…

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लेख गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-48

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-48

राकेश कुमार आर्य   गीता का सातवां अध्याय और विश्व समाज ज्ञान-विज्ञान और ईश्वर का ध्यान आत्र्त-जिज्ञासु भजें अर्थार्थी दिन रात। युक्तात्मा ज्ञानी भजै…

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लेख गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-47

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-47

राकेश कुमार आर्य   गीता का सातवां अध्याय और विश्व समाज आज के संसार में प्रकृतिवादी लोग ऐसी ही मानसिकता और सोच रखते हैं।…

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विविधा अस्पताल में भ्रष्टाचार एक बदनुमा दाग 

अस्पताल में भ्रष्टाचार एक बदनुमा दाग 

– ललित गर्ग – आजकल देश में भ्रष्टाचार सर्वत्र व्याप्त है। एक तरह से भ्रष्टाचार शिष्टाचार हो गया है। ऐसे-ऐसे घोटाले, काण्ड एवं भ्रष्टाचार के…

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राजनीति भारत में अभी भी पकौड़े और चाय में बहुत स्कोप है साहब 

भारत में अभी भी पकौड़े और चाय में बहुत स्कोप है साहब 

“साधु ऐसा चाहिए जैसा सूप सुभाय। सार सार को गहि रहै थोथा दे उड़ाय।। ” कबीर दास जी भले ही यह कह गए हों, लेकिन…

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धर्म-अध्यात्म आस्तिक व नास्तिक कौन?

आस्तिक व नास्तिक कौन?

मनमोहन कुमार आर्य, दो शब्द आस्तिक व नास्तिक का बहुधा प्रयोग होता है। मोटे रूप से आस्तिक ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास रखने वालों को…

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आर्थिकी बजट की छांव में उम्मीदों का सच 

बजट की छांव में उम्मीदों का सच 

– ललित गर्ग- भारत भविष्य की आर्थिक महाशक्ति बनने का सपना देख रहा है और उस दिशा में आगे बढ़ भी रहा है। लोकसभा में…

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व्यंग्य  चंद्र धरा दिनकर का लुकाछिपी महोत्सव 

 चंद्र धरा दिनकर का लुकाछिपी महोत्सव 

एल आर गाँधी आज विश्व के अर्वाचीन अलौकिक प्रेमियों का क्षितिज में लुकाछिपी महोत्सव है   …….. अनंतकाल से धरा  अपने प्रेमी दिनकर की परिक्रमा में नृत्य…

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शख्सियत संत रैदास: धर्मांतरण के आदि विरोधी – घर वापसी के सूत्रधार   

संत रैदास: धर्मांतरण के आदि विरोधी – घर वापसी के सूत्रधार   

प्रवीण गुगनानी लगभग सवा छः सौ वर्ष पूर्व 1398 की माघ पूर्णिमा को काशी में जन्में संत रविदास यानि संत रैदास को निस्संदेह हम भारत में धर्मांतरण…

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राजनीति राष्ट्रीय हित लिए महत्वपूर्ण हैं एक साथ चुनाव

राष्ट्रीय हित लिए महत्वपूर्ण हैं एक साथ चुनाव

सुरेश हिन्दुस्थानी वर्तमान में भारत में जिस प्रकार से राष्ट्रीय भाव को प्रधानता देने का क्रम प्रारंभ हुआ है, उससे केन्द्र सरकार द्वारा विकास की…

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विविधा आजादी की अभिव्यक्ति या अभिव्यक्ति की आजादी?

आजादी की अभिव्यक्ति या अभिव्यक्ति की आजादी?

अखिलेश आर्येन्दु आए दिन जिस भाषा का इस्तेमाल नेताओं, मज़हब और जाति के ठेकेदारों और मीडिया के जरिए होता है वह वाकई में लोकतंत्र के…

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आर्थिकी बजट में समावेशी विकास पर जोर देने की जरूरत

बजट में समावेशी विकास पर जोर देने की जरूरत

प्रमोद भार्गव विश्व आर्थिक मंच की सालाना बैठक के दौरान भारत के लिए जो बुरी खबर आई थी, वह 69वें गणतंत्र दिवस और आसियान देशों…

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