धर्म-अध्यात्म मत-मतान्तरों द्वारा ईश्वर को न मानना व अन्यथा मानने का कारण अविद्या है

मत-मतान्तरों द्वारा ईश्वर को न मानना व अन्यथा मानने का कारण अविद्या है

मनमोहन कुमार आर्य देश व संसार में दो प्रकार के मत हैं। कुछ व अधिकांश मत संसार में ईश्वर का होना मानते हैं। यह बात…

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शख्सियत क्रांति के साथ शांति के प्रवर्तक: अरविन्द

क्रांति के साथ शांति के प्रवर्तक: अरविन्द

महर्षि श्री अरविन्द की पुण्यतिथि, 5 दिसम्बर 2017 ललित गर्ग एक सार्थक प्रश्न कि क्या इंसान सामथ्र्यवान ही जन्म लेता है या उसे समाज और…

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राजनीति इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन सुरक्षित और सही

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन सुरक्षित और सही

डा. राधेश्याम द्विवेदी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यूं तो कभी विवादों से मुक्त नहीं रही लेकिन भारत के चुनाव आयोग ने हमेशा इसे सुरक्षित और सही…

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राजनीति राजनीति : उत्तरप्रदेश से एक और बड़ा संदेश

राजनीति : उत्तरप्रदेश से एक और बड़ा संदेश

सुरेश हिन्दुस्थानी देश में जबसे नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बने हैं, तबसे राजनीति में एक परिवर्तन सा दिखाई दे रहा है। वह परिवर्तन किस प्रकार का…

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व्यंग्य साहित्य के प्रधान सेवक

साहित्य के प्रधान सेवक

अमित शर्मा (CA) मिश्रा जी साहित्य के प्रधान सेवक है। साहित्य सेवा का यह बीड़ा उन्होंने 55 किलो ग्राम श्रेणी में ही उठा लिया था…

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समाज इंसानियत अभी ज़िंदा है

इंसानियत अभी ज़िंदा है

अरुण तिवारी   सच है कि अधिक से अधिक धन, अधिक से अधिक भौतिक सुविधा, अधिक से अधिक यश व प्रचार हासिल करना आज अधिकांश…

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समाज हदिया जैसी लडकियां लव नहीं जिहाद का शिकार होती हैं 

हदिया जैसी लडकियां लव नहीं जिहाद का शिकार होती हैं 

परिवर्तन तो संसार का नियम है। व्यक्ति और समाज के विचारों में परिवर्तन समय और काल के साथ होता रहता है लेकिन जब व्यक्ति से…

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लेख गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-12

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-12

राकेश कुमार आर्य   गीता के दूसरे अध्याय का सार और संसार गीता और शहादत अपनी मजहबी मान्यताओं को संसार पर बलात् थोपने वाले…

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लेख गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-11

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-11

राकेश कुमार आर्य  गीता के दूसरे अध्याय का सार और संसार आजकल पैसा कैसे कमाया जाए और कैसे बचाया जाए?-सारा ध्यान इसी पर केन्द्रित…

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विविधा लोककल्याण का मार्ग है गीता

लोककल्याण का मार्ग है गीता

अरविंद जयतिलक पाश्चात्य जगत में विश्व साहित्य का कोई भी ग्रंथ इतना अधिक उद्धरित नहीं हुआ है जितना भगवद्गीता। भगवद्गीता ज्ञान का अथाह सागर है।…

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धर्म-अध्यात्म मत-मतान्तरों द्वारा ईश्वर को न मानना व  अन्यथा मानने का कारण अविद्या है

मत-मतान्तरों द्वारा ईश्वर को न मानना व अन्यथा मानने का कारण अविद्या है

मनमोहन कुमार आर्य देश व संसार में दो प्रकार के मत हैं। कुछ व अधिकांश मत संसार में ईश्वर का होना मानते हैं। यह बात…

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व्यंग्य पब्लिक अॉन डय़ूटी … !!

पब्लिक अॉन डय़ूटी … !!

तारकेश कुमार ओझा बैंक में एक कुर्सी के सामने लंबी कतार लगी है। हालांकि बाबू अपनी सीट पर नहीं है। हर कोई घबराया नजर आ…

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