कसमें वादे प्यार वफ़ा सब, बातें हैं बातों का क्या…
Updated: April 6, 2025
श्रद्धांजलि– मनोज कुमार सुशील कुमार ‘नवीन’ सही अर्थों में वो भारतवासी थे। जीवनपर्यंत भारत और भारतीय संस्कृति की ही बातें उन्होंने प्रत्येक देशवासी को बताई। मेरे देश की धरती सोना उगले से राष्ट्र की दूर तलक तक पहचान बनवाने में उनका स्वर्णिम योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा। ये दुनिया एक नंबरी तो मैं दस नंबरी से मैदान ए जंग में अपना अलग ही रुतबा उन्होंने बरकरार रखा। यहां तक अबके बरस तुझे धरती की रानी कर देंगे का वादा पूरी निष्ठा से निभाकर भारत मां के उपकार को चुकाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। जीवन चलने का नाम कहकर क्रांति की अलख जगाना कोई इनसे ही सीखे। मेरा रंग दे बसंती चोला कहकर शहीद होने वाले इस भारत कुमार को आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी। भले ही दीवानों से ये मत पूछो, दीवानों पे क्या गुजरी है कहकर अपने हुए पराये का दर्द देकर चले गए, फिर भी पत्थर के सनम तुम्हें हमने खुदा माना। माना बस यही अपराध है बार करता हूं, आदमी हूं आदमी से प्यार करता हूं। पर तुम्हें हरियाली और रास्ता इतना भाएगा कि इस बात का जरा भी अहसास नहीं होने दिया। हमें यह बोलकर कि घर बसाकर देखो, कभी अपना बनाकर देखो खुद का सन्यासी बन क्या हिमालय की गोद में जाना उचित है। रोटी कपड़ा और मकान की जीवन में सार्थकता का अहसास जिस तरह से तुमने कराया, वैसा और कोई आदमी चाहे हाथ में रेशमी रूमाल लेकर घूमता फिरे। पूनम की रात में कलयुग की रामायण दिखाकर वो कौन थी का यादगार सस्पेंस उत्तर दक्षिण, पूरब और पश्चिम में सदा बना रहेगा। आप भी सोच रहे होंगे कि मास्टरजी का दिमाग आज बन्ना गया है कि बेसिरपैर की बातें करे जा रहे हैं। आपका सोचना बिल्कुल वाजिब भी है कि व्यंग्य के साथ गांभीर्य का सदा तड़का लगाने वाले मास्टरजी आज अलग ही मूड में है। विषय से न भटकते हुए सीधे मुद्दे पर आ जाते हैं। हिंदी फिल्म इंडस्ट्रीज में अपना अलग मुकाम रखने वाले एकमात्र भारत कुमार की उपाधि को सही अर्थों में शिरोधार्य करने वाले अभिनेता, निर्देशक मनोज कुमार जी आज नहीं रहे। हिन्दुस्तान ही क्या विदेशों तक उनकी फैन फॉलोइंग अपने आप में रिकॉर्ड है। राष्ट्र सर्वोपरि की भावना को अपनी फिल्मों के माध्यम से उन्होंने सदैव अग्रणी रखा। इस बात का उदाहरण आप इसी बात से लगा सकते हां कि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री जी के एक कथन से उन्होंने किसान और जवान को केंद्र में रखकर उपकार फिल्म बनाई। क्रांति के माध्यम से अंग्रेजी गुलामी की दासता को चित्रण कर प्रत्येक देशवासी को झकझोर कर रख दिया। संगीत के तो क्या कहने। 15 अगस्त हो या 26 जनवरी, उपकार, क्रांति, शहीद आदि फिल्मों के गीत तन मन में रोमांच भर देते हैं। उनके बारे में जितना लिखा जाए, जितना सुना जाए, उतना ही कम रहेगा। एक बेहतर भारतीय अभिनेता तो थे ही, इसके साथ-साथ उच्च कोटि के फिल्म निर्देशक, पटकथा लेखक, गीतकार और संपादक भी थे। जिस कार्य को शुरू किया उसमें क्या नफा होगा क्या नुकसान, इस बात की परवाह उन्होंने कभी नहीं की। जो एक बार ठान लिया, उसे करने के लिए वो हद से गुजरने से गुरेज नहीं करते थे।कई बार नुकसान भी हुआ पर उन्होंने इसकी परवाह नहीं की। अपनी अलग पहचान बनाई। जब तक काम किया सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। हिंदी सिनेमा में उनके काम को सदा याद किया जायेगा। भारतीय सिनेमा और कला में उनके योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा 1992 में पद्म श्री और 2015 में सिनेमा के क्षेत्र में सर्वोच्च पुरस्कार दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित होने का गौरव उन्हें प्राप्त हुआ। फिल्म इंडस्ट्रीज में कभी न भुलाए जाने वाले मनोज कुमार जी को उन्हीं की एक फिल्म शोर के गीत से नमन। दो पल के जीवन से इक उम्र चुरानी है ज़िंदगी और कुछ भी नहीं, तेरी मेरी कहानी है। लेखक; सुशील कुमार ‘नवीन‘,
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भारतीय जनता पार्टी की स्थापना व उसका इतिहास
Updated: April 7, 2025
पार्टी की स्थापना दिवस 6 अप्रैल पर विशेष भारतीय जनता पार्टी की स्थापना 6 अप्रैल 1980 को हुई, जिसके प्रथम राष्ट्रीय अध्यक्ष अटलबिहारी वाजपेयी सर्वसम्मति …
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अमेरिकी टैरिफ: भारत को नुकसान या फायदा ?
Updated: April 7, 2025
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने टैरिफ की घोषणा की है। गौरतलब है कि ट्रंप के 60 देशों पर पारस्पिरक टैरिफ लगाया है।…
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भारत में शक्ति उपासना की सर्वव्यापकता
Updated: April 7, 2025
आत्माराम यादव पीव सनातन धर्म की अनूठी परंपरा है जिसमे परमात्मा के दो रूप हैं-माता और पिता। सत्य, ज्ञान, प्रभुता, अनन्तता, न्याय, उत्कृष्टता, परात्परता और सर्वशक्तिमानता इत्यादि जैसे गुण…
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गंभीर खतरे की घंटी है प्लास्टिक एवं माइक्रोप्लास्टिक
Updated: April 4, 2025
-ललित गर्ग- प्रकृति को पस्त करने, वायु एवं जल प्रदूषण, कृषि फसलों पर घातक प्रभाव, मानव जीवन एवं जीव-जन्तुओं के लिये जानलेवा साबित होने के…
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जल जीवन मिशन
Updated: April 4, 2025
डॉ. नीरज भारद्वाज जल बचाने का हम सभी को अपने जीवन में मिशन बनाना होगा वरना आने वाली पीढ़ी के लिए बहुत बड़ा संकट हम…
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बढ़ती अर्थव्यवस्था: क्या सबको मिल रहा है फायदा?
Updated: April 4, 2025
प्रो. महेश चंद गुप्ता भारत की अर्थव्यवस्था में आय की असमानता एक गंभीर विषय बन गई है। इससे समाज और राष्ट्र का आर्थिक विकास प्रभावित…
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महाराणा सांगा के मायने
Updated: April 4, 2025
वीरेंद्र सिंह परिहार महाराणा सांगा में दृढ़ निश्चय, सैन्य कुशलता और उच्चकोटि की नेतृत्व क्षमता थी, जो किसी अन्य राजा में नहीं मिलती । राणा ने अज्ञातवास…
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मन की शुद्धता से प्रसन्न होती हैं महागौरी
Updated: April 4, 2025
दुर्गा अष्टमी डॉ घनश्याम बादल व्रत, उपवास और पूजा-पाठ हिंदू धर्म की पहचान हैं । उसकी यह विशेषता उसे अन्य धर्मों से विशिष्ट बनाती है…
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रामनवमी: मर्यादा, न्याय और धर्म की विजय का पर्व
Updated: April 4, 2025
रामनवमी (6 अप्रैल) पर विशेष– योगेश कुमार गोयलभगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में समूचे भारतवर्ष में प्रतिवर्ष चैत्र मास की शुक्ल पक्ष नवमी को…
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चिंताजनक है वनों पर अतिक्रमण
Updated: April 4, 2025
वन क्षेत्र संकट में हैं। इन पर अतिक्रमण हो रहा है, यह केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की रिपोर्ट कहती है। पाठकों को बताता चलूं कि केंद्रीय…
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भारतीय जनता पार्टी : स्थापना दिवस 6 अप्रेल पर विशेष
Updated: April 4, 2025
शून्य से शिखर का सफर मनोज कुमार व्यक्ति या संस्था जब शिखर पर होता है तब उसकी विजयगाथा गायी जाती है और यह स्वाभाविक भी…
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