उत्तराखंड में विरोधी मुहिम: बड़े बड़ों की गर्दन नपी
Updated: June 6, 2025
जयसिंह रावत उत्तराखंड, जिसे देवभूमि के नाम से जाना जाता है, पिछले तीन वर्षों से एक ऐसी सरकार के नेतृत्व में बदलाव की राह पर…
Read more
एक बार फिर से भड़कता दिख रहा रूस-यूक्रेन युद्ध
Updated: June 6, 2025
राजेश जैन फरवरी 2022 में शुरू हुआ रूस-यूक्रेन युद्ध चौथे साल में चल रहा है। लाखों लोगों की जान जा चुकी है, शहर उजड़ चुके…
Read more
प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में बढ़ता वैचारिक पक्षपात
Updated: June 6, 2025
गजेंद्र सिंह हाल ही में विश्व के दो सर्वाधिक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों — मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) और हार्वर्ड विश्वविद्यालय — के दीक्षांत समारोहों में…
Read more
राजनीति को नई दिशा देते विपक्षी दलों के नये चेहरें
Updated: June 6, 2025
– ललित गर्ग – सिंदूर ऑपरेशन के बाद पाकिस्तान दुनिया से सहानुभूति बटोरने के लिये जहां विश्व समुदाय में अनेक भ्रम, भ्रांतिया एवं भारत की…
Read more
असम में सोलर प्रोजेक्ट रुका, हुई आदिवासी संघर्ष की जीत
Updated: June 6, 2025
आख़िरकार ज़मीन की लड़ाई ने रंग दिखाया। कार्बी आंगलोंग की पहाड़ियों में बसे हजारों आदिवासी परिवारों की जंग ने एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) को झुका…
Read more
सबका स्वागत करता है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
Updated: June 6, 2025
– लोकेन्द्र सिंह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सबके लिए खुला संगठन है। इसके दरवाजे किसी के लिए बंद नहीं है। कोई भी संघ में आ सकता है।…
Read more
कुदरत के सबक को कब पढ़ेगा इंसान?
Updated: June 6, 2025
पाँच साल पहले कोविड-19 लॉकडाउन ने जहां दुनिया की अर्थव्यवस्था को झकझोरा, वहीं पर्यावरण को राहत दी। वायु प्रदूषण, ग्रीनहाउस गैसों और औद्योगिक उत्सर्जन में…
Read more
बेंगलुरु में व्यवस्थाओं के अमानवीय चेहरे का बेनकाब होना
Updated: June 6, 2025
– ललित गर्ग – बढ़ते तापमान रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ( आरसीबी ) की शानदार जीत के बाद आयोज्य जश्न के मातम, हाहाकार एवं दर्दनाक मंजर…
Read more
भगदड़ में सतर्कता और समझदारी ही सबसे बड़ी सुरक्षा
Updated: June 6, 2025
हाल ही में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर भगदड़ मचने से 11 लोगों की मौत हो गई और 33 लोग घायल हो गए, यह…
Read more
सर्वोच्च मानव धर्म है पर्यावरण संरक्षण
Updated: June 4, 2025
डॉ घनश्याम बादल जन्म के साथ ही प्रकृति मनुष्य को अपनी संरक्षण भरी अपनी गोद दे देती है. कुदरत ने उसे स्वच्छ जल, हवा,…
Read more
गंगा तेरा पानी अमृत …
Updated: June 4, 2025
गंगा दशहरा विशेष : डॉ० घनश्याम बादल इस बार पर्यावरण दिवस एवं गंगा दशहरा एक साथ पड़ रहे हैं. जहां पर्यावरण दिवस भौतिक शुद्धता का प्रतीक है जिससे…
Read more
गंगा दशहरा : मां गंगा के धरती पर “अवतरण” का पर्व
Updated: June 4, 2025
गंगा दशहरा पर्व पर विशेष… प्रदीप कुमार वर्मा मां गंगा में पवित्र स्नान का पर्व। दशों दिशाओं के शुभ होने से शुभ कार्य का पर्व। हिंदू धर्म में दान और पुण्य का पावन पर्व। और पतित पावनी मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण का पर्व। देश और दुनिया में हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है। ब्रह्म पुराण व वाराह पुराण के अनुसार ज्येष्ठ मास के दशमी तिथि को हस्त नक्षत्र में गर करण, वृष के सूर्य व कन्या के चन्द्रमा में गंगा धरती पर अवतरित हुई थी। सप्तमी को स्वर्ग से आने के बाद तेज वेग को थामने के लिए भगवान शिव ने अपनी जटाओं में मां गंगा को धारण किया। जिसके बाद ज्येष्ठ महीने की दशमी को जटाओं से पृथ्वी पर अवतरित किया था। इस मुहूर्त में स्नान, दान व मंत्र जाप का पूर्ण शुभ फल प्राप्त होता है। इस खास दिन पर मां गंगा और शिवजी की पूजा-उपासना से जाने-अनजाने में हुए कष्टों से छुटकारा मिलता है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक गंगा दशहरा मनाने की परंपरा मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के वंशजों से जुड़ी है। राजा सगर की दो रानियां केशिनी और सुमति की कोई संतान नहीं थी। संतान प्राप्ति के लिए दोनों रानियां हिमालय में भगवान की पूजा अर्चना और तपस्या में लग गईं। तब ब्रह्मा के पुत्र महर्षि भृगु ने उन्हें वरदान दिया कि एक रानी से राजा को 60 हजार अभिमानी पुत्र की प्राप्ति होगी। जबकि, दूसरी रानी से एक पुत्र की प्राप्ति होगी। केशिनी ने एक पुत्र को जन्म दिया, जबकि सुमति के गर्भ से एक पिंड का जन्म हुआ। उसमें से 60 हजार पुत्रों का जन्म हुआ। एक बार राजा सगर ने अपने यहां पर एक अश्वमेघ यज्ञ करवाया। राजा ने अपने 60 हजार पुत्रों को यज्ञ के घोड़े को संभालने की जिम्मेदारी सौंपी। लेकिन देवराज इंद्र ने छलपूर्वक 60 हजार पुत्रों से घोड़ा चुरा लिया और कपिल मुनि के आश्रम में बांध दिया। सुमति के 60 हजार पुत्रों को घोड़े के चुराने की सूचना मिली तो सभी घोड़े को ढूंढने लगे। तभी वह कपिल मुनि के आश्रम पहुंचे। कपिल मुनि के आश्रम में उन्होंने घोड़ा बंधा देखा तो आक्रोश में घोड़ा चुराने की निंदा करते हुए कपिल मुनि का अपमान किया। यह सब देख तपस्या में बैठे कपिल मुनि ने जैसे ही आंख खोली तो आंखों से ज्वाला निकली,जिसने राजा के 60 हजार पुत्रों को भस्म कर दिया। इस तरह राजा सगर के सभी 60 हजार पुत्रों का अंत हो गया और उनकी अस्थियां कपिल मुनि के आश्रम में ही पड़ी रही। राजा सगर जानते थे कि उनके पुत्रों ने जो किया है, उसका परिणाम यही होना था। लिहाजा सभी के मोक्ष के लिए कोई उपाय खोजने बेहद जरूरी था। मोक्षदायिनी गंगा के द्वारा ही सभी पुत्रों की मुक्ति संभव थी। इसलिए राजा सागर सहित उनके वंश के अन्य राजाओं द्वारा पवित्र गंगा मैया को धरती पर लाने के प्रयास शुरू हुए। पौराणिक मान्यता के अनुसार राजा सगर के वंशज भगीरथ ने अपनी तपस्या से मां गंगा को धरती पर अवतरित कराया था। गंगा जब पहली बार मैदानी क्षेत्र में दाखिल हुई, तब जाकर हजारों सालों से रखी राजा सगर के पुत्रों की अस्थियों का विसर्जन हो पाया और राजा सगर के पुत्रों को मुक्ति मिली। यही कारण है कि आज भी देश के कोने-कोने से लोग अस्थि विसर्जन और कर्मकांड करने के लिए हरिद्वार आते हैं। यही नहीं हिंदू धर्म में गंगा दशहरा के दिन दान और गंगा स्नान का बड़ा महत्व है। शास्त्रों के अनुसार गंगा में स्नान करने से सभी प्रकार के पाप, दोष, रोग और विपत्तियों से मुक्ति मिलती है। वहीं, मान्यता यह भी है कि गंगा दशहरा पर अन्न, भोजन और जल समेत आदि चीजों का दान करता है तो उसे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। दशहरा पर्व पर गंगा स्नान के माध्यम से 10 तरह के पापों की मुक्ति का विधान शास्त्रों में है। गंगा दशहरा पर पितरों के लिए दान का विशेष महत्व है। इस दिन पितरों के नाम से दान करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। वहीं इस दिन गरीबों और जरूरतमदों को फल, जूता, चप्पल, छाता, घड़ा और वस्त्र दान करने का भी विधान है। आचार्य पंडित श्याम सुंदर शर्मा बताते हैं कि इस बार सबसे खास बात यह है कि गंगा दशहरा पर चार शुभ संयोग बन रहे हैँ। इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और पूजन करने से दस प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है। प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठकर गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि संभव जल तीर्थ जाना संभव न हो तो घर में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद मां गंगा का ध्यान करते हुए मंत्रों का जाप करें। पतित पावनी गंगा को मोक्ष दायिनी कहा गया है। इसी वजह से मान्यता है कि गंगा में डुबकी लगाने से मनुष्य को मरने के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। वहीं, उसके पूर्वजों को भी शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। गंगा दशहरा के दिन सभी गंगा मंदिरों में भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है। वहीं,इस दिन मोक्षदायिनी गंगा मैया का विधिवत पूजन-अर्चना भी किया जाता है। गंगा दशहरे के दिन श्रद्धालु जन जिस भी वस्तु का दान करें उनकी संख्या दस होनी चाहिए और जिस वस्तु से भी पूजन करें उनकी संख्या भी दस ही होनी चाहिए। ऎसा करने से शुभ फलों में और अधिक वृद्धि होती है। गंगा दशहरे का फल ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन गंगा स्नान करने से व्यक्ति के दस प्रकार के पापों का नाश होता है। इन दस पापों में तीन पाप कायिक, चार पाप वाचिक और तीन पाप मानसिक होते हैं इन सभी से व्यक्ति को मुक्ति मिलती है। प्रदीप कुमार वर्मा
Read more