सृष्टि सम्बत का प्रारम्भिक काल
Updated: December 30, 2015
अशोक “प्रवृद्ध” काल गणना करने के लिए किसी प्रारम्भिक विन्दु का निश्चय करना पड़ता है, जहाँ से कि गणना आरम्भ की जा सके। उदाहरणतः यूरोपीय…
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सरदार पटेल, सोनिया और रामदेव
Updated: December 30, 2015
डा. वेद प्रताप वैदिक असहिष्णुता के दो कुरुप चेहरे कल देश के सामने आए। एक मुंबई में और दूसरा दिल्ली में! एक ‘कांग्रेस दर्शन’ नामक…
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गोमाता व गोदुग्ध का महत्व
Updated: December 30, 2015
मनमोहन कुमार आर्य ज्ञान व विज्ञान की चरम उन्नति होने पर भी मनुष्य आज भी आधा व अधूरा है। आज भी उसे बहुत सी…
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जरूरत है सक्षम एवं सफल राजनीतिक नेतृत्व की
Updated: December 30, 2015
ललित गर्ग- नये वर्ष की शुरूआत के साथ ही राजनीति के लिये शुभ और मंगलकारी होने की ज्यादा जरूरत है। इसके लिये एक ऐसे राजनीतिक…
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२१वीं सदी का भारत…. जहां शहर बसे गाँवों की गोद में !
Updated: December 30, 2015
तुलसी टावरी प्रगति का अर्थ कमजोर को रौंद कर स्वयं आगे बढ़ना कदापि नहीं l समाज में हर एक व्यक्ति को हक़ है, समुचित अवसर…
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गोदान इसलिये कि खुशियां साथ जायें और नवजीवन मिले: संजय जोशी
Updated: December 30, 2015
गायों के यशस्वी स्थान पर कुछ लोगों की नजर लग गयी है और उनके पेट में यह बात पच नही रही है कि उसे कैसे…
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अखंड भारत या वृहत भारत?
Updated: December 29, 2015
भाजपा के महासचिव राम माधव ने अखंड भारत की बात क्या कह दी, कबूतरों के दड़बे में बिल्ली छोड़ दी। राम माधव ने साफ़ शब्दों…
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वक्त का तकाज़ा है
Updated: December 29, 2015
प्रदूषण को सब , अपनी अपनी तरह निपटायेगे, लालू पुत्र अब, धोड़ों पर ही आयें जायेंगे, बड़ी सी कार मे बैठ कर, वो धोड़ों के…
Read moreनीतीश जी! बिहार में ये कौन से स्वर्णिम दिन हैं?
Updated: December 29, 2015
डॉ. मयंक चतुर्वेदी पिछले दिनों दो इंजीनियरों की हत्या का मामला अभी सुलझा भी नहीं था कि रंगदारी के लिए बिहार से एक ओर इंजीनियर…
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हिन्दी साहित्याकाश का सूर्य दुष्यन्त कुमार
Updated: December 29, 2015
हिन्दी साहित्याकाश में दुष्यन्त सूर्य की तरह देदीप्यमान हैं द्यसमकालीन हिन्दी कविता विशेषकर हिन्दी गजल के क्षेत्र में जो लोकप्रियता दुष्यन्त कुमार को मिली वो…
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उपासना क्या, क्यों व किसकी करें तथा इसकी विधि?
Updated: December 29, 2015
मनमोहन कुमार आर्य उपासना का उल्लेख आने पर पहले उपासना को जानना आवश्यक है। उपासना का शब्दार्थ है समीप बैठना। हिन्दी में हम अपने परिवार,…
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सुख और दुःख जीवन में साथ चलते हैं
Updated: December 29, 2015
दुनिया का हर इंसान सुख चाहता है। दुःख कोई नहीं चाहता। वह दुःख से डरता हैं इसलिए दुःख से छुटकारा पाने के लिए तरह-तरह के…
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