धर्म-अध्यात्म मनुष्य व उसके कुछ प्रमुख कर्तव्य

मनुष्य व उसके कुछ प्रमुख कर्तव्य

मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य किसे कहते हैं? इसका उत्तर है कि मननशील व्यक्ति को मनुष्य कहते हैं। मननशाल क्यों होना है, इसलिये कि हम सत्य…

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प्रवक्ता न्यूज़ शिक्षा संस्‍कृति उत्थान न्‍यास ने सौंपा सुझाव-पत्र

शिक्षा संस्‍कृति उत्थान न्‍यास ने सौंपा सुझाव-पत्र

प्रेस विज्ञप्ति दिनांक : 27 फरवरी 2016 शिक्षा संस्‍कृति उत्‍थान न्‍यास के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को नई दिल्‍ली में नई शिक्षा नीति का मसौदा…

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व्यंग्य अगड़ों मे अगड़े, पिछड़ों मे पिछड़े

अगड़ों मे अगड़े, पिछड़ों मे पिछड़े

आजकल जाति के आधार पर पिछड़ापन तय हो रहा है तो मैने सोचा अपनी जाति के अगड़े पिछड़े परकुछ रिसर्च करूँरिसर्च तो वैसे घर बैठे  करने के लिये विकीडिया ही काफ़ी  है पर किसी यूनिवर्सिटी से रि सर्च हो तो नाम के आगे डाक्टर  का ठप्पा लगाना बड़ा अच्छा लगे…

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कहानी  मजबूरी

 मजबूरी

चंदन मेरा बचपन का दोस्त है। हम दोनों हमउम्र हैं। घर भी एक ही गली में है। वह मुझसे दो महीने बड़ा है; पर पढ़ना…

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स्‍वास्‍थ्‍य-योग स्वस्थता के लिये जरूरी है हंसना

स्वस्थता के लिये जरूरी है हंसना

ललित गर्ग आज का जीवन मशीन की तरह हो गया है। अधिक से अधिक पाने की होड़ में मनुष्य न तो स्वास्थ्य पर ध्यान दे…

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धर्म-अध्यात्म सृष्टि विज्ञान, वैदिक साहित्य और स्वामी दयानन्द

सृष्टि विज्ञान, वैदिक साहित्य और स्वामी दयानन्द

  मनमोहन कुमार आर्य सृष्टि की उत्पत्ति से जुड़े अनेक रहस्य हैं जिन्हें विज्ञान आज भी खोज नहीं पाया अथवा जिसका विज्ञान जगत व हमारे…

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विविधा जमुना जी को दरद न जाने कोय

जमुना जी को दरद न जाने कोय

आइये, यमुना से रिश्ता बनायें ताज्जुब है कि प्रेम और शांति उत्सव के नाम पर श्री श्री रविशंकर और उनके अनुयायी उस धारा की आजादी…

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कविता ताज महोत्सव

ताज महोत्सव

भावांजलि डा. राधेश्याम द्विवेदी’’ नवीन’’ दस दिन का संगीत रहा । मीत यहां पर झूम रहा । ताज महल की साया है। ताज महोत्सव आया…

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समाज मोहन भागवत की तो सुनो!

मोहन भागवत की तो सुनो!

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संचालक मोहन भागवत की दाद देनी पड़ेगी। लगता है कि देश के सार्वजनिक जीवन में वे ही मर्द हैं, जो…

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विविधा देश कैसे आगे बढ़ेगा?

देश कैसे आगे बढ़ेगा?

देश में आरक्षण वादी व्यवस्था के मूल में कुछ जातियों का देश के आर्थिक संसाधनों पर बना रहा सामंती एकाधिकार था। जिसे तोडऩे के लिए…

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राजनीति …लेकिन बाजी पलट गई!

…लेकिन बाजी पलट गई!

रोहित वेमुला और कन्हैया के मामले को देश के विपक्षी नेताओं ने जमकर भुनाया था। टीवी चैनलों और अखबारों को देखकर ऐसा लगता था कि…

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राजनीति राहुल! मित्र क्षणम् श्रूयताम्

राहुल! मित्र क्षणम् श्रूयताम्

इसे आज की राजनीति की विडंबना कहें या राहुल का सौभाग्य कहें कि कांग्रेस के सामने आज नेतृत्व का संकट है। जिस कारण कांग्रेस की…

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