हिंसक होते आरक्षण आंदोलन- राजनैतिक साज़िशों के कारण ?
Updated: February 25, 2016
मृत्युंजय दीक्षित हरियाणा में आश्चर्यजनक ढंग से जाट आरक्षण आंदोलन हिंसक हो गया। 30 हजार करोड़ से अधिक की संपत्ति का नुकसान , कम से…
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विश्वनाथ
Updated: February 25, 2016
‘विश्वनाथ! अरे ओ हमार लाल, कहाँ चला गवा रे तू! तोरे बिना हमार मन नाहीं लागत है रे! हे भगवान! हमार बिटवा के हमरे पास…
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क्या अठाइस मौतें दिला पाएँगी जाटों को आरक्षण ?
Updated: February 25, 2016
हरियाणा से लौटकर जग मोहन ठाकन पैंतीस हज़ार करोड़ की संपत्ति स्वाहा , अठाइस जिंदगियाँ खाक ,200 से अधिक जखमी और सदा के लिए जातिगत…
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पाखण्ड खण्डिनी पताका, सद्धर्म प्रचार और महर्षि दयानन्द
Updated: February 25, 2016
मनमोहन कुमार आर्य किसी भी विषय में सत्य का निर्धारण करने पर सत्य वह होता है जो तर्क व युक्ति के आधार पर सिद्ध हो।…
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वह गोद मेरी लेट कर !
Updated: February 25, 2016
वह गोद मेरी लेट कर, ताके सकल सृष्टि गया; मेरी कला-कृति तक गया, झाँके प्रकृति की कृति गया ! देखा कभी मुझको किया, लख दूसरों…
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वह समझता मुझको रहा !
Updated: February 25, 2016
वह समझता मुझको रहा, मैं झाँकता उसको रहा; वह नहीं कुछ है कह रहा, मैं बोलता उससे रहा ! अद्भुत छवि आलोक रवि, अन्दर समेटे…
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उनकी आजादी व हमारी असहिष्णुता
Updated: February 25, 2016
डॉ० व्योमेश चित्रवंश मैं शांति से बैठा अख़बार पढ़ रहा था, तभी कुछ मच्छरों ने आकर मेरा खून चूसना शुरू कर दिया। स्वाभाविक प्रतिक्रिया में…
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भारत माँ की औलाद हूँ
Updated: February 25, 2016
हे भारत माँ, मैं शर्मिंदा हूँ की मैंने अबतक की जिन्दगी में आपकी सुरक्षा, आत्मसम्मान की रक्षा के लिए कुछ नहीं किया| पढाई-लिखाई से फुर्सत…
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नई चुनौतियों के अनुरूप ढले रेल ?
Updated: February 24, 2016
प्रमोद भार्गव भारतीय रेल विश्व का सबसे बड़ा व्यावसायिक प्रतिष्ठान है,लेकिन इस ढांचे को किसी भी स्तर पर विश्वस्तरीय नहीं माना जाता। गोया इसकी सरंचना…
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सृष्टिकर्त्ता ईश्वर प्रदत्त वैदिक धर्म सभी मनुष्यों का परमधर्म
Updated: February 24, 2016
मनमोहन कुमार आर्य अग्नि आदि किसी पदार्थ के जलना, प्रकाश व गर्मी देना आदि गुणों को उसका धर्म कहा जाता है। मनुष्यों में जिन श्रेष्ठ…
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राष्ट्रभक्ति, राष्ट्र, साहित्य वसमाज सेवा के पर्याय विनायक दामोदर सावरकर
Updated: February 24, 2016
अशोक “प्रवृद्ध” अनुपम त्याग, अदम्य साहस, महान वीरता एवं उत्कट देशभक्ति के पर्यायवाची बन चुके असाधारण व्यक्तित्व के स्वामी प्रथम प्रात: स्मरणीय वीर सावरकर आधुनिक…
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अगले जन्म मोहे “सामान्य” ना कीजो
Updated: February 29, 2016
अपने देश में सामान्य वर्ग का होना उतनी ही सामान्य बात हैं जितनी की कांग्रेस सरकारों में भ्रष्टाचार का होना। लेकिन अगर सामान्यता में…
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