भजन: बरसाने की लट्ठा होली
Updated: May 19, 2025
तर्ज: ब्रज लोक गीत मु: होली खेलन आयौ श्याम,आज बरसाने की गलियन में।।होली खेलन आयो श्याम -२ अंत १:ग्वाल बालों के टोला संग आयौ।पोटली भर…
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देश की पीठ में खंजर
Updated: May 22, 2025
गद्दारों की बिसात बिछी, देश की मिट्टी रोती है,सीमा के प्रहरी चीख उठे, जब अंदर से चोट होती है।ननकाना की राहों में छुपा, विश्वास का…
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गद्दारी का जाल: देश की सुरक्षा पर मंडराता खतरा
Updated: May 22, 2025
भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर के बाद NIA ने देशभर में 25 ISI एजेंटों को गिरफ्तार किया है, जो देश की सुरक्षा पर मंडराते…
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सिन्दूर: अब श्रृंगार ही नहीं, शौर्य का प्रतीक
Updated: May 22, 2025
सिन्दूर, जो कभी सिर्फ वैवाहिक प्रेम का प्रतीक था, आज ऑपरेशन सिंदूर की नायिकाओं वियोमिका और सोफिया की साहसिक कहानियों का प्रतीक बन गया है।…
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बलूचिस्तान की आजादी की जंग
Updated: May 17, 2025
संजय सिन्हा बलूचिस्तान में पाकिस्तान से आजादी के लिए जंग ने जोर पकड़ ली है। बलूच नेताओं ने जगह जगह विरोध प्रदर्शनों को काफी तेज…
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क्या कद्दावर कांग्रेसी नेता पी. चिदंबरम और शशि थरूर की परिवर्तित सियासी निष्ठा से भाजपा बनेगी अजेय?
Updated: May 17, 2025
कमलेश पांडेय दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भाजपा भले ही अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनने में असमंजस के दौर से गुजर रही हो लेकिन भारत…
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सेना की गरिमा को ठेस पहुंचाता डिप्टी सीएम का बयान
Updated: May 17, 2025
संदीप सृजन भारतीय राजनीति में नेताओं के विवादित बयान कोई नई बात नहीं हैं। समय-समय पर विभिन्न दलों के नेता अपनी टिप्पणियों के कारण सुर्खियों…
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गोविंदा के बेटे यशवर्धन आहुजा को मिली डेब्यू फिल्म
Updated: May 17, 2025
गोविंदा ने पिछले 35 बरसों में ‘आंखें’, ‘साजन चले ससुराल’, ‘कुली नं1’, ‘एक और एक ग्यारह’, ‘भागमभाग’ और ‘पार्टनर’ जैसी कॉमिक फिल्मों के जरिए फैंस के दिलों में जबर्दस्त गुदगुदी पैदा की है। गोविंदा के…
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नेताओं के बिगड़े बोल से आहत होती राष्ट्रीयता
Updated: May 17, 2025
– ललित गर्ग सेना के शौर्य पर सम्मान की बजाय अपमान के बिगड़े बोल को लेकर राजनीतिक घमासान छिड़ जाना स्वाभाविक है। कर्नल सोफिया और…
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सपनों के पर
Updated: May 17, 2025
चिड़िया सी उड़े, सपनों की डोर,आसमान छूने का हो हर ओर शोर।नन्हे पंखों में हो इतनी ताक़त,हर मुश्किल से लड़ने का हो हिम्मत। तारों की…
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दूरसंचार क्रांति : कबूतर से की-बोर्ड तक का “सफर”
Updated: May 17, 2025
विश्व दूरसंचार दिवस 17 मई पर विशेष… प्रदीप कुमार वर्मा प्राचीन काल में कोई संदेश या कोई चिट्ठी भेजने के लिए कबूतरों या फिर दूत और संदेशवाहक की परंपरा देखने को मिलती है। डाक सेवा के शुरू होने के बाद में पोस्टमैन से यह काम करते थे लेकिन समय के साथ बदलते दौर में अब सूचना और संदेश के भेजने की प्रकृति तथा जरिया भी बदल चुका है। आज इंटरनेट की वजह से संदेश पहुंचाना आसान हो गया है। आज का युग सूचना का युग है। इसी वजह है कि बदले जमाने में “दूरसंचार” ने पृथ्वी और आकाश की सम्पूर्ण दूरी को मिटा दिया है। दूरसंचार क्रांति के माध्यम से ना केवल देश,अपितु विश्व के कोने-कोने में सूचनाओं का आदान-प्रदान तीव्र गति से हो रहा है। यही वजह है कि आज फोन, मोबाइल और इंटरनेट लोगों की प्रथम आवश्यकता बन गये हैं। दूरसंचार क्रांति का ही असर है कि अब सूचना का सफर कबूतर से लेकर कीबोर्ड तक आ चुका है। दूरसंचार का उदेश्य था कि देश दुनिया के हर आदमी तक सूचना पंहुचे ओर संचार सुलभ हो। इसलिए विश्व दूरसंचार दिवस के दिन सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के फायदों के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा की जाती है। यह दिन अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ की स्थापना और साल 1865 में पहले अंतर्राष्ट्रीय टेलीग्राफ समझौते पर हस्ताक्षर होने की याद में मनाया जाता है। मार्च 2006 में एक प्रस्ताव को अपनाया गया था, जिसमें कहा गया है कि हर साल 17 मई को विश्व सूचना समाज दिवस मनाया जाएगा। विश्व दूरसंचार दिवस मनाने की परंपरा 17 मई 1865 में शुरू हुई थी लेकिन आधुनिक समय में इसकी शुरुआत वर्ष 1969 में हुई। तभी से पूरे विश्व में इसे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। भारत में दूरसंचार क्रांति के अतीत के बारे में पता चलता है कि वर्ष 1880 में दो टेलीफोन कंपनियों ‘द ओरिएंटल टेलीफोन कंपनी लिमिटेड’ और ‘एंग्लो इंडियन टेलीफोन कंपनी लिमिटेड’ ने भारत में टेलीफोन एक्सचेंज की स्थापना करने के लिए भारत सरकार से संपर्क किया। इस अनुमति को इस आधार पर अस्वीकृत कर दिया गया कि टेलीफोन की स्थापना करना सरकार का एकाधिकार था और सरकार खुद यह काम शुरू करेगी। इसके बाद वर्ष 1881 में सरकार ने अपने पहले के फैसले के ख़िलाफ़ जाकर इंग्लैंड की ‘ओरिएंटल टेलीफोन कंपनी लिमिटेड’ को कोलकाता, मुंबई, मद्रास (चेन्नई) और अहमदाबाद में टेलीफोन एक्सचेंज खोलने के लिए लाइसेंस दिया। इससे 1881 में देश में पहली औपचारिक टेलीफोन सेवा की स्थापना हुई। इसी क्रम में 28 जनवरी, 1882 भारत के टेलीफोन इतिहास में ‘रेड लेटर डे’ है। इस दिन भारत के तत्कालीन गवर्नर-जनरल काउंसिल के सदस्य मेजर ई. बैरिंग ने कोलकाता, चेन्नई और मुंबई में टेलीफोन एक्सचेंज खोलने की घोषणा की। कोलकाता के एक्सचेंज का नाम ‘केंद्रीय एक्सचेंज’ था। केंद्रीय टेलीफोन एक्सचेंज के 93 ग्राहक थे। मुंबई में भी 1882 में ऐसे ही टेलीफोन एक्सचेंज का उद्घाटन किया गया था। इसके बाद में संचार क्रांति में बदलाव आया और 2जी के बाद 3जी, 4जी तथा 5 जी स्पेक्ट्रम के जरिए मोबाइल सेवा अस्तित्व में आई। दूरसंचार के क्षेत्र में इंटरनेट के जरिये हमें घर में मोबाइल , कंप्यूटर, लैपटॉप,या टीवी में देखने में मिलता है। वर्तमान समय में दूरसंचार का एक बहुत बड़ा हिस्सा इंटरनेट है। इसमें कोई शक नहीं है कि जिन लोगों की पहुंच इंटरनेट तक है, उनके जीवन में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। दूरसंचार की सहायता से हम ऑनलाइन मोबाइल के द्वारा बिजली एवं नल का बिल, डिस्क रिचार्ज, बैंकिंग, बीमा तथा अन्य काम अपने घर में बैठे-बैठे ही पूरा कर सकते हैं। इसका सबसे ज्यादा फायदा महिला, बच्चे तथा बुजुर्गों को मिलता है। जिनके लिए यह सभी काम बहुत आसान और आरामदायक बन जाते है। इंटरनेट के जरिए हम असंख्य सूचनाओं को पलक झपकते ही मात्र कुछ चंद सेकेंड में प्राप्त कर लेते हैं। इंटरनेट सिर्फ सूचनाओं के लिहाज से ही नहीं, बल्कि सोशल नेटवर्किग के लिए अब अहम बन चुका है। गूगल के ई-मेल, अन्य सोशल मीडिया के माध्यम जैसे फेसबुक, स्नैपचैट, इंस्टाग्राम, थ्रेड तथा अन्य सोशल प्लेटफॉर्म के जरिए से हजारों किलोमीटर की दूरियां सिमट कर अब चंद सेकेंड के फासले में बदल गयी हैं। …
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अंतर समीक्षा में चूक करती भारतीय राजनीति
Updated: May 21, 2025
पहलगाम आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जिस प्रकार देश का नेतृत्व किया है, उससे उनके व्यक्तित्व में और चार चांद लग गए…
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