विविधा ओ मौला रे ……

ओ मौला रे ……

  ओ मौला रे तेरे दर का रास्ता किधर है मैं तो ढूंढ  लिया हर गाँव और हर  गली पर तेरे बांहों का आसरा कहीं…

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राजनीति क्या सचमुच आतंकवाद का कोई मज़हब नहीं होता?

क्या सचमुच आतंकवाद का कोई मज़हब नहीं होता?

  मुंबई धमाकों का गुनहगार फांसी पर चढ़ा दिया गया। भारतीय न्यायव्यवस्था और लोकतंत्र की सुंदरता भी दुनिया के सामने आई। इतने बड़े गुनाह के…

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धर्म-अध्यात्म वैदिक धर्म व संस्कृति का उद्धारक, रक्षक व प्रचारक सत्यार्थ प्रकाश

वैदिक धर्म व संस्कृति का उद्धारक, रक्षक व प्रचारक सत्यार्थ प्रकाश

  संसार में समस्त धार्मिक ग्रन्थों में वेद के बाद सत्यार्थप्रकाश का प्रमुख स्थान है। इसका कारण इन दोनों ग्रन्थों का मनुष्य जीवन के लिए…

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राजनीति स्वार्थी राजनीति का नमूना है संसदीय गतिरोध

स्वार्थी राजनीति का नमूना है संसदीय गतिरोध

मृत्युंजय दीक्षित जैसी की संभावना व आशंका व्यक्त की जा रही थी कि संसद का मानसून सत्र हंगामें की भेंट चढ़ जायेगा ठीक वैसा ही…

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राजनीति भारत-बांग्लादेश भूमि समझौते पर अमल

भारत-बांग्लादेश भूमि समझौते पर अमल

नागरिकता को मिली नई पहचान प्रमोद भार्गव इसी साल जून माह में भारत और बांग्लादेश के बीच हुए भूमि समझौते पर शांतिपूर्ण अमल हो गया।…

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विविधा प्रो. कलाम: तुम सा नहीं देखा…

प्रो. कलाम: तुम सा नहीं देखा…

तनवीर जाफ़री भारतवासियों के हृदय में एक आदर्श महापुरुष के रूप में अपनी जगह बनाने वाले भारत रत्न व पूर्व राष्ट्रपति डा० एपीजे अब्दुल कलाम…

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राजनीति कलाम से प्रेम याकूब से घृणा – भारत के दो रूप

कलाम से प्रेम याकूब से घृणा – भारत के दो रूप

गत सप्ताह की दो घटनाओं से भारत के दो सशक्त रूप देखनें को मिले. एक घटना घृणा, विद्रूपता के रूप में आई तो दूसरी में…

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कविता ||| एक नज़्म : सूफी फकीरों  के नाम ||

||| एक नज़्म : सूफी फकीरों के नाम ||

कोई पूछे की मैं हूँ कौन लोग कहते है की बावरा हूँ तेरी मोहब्बत में लोग कहते है की आवारा फिरता हूँ तेरी मोहब्बत में…

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गजल अपनों से भरी दुनियाँ

अपनों से भरी दुनियाँ

(मधुगीति १५०८०१) अपनों से भरी दुनियाँ, मगर अपना यहाँ कोंन; सपनों में सभी फिरते, समझ हर किसी को गौण ! कितने रहे हैं कोंण, हरेक…

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राजनीति …. लिपटे रहत भुजंग!

…. लिपटे रहत भुजंग!

  शोध-प्रबंध : देवेश शास्त्री ‘‘जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग। चन्दन विष व्यापत नहीं, लिपटे रहत भुजंग।’’ रहीमदास के इस सूक्ति-परक दोहे…

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कविता ||| आहट ईश्वर की ……!!!  |||

||| आहट ईश्वर की ……!!! |||

ये कैसी अजनबी आहट है .. कौन है  यहाँ , किसकी आहट है ये … जो मन में नए भाव जगा रही  है . ये…

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धर्म-अध्यात्म सर्वव्यापक व सदा अवतरित होने से ईश्वर का अवतार नहीं होता

सर्वव्यापक व सदा अवतरित होने से ईश्वर का अवतार नहीं होता

मनमोहन कुमार आर्य भारत में मूर्तिपूजा का प्रचलन बौद्ध व जैन मत से आरम्भ हुआ है। बौद्ध मत के बढ़ते प्रभाव व वैदिक धर्म में…

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