धर्म-अध्यात्म अहिंसक धर्म के उद्घोषक भगवान महावीर

अहिंसक धर्म के उद्घोषक भगवान महावीर

भगवान महावीर का प्रादुर्भाव छठी शताब्दी ईसा पूर्व में हुआ था । जैन धर्मग्रन्थों के अनुसार भगवान महावीर 24 वें तीर्थंकर हैं, किन्तु जैन धर्म…

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धर्म-अध्यात्म भगवान महावीर जैन धर्म के संस्थापक नहीं

भगवान महावीर जैन धर्म के संस्थापक नहीं

  बहुत से इतिहासकारों एवं विद्वानों ने भगवान महावीर को जैन धर्म का संस्थापक माना है। भगवान महावीर जैन धर्म के प्रवर्तक नहीं हैं। वे…

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जरूर पढ़ें भाजपा के सदस्यों की संख्या 9 करोड़ के पार पहुँच चुकी है- डॉ. दिनेश शर्मा

भाजपा के सदस्यों की संख्या 9 करोड़ के पार पहुँच चुकी है- डॉ. दिनेश शर्मा

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का सपना है कि भाजपा को विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनाया जाय. अपने अध्यक्ष के इसी सपने…

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चिंतन क्या वेद अपौरूषेय हो सकते हैं

क्या वेद अपौरूषेय हो सकते हैं

 क्या वेद अपौरूषेय है? यदि हैं तो वेदों में ईश्वर ने स्वयं ही दिये ज्ञान में आदि ऋषियों व भावी मानव पीढि़यों से अपनी प्रशंसा…

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आर्थिकी गैस सब्सिडी: सोच बदलने की ज़रूरत

गैस सब्सिडी: सोच बदलने की ज़रूरत

हमारे देश में तमाम राजनीतिक दल ऐसे हैं जो सत्ता हासिल करने के लिए जनता को तमाम चीजें मुफ्त में देने की घोषणा करते रहते…

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महिला-जगत पवित्रता और अपवित्रता का फलसफा

पवित्रता और अपवित्रता का फलसफा

सोनाली मिश्रा होली अभी बीती है. होली के आते ही मेरे ज़ेहन में कई बरस पहले की एक घटना एकदम से जैसे सामने से आ…

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व्यंग्य खास की तो बात क्या, आम ही बौरा गये!

खास की तो बात क्या, आम ही बौरा गये!

संवत 71 के पूर्वार्द्ध के माधव मास में देश के ‘आम’ ने बौरेपन से उबर कर परिपक्वता का परिचय देते हुए खास को घूल चटाकर…

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कविता आख़िर खुदकुशी करते हैं क्यों ?

आख़िर खुदकुशी करते हैं क्यों ?

आख़िर खुदकुशी करते हैं क्यों ? जिंदगी जीने से डरते हैं क्यों ? फंदे पर लटककर झूले जीवन है अनमोल ये भूले। अपनों को देकर…

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कविता मृगनयनी

मृगनयनी

“मृगनयनी तू किधर से आई, काली मावस रातों में, क्यों उलझाती मेरे मन को, प्यार की झूठी बातों में।।“ रंग-रूप आंदोलित करता हलचल होती कुछ…

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कविता पीड़ा

पीड़ा

कभी किट बन, कभी बीज बन आती हैं पीड़ा कभी बरसात बन के सीने पर करती हैं क्रीड़ा है प्रकृति तुमने ये कैसा तांडव मचा…

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जन-जागरण वेदों का ज्ञान अपौरूषेय अर्थात् ईश्वर प्रदत्त हैः आचार्य धनंजय

वेदों का ज्ञान अपौरूषेय अर्थात् ईश्वर प्रदत्त हैः आचार्य धनंजय

आर्यसमाज सुभाषनगर के वार्षिकोत्सव का आज सोत्साह समापन हुआ। आयोजन में पं. धर्मसिंह ने अपनी भजन मण्डली सहित प्रभावशाली भजन प्रस्तुत किये जिससे वातावरण भक्तिमय…

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जन-जागरण एक कुआं, एक मंदिर, एक श्मसान के मायने

एक कुआं, एक मंदिर, एक श्मसान के मायने

सच्चाई यह है कि संघ आरंभ से हिन्दू समाज की आत्महीनता को दूर करने तथा हिन्दुओं में व्याप्त भेदभाव एवं छुआछूत की भावना को दूर…

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