राजनीति खोती हुई नई राजनीतिक दिशायें

खोती हुई नई राजनीतिक दिशायें

भारत में जब प्रतिदिन नये नये घोटालों और भ्रष्टाचार का पर्दफाश हो रहा था तब अन्ना आंदोलन के रूप में लोगों का गुस्सा फूटा|इसी आंदोलन…

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जन-जागरण काली चमड़ी गोरी चमड़ी

काली चमड़ी गोरी चमड़ी

काली चमड़ी बनाम गोरी चमड़ी का विवाद कोई नया नहीं है. न ही ये सिर्फ भारत की बिमारी है. इसे विश्वव्यापी महामारी कहें तो कोई…

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व्यंग्य राजनीति का इंजन

राजनीति का इंजन

कुछ लोग देश की अर्थव्यवस्था के संचालन में खेती का प्रमुख योगदान मानते हैं, तो कुछ उद्योगों का। कुछ व्यापार को सर्वाधिक महत्व देते हैं,…

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टॉप स्टोरी आप में मचे घमासान से बिखरती उम्मीदें

आप में मचे घमासान से बिखरती उम्मीदें

आप में मचे घमासान से दिल्ली के उन लोगों की उम्मीदें बिखर सी गयी हैं, जिन्होंने केजरीवाल को मौजूदा राजनीती का विकल्प मानकर उन्हें अपना…

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आर्थिकी वचन मोदी: अब गैस सब्सिडी छोड़ दो

वचन मोदी: अब गैस सब्सिडी छोड़ दो

 दो-तीन दशक पूर्व तक हमारे देश की अधिकांश आबादी अपनी रसोई के ईंधन के रूप में लकड़ी,लकड़ी के बुरादे,कोयला,मिटटी का तेल,स्टोव आदि का इस्तेमाल किया…

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कविता तुम्हारी आँखें

तुम्हारी आँखें

—-अनुप्रिया अंशुमान मोहब्बत की दुनिया है तुम्हारी आँखें, चमकता हुआ सितारा है तुम्हारी आँखें । तुम्हारे ही दम से है मेरा ये नसीब, मेरी पहचान…

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राजनीति घमासान के बाद

घमासान के बाद

आम आदमी पार्टी (आपा) में पिछले दिनों हुए घमासान से शर्मा जी बहुत दुखी थे। उन्होंने सब नेताओं से कहा कि वे मिलकर काम करें;…

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व्यंग्य बुढ़ौती  में तीरथ

बुढ़ौती में तीरथ

कहते हैं कि अंग्रेजों ने जब रेलवे लाइनें बिछा कर उस पर ट्रेनें चलाई तो देश के लोग उसमें चढ़ने से यह सोच कर डरते…

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साहित्‍य संस्कृत व इतर भाषाओं का अध्ययन और महर्षि दयानन्द

संस्कृत व इतर भाषाओं का अध्ययन और महर्षि दयानन्द

महर्षि दयानन्द ने अपने जीवन काल (1825-1883) वा मुख्यतः 10 अप्रैल, 1875 को आर्यसमाज की स्थापना के बाद देश के अनेक लोगों से पत्रव्यवहार किया…

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राजनीति प्रदेश में अब कोई भी परीक्षा सुरक्षित नहीं

प्रदेश में अब कोई भी परीक्षा सुरक्षित नहीं

उत्तर प्रदेश में परीक्षा प्रणाली अब पूरी  तरह से भ्रष्टाचार के दलदल में डूब चुकी है। कोई भी परीक्षा ऐसी नहीं बची है जोकि पूरी…

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व्यंग्य कबीरा आप ठगाइये, और न ठगिए कोय !

कबीरा आप ठगाइये, और न ठगिए कोय !

आज तथाकथित ‘मूर्ख दिवस’ है ! इस अंतर्राष्ट्रीय [अ]पावन [?] पर्व पर कुछ लोग एक दूसरे मंदमति  जड़मति[मूर्ख] बनाकर आल्हादित होंगे !जिस तरह पूँजीवादी -लोकतंत्रात्मक राष्ट्रों में आर्थिक सामाजिक ,…

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कविता विवशता

विवशता

माफ कर देना मुझे  गर हो सके तो क्योंकि मेरी लाडो ये दुनिया नहीं है  तेरे लिए यहां पग-पग  तेरी राहों पर  बिछे होंगे कांटे…

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