” बीबी ” वाले भी “वैलेंटाइन ” ढूँढ रहे हैं
Updated: February 14, 2015
आज सभ्यता,संस्कृति की दुहाई देनेवाले हमारे देश में संस्कृति मखौल का विषय बन गई है , सभ्यता धुंधली पड़ रही है और संस्कारों का “अंतिम-संस्कार” किया जा…
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दिल्ली कांग्रेस में बगावती स्वर
Updated: February 14, 2015
सुरेश हिन्दुस्थानी दिल्ली में जमीन झाड़ पराजय के बाद भी कांग्रेस पार्टी सबक लेने को तैयार दिखाई नहीं दे रही है। इस अप्रत्याशित पराजय को…
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पाश्चात्य सभ्यता का प्रतीक वैलेण्टाइन डे
Updated: February 14, 2015
मृत्युंजय दीक्षित हर वर्ष 14 फरवरी का दिन वैलेण्टाइन डे यानी प्रणय दिवस को पूरे धूमधाम व उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस तिथि…
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यशोदानंदन-४
Updated: February 13, 2015
गर्गाचार्य के पास कोई विकल्प शेष नहीं रहा। उन्होंने समस्त उपस्थित जन समुदाय को अपना-अपना स्थान ग्रहण करने का निर्देश दिया और स्वयं अपना…
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नीतीश कुमार : “चलनी दूसे सूप को”
Updated: February 13, 2015
माँझी-नीतीश की कुर्सी की ‘हाई-वोल्टेज’ लड़ाई में नीतीश जी लगातार ये कहते दिख रहे हैं “बिहार में संवैधानिक संस्थाओं व परम्पराएँ मज़ाक बन कर रह गई हैं ” उनका इशारा किस…
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भाजपा की हार या आप की जीत !
Updated: February 13, 2015
-संजय द्विवेदी दिल्ली विधानसभा चुनाव के परिणाम में भाजपा की पराजय की चर्चा हर जुबान पर है। जाहिर तौर पर इस हार ने भाजपा के…
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बदनसीब पुत्र की डायरी
Updated: February 13, 2015
पिता की तुला पर बदनसीब खरा नहीं उत्तर पाया विफलता कहे या सफलता पुत्र नहीं समझ पाया। पिता की चाह थी श्रवण बनकर जमाने को…
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क्यों रुकता नहीं नारी पर वार
Updated: February 12, 2015
निर्मल रानी पिछले दिनों देश को एक बार फिर हरियाणा के रोहतक में दोहराए गए निर्भया कांड से शर्मसार होना पड़ा। राक्षसी प्रवृति के बलात्कारियों…
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व्यंग्य बाण : चमत्कारी अंगूठी
Updated: February 12, 2015
दिल्ली के चुनाव परिणाम आने के बाद परसों मैं शर्मा जी के घर गया, तो एक बाल पत्रिका उनके हाथ में थी। वे एक कहानी…
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यशोदानंदन-३
Updated: February 12, 2015
महर्षि की बातें यशोदा जी बड़े ध्यान से सुन रही थीं। जैसे ही ऋषिवर ने अपना कथन समाप्त किया उनके मुखमंडल पर एक विशेष…
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राष्ट्रीय विकल्प तो भाजपा ही है
Updated: February 12, 2015
सुरेश हिन्दुस्थानी दिल्ली में जिस प्रकार के चुनाव परिणाम आए, उससे धर्मनिरपेक्षता का आवरण ओढ़े उन ताकतों को चिल्लाने अवसर मिल गया है जो राजनीतिक…
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बोधत्व राष्ट्र के लिए
Updated: February 12, 2015
शिवदेव आर्य संसार में जितने भी पर्व तथा उत्सव आते हैं, उन सबका एक ही माध्यम (उद्देश्य) होता है – हम कैसे एक नए…
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