बोल भाई बोल…
Updated: October 19, 2014
बोलना एक कला है, यह तो सभी जानते हैं, लेकिन इसके साथ कई विशेषताएं , विडंबनाएं और विरोधाभास भी जुड़े हैं। जिसकी ओर लोगों का…
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भाजपा की लहर में कांगे्रस भूमिगत
Updated: October 19, 2014
क्षेत्रीय दलों के अस्तित्व पर उठे सवाल महाराष्ट्र और हरियाणा के राजनीतिक चुनाव परिणामों ने जहां भाजपा को आशातीत सफलता प्रदान की है, वहीं क्षेत्रीय…
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माँ भारती का जलगान
Updated: October 19, 2014
जयति जय जय, जल की जय हो जल ही जीवन प्राण है। यह देश भारत…. सागर से उठा तो मेघ घना हिमनद से चला तो…
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महाभारत-५
Updated: October 19, 2014
श्रीकृष्ण और युधिष्ठिर का उत्तर सुनने के बाद संजय के पास कहने को कुछ भी शेष नहीं रहा। वह जाने के लिए प्रस्तुत होता…
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सीमा पर तनाव के मध्य भारत-पाक को ‘नोबल’
Updated: October 19, 2014
शांति का नोबल एक बार फिर भारत के खाते में आ गया है। पिछले दिनों विश्व के सबसे प्रतिष्ठित व सर्वोच्च समझे जाने…
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महाभारत-४
Updated: October 19, 2014
श्रीकृष्ण आरंभ में युद्ध ही एकमात्र समाधान है, ऐसा नहीं मानते। सर्वशक्तिमान होने के बावजूद वे कभी अनायास शक्ति-प्रयोग की बात भी नहीं करते परन्तु…
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पिता प्रेम
Updated: October 19, 2014
“पिता की महिमा” का कैसे करूँ बखान ….. असमर्थ हो गई “शब्दो की व्याकरण” न कर पाए वो भी जिसका गुणगान ……. वो “शक्तिरूपी” पिता-सबसे-महान…
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बंगाल को ‘पोरिवर्तन’ की आस
Updated: October 19, 2014
बंगाल की जिस धरा ने देश को क्रांतिकारियों से रूबरू करवाया, आज वही धरा आतंकियों के नापाक मंसूबे से लाल होई जा रही है| ३४…
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पशु बलि ,संस्कृति और न्यायालय – डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री
Updated: November 15, 2014
संस्कृति दरअसल मानव प्रगति की यात्रा का ही दूसरा नाम है । जीव जीव का भोजन है , यह आदिम प्रवृति की सब से बड़ी…
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बुद्धु नहीं है गुज्जु
Updated: October 19, 2014
डॉ. मधुसूदन (दो गुज्जु चुटकुले ) जो आज कल सुनाए जा रहे हैं। अंत तक पढें। चुटकुला एक गुज्जु बाप: बेटा देख, तेरे लिए, लडकी…
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मंदिर को धुलाने का प्रसंग और आम्बेडकर की राह
Updated: October 19, 2014
डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री नीतिश कुमार को हटा कर जीतन राम माँझी बिहार के मुख्यमंत्री बने थे । वैसे वे लम्बे अरसे से राजनीति में…
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दुर्गा-महिषासुर प्रसंग, फॉरवर्ड प्रेस में गिरफ्तारियाँ और बौद्धिक लफ्फाजियाँ
Updated: October 23, 2014
राजीव रंजन प्रसाद अभिव्यक्ति की नियति जहर की तरह है, यह संयम और सोचपूर्णता से प्रयुक्त हो तो ओषधि है और यूं ही गटकनी पडे…
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