विविधा चैंपियन के एक युग का अंत ?

चैंपियन के एक युग का अंत ?

-रवि कुमार छवि- ब्राजील में चल रहे फीफा विश्व कप में गत चैंपियन स्पेन के बाहर होते ही अटकले शुरू हो गई कि क्या स्पेन…

Read more
विविधा मौसम की सटीक भविष्यवाणी की मुश्किलें

मौसम की सटीक भविष्यवाणी की मुश्किलें

-प्रमोद भार्गव- बरसात शुरू होने से पहले मौसम विभाग द्वारा मानसून की, की गई भविष्यवाणियों में फेरबदल चिंता का सबब बन रहा है। मई की…

Read more
कविता युग देखा है

युग देखा है

-बीनू भटनागर- एक ही जीवन में हमने, एक युग पूरा देखा है। बड़े बड़े आंगन चौबारों को, फ्लैटों मे सिमटते देखा है। घर के बग़ीचे…

Read more
विविधा महंगाई पर नियंत्रण करके दिखाना होगा

महंगाई पर नियंत्रण करके दिखाना होगा

-रमेश पाण्डेय- महंगाई बढ़ने का सिलसिला जारी है। इस आलम में महंगाई कम कैसे होगी या फिर इस पर प्रभावी नियंत्रण कैसे लग सकेगा, इसे…

Read more
राजनीति सबका हाथ, सबका साथ और सबका विकास

सबका हाथ, सबका साथ और सबका विकास

-राकेश कुमार आर्या- भारत के संविधान की मूल भावना के साथ हमारे राजनीतिज्ञों ने निहित स्वार्थों में निर्लज्जता की सीमा तक छेड़छाड़ की है। संविधान…

Read more
हिंद स्‍वराज हिंदी शासकीय संज्ञाएं

हिंदी शासकीय संज्ञाएं

-डॉ, मधुसूदन- (एक) आज का, उद्देश्य। आज का, उद्देश्य है, यह दिखाना कि, हिंदी में संस्कृत द्वारा कितनी सारी संज्ञाएँ रची जा सकती है। यह…

Read more
राजनीति आपातकाल और लोकतंत्र

आपातकाल और लोकतंत्र

-विजय कुमार- -आपातकाल (26 जून) की 39वीं वर्षगांठ पर- जून महीना आते ही आपातकाल की यादें जोर मारने लगती हैं। 39 साल पहले का घटनाक्रम…

Read more
विविधा शून्य है अखिलेश सरकार का इकबाल

शून्य है अखिलेश सरकार का इकबाल

-रमेश पाण्डेय- पिछले दिनों दिल्ली में आयोजित निवेश सम्मेलन से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को प्रदेश में तकरीबन 60 हजार करोड़ रुपए के…

Read more
विविधा इराक, इंडिया ओर इंडियन्स

इराक, इंडिया ओर इंडियन्स

-अंकुर विजयवर्गीय- बुरे सपने सच होते लग रहे हैं। सुन्नी समुदाय के बागियों द्वारा पहले इराक के मोसूल पर और अब टिकरित पर कब्जे ने…

Read more
राजनीति प्रजातंत्र से प्रशस्त होता विकास का मार्ग

प्रजातंत्र से प्रशस्त होता विकास का मार्ग

-कन्हैया झा- हमारी बातचीत का विषय प्रजातंत्र है. प्रजातंत्र आज की डेमोक्रेसी नहीं है; यह उससे अलग है. पांच वर्ष में एक बार वोट देकर…

Read more
कविता दीप

दीप

-बीनू भटनागर- वायु बिन वो जल न पाये, वायु से ही बुझ जाये है। दीप तेरी ये कहानी तो, कुछ भी समझ न आये है।…

Read more
विविधा राजभाषा हिन्दी: दशा एवं दिशा

राजभाषा हिन्दी: दशा एवं दिशा

-प्रोफेसर महावीर सरन जैन- राजकाज के प्रशासनिक कार्यों में हिन्दी का प्रयोग होता रहा है। राम बाबू शर्मा के अनुसार यह प्रयोग बारहवीं सदी से…

Read more