विविधा राष्ट्राभिमान का जागरण

राष्ट्राभिमान का जागरण

-प्रवीण दुबे- अपनी संस्कृति, परम्परा और राष्ट्र पर अभिमान करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। जो लोग या राष्ट्र ऐसा नहीं करते वे नष्ट हो…

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कविता ग्यारह हाइकू

ग्यारह हाइकू

-बीनू भटनागर- 1. पंछी अकेला प्रतीक्षा करे साथी आई न पाती। 2. आकाश सूना बादल आये जाये धरा न भीगे। 3 मन उदास तन की…

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विविधा विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो

विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो

-राजीव गुप्ता- विश्व प्रतिष्ठित दिल्ली विश्वविद्यालय में इन दिनों कोहराम मचा हुआ है. कहीं पर शिक्षक हड़ताल कर रहे हैं तो कही पर विद्यार्थी विजय…

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विविधा मानवता को शर्मसार करते यह धनलोभी

मानवता को शर्मसार करते यह धनलोभी

-निर्मल रानी- वैसे तो हमारे देश में प्रचलित प्राचीन कहावत के अनुसार झगड़े और विवाद के जो तीन प्रमुख कारण चिन्हित किए गए हैं- वे…

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महत्वपूर्ण लेख उच्च शिक्षा व्यवस्था में पनप रही दिशाहीनता

उच्च शिक्षा व्यवस्था में पनप रही दिशाहीनता

-गुंजेश गौतम झा- दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति के स्नातक की डिग्री कोर्स को तीन वर्ष की जगह चार वर्ष करने के फैसले ने उच्च शिक्षा…

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गजल जब उनसे मोहब्बत थी

जब उनसे मोहब्बत थी

-रंजीत रंजन सिंह- चिट्ठियों का जमाना था जब उनसे मोहब्बद थी, मेरा दिल भी आशिकाना था जब उनसे मोहब्बद थी। रातें गुजर जाती थीं, उनकी…

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विविधा तेल संकट का खतरा

तेल संकट का खतरा

-अंकुर विजयवर्गीय- इराक में ढाई दशक से जारी अशांति और उथल पुथल के बावजूद भारत ने कच्चे तेल की अपनी मांग को पूरा करने के…

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राजनीति आप की अग्नि परीक्षा

आप की अग्नि परीक्षा

-रवि श्रीवास्तव- एक साल पहले बनी आम आदमी पार्टी ने राजनीति में उथल-पुथल कर दिल्ली में अपनी सरकार बना तो ली थी, पर पहले ही…

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राजनीति नमो सरकार पर भरोसा कायम रखने की जरूरत

नमो सरकार पर भरोसा कायम रखने की जरूरत

-रंजीत रंजन सिंह- नरेन्द्र मोदी सरकार को सत्ता में आए एक महीना हो गया। अमुमन इस अवधि को राजनीतिक हनीमुन कहा जाता है। यूं तो…

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कविता इंसान हूं नादान हूं…

इंसान हूं नादान हूं…

-नेहा राजोरा- इंसान हूं नादान हूं… बेसब्र हूं क्योंकि फिक्रमंद हूं… अपनी दुआओं पर है मुझको ऐतबार, तेरे रहमों करम पर भी है मुझको इख्तियार,…

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राजनीति अपने निर्णय का सम्मान कीजिये

अपने निर्णय का सम्मान कीजिये

-ऋतु के. चटर्जी- कैसे सोच लिया जनता ने कि जाने वाली सरकार उनके लिए अपने कार्यालयों में मिठाई के डब्बे छोड़ जाएगी. जब नयी सरकार,…

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कविता दंगा बना देश का नासूर

दंगा बना देश का नासूर

-रवि श्रीवास्तव- क्यों होता है दंगा फसाद, कौन है इसका ज़िम्मेदार ? छोटी-छोटी हर बातों पर, निकल आते हैं क्यों हथियार। आक्रोश की आंधी में,…

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