विविधा सृष्टि की रचना का पहला दिन

सृष्टि की रचना का पहला दिन

नवसंवत्सर, गुड़ी पड़वा 31 मार्च के अवसर पर -प्रमोद भार्गव-  विक्रम संवत का पहला महीना है चैत्र। इसका पहला दिन गुड़ी पड़वा कहलाता है। ब्रह्म…

Read more
विविधा मनोरञ्जक संस्कृत रचनाएं

मनोरञ्जक संस्कृत रचनाएं

-डॉ. मधुसूदन –  ***ऐसा कवि जिसने, “ठठं ठठं ठं, ठठठं ठठं ठ” पर कविता रचकर दिखाई; ***ऐसा बलवान, जिसे शीत की बाधा नहीं होती; ***एक…

Read more
चुनाव क्या चुनाव में इनकी भी होगी बात?

क्या चुनाव में इनकी भी होगी बात?

-रमेश पाण्डेय-  देश में दो ऐसे क्षेत्र हैं जिनका नाम विशेष कारणों से बदला गया। एक है मगध जो बौद्ध बिहारों की अधिकता के कारण…

Read more
धर्म-अध्यात्म ‘आर्य समाज और वैदिक धर्म’

‘आर्य समाज और वैदिक धर्म’

वैदिक धर्म की प्रचारक संस्था आर्य समाज की स्थापना दिवस पर -मनमोहन कुमार आर्य-  किसी के पूछने पर जब हम स्वयं को आर्य समाजी कहते…

Read more
चुनाव राजनीति के भारतीय मानक और चाणक्य की दृष्टि

राजनीति के भारतीय मानक और चाणक्य की दृष्टि

-कन्हैया झा-  अगले माह देश में आम चुनाव होने वाले हैं. देश की दो मुख्य पार्टियों के अलावा अनेक राज्य स्तरीय पार्टियां मैदान में हैं.…

Read more
चुनाव कांग्रेस के घोषणा पत्र में चालबाजी

कांग्रेस के घोषणा पत्र में चालबाजी

-रमेश पाण्डेय-  दो शब्द हैं, चालाकी और चालबाजी। इन दोनों शब्द के निहितार्थ तो एक जैसे हैं पर मायने अलहदा है। चालाकी वह है जो…

Read more
चुनाव मोदी बनाम अन्य!

मोदी बनाम अन्य!

-फखरे आलम-  चुनाव के क्रम में, और मतदान से पूर्व जहां महात्वाकांक्षी और देशभक्त, समाज सेवी और कर्मठ नेताओं, राजनेताओं का अन्य पार्टी से भाजपा…

Read more
विविधा बिहार में स्वास्थ्य कुव्यवस्था लाइव

बिहार में स्वास्थ्य कुव्यवस्था लाइव

-आलोक कुमार-  हमारे बिहार में एक कहावत बहुत ही प्रचलित है – ऊपर से फिट-फाट, नीचे से मोकामा घाट। इसका भावार्थ ये है कि बाहर…

Read more
कविता मिक्सिंग और फिक्सिंग

मिक्सिंग और फिक्सिंग

-मिलन सिन्हा-  उसने पहले ढंग से जाना गेम का सब ट्रिक्स फिर मैच को अच्छे से किया फिक्स जब शोर हुआ  तब राजनीति से किया…

Read more
कविता अहंकार बलिदान बड़ा है, देह के बलिदान से

अहंकार बलिदान बड़ा है, देह के बलिदान से

-मधुसूदन-  मिट्टी में जब, गड़ता दाना, पौधा ऊपर, तब उठता है। पत्थर से पत्थर, जुड़ता जब, नदिया का पानी, मुड़ता है। अहंकार दाना, गाड़ो तो,…

Read more
चुनाव राजनीति और नैतिकता

राजनीति और नैतिकता

-अमरेन्द्र किशोर-  भारतीय राजनीति और समाज का यह परिवर्तन का दौर है। बदलाव के बयार में कुछ भ्रम है, पशोपेश है और कुछ अंतर्विरोध है।…

Read more
जन-जागरण काजल की कोठरी है, जरा बचके

काजल की कोठरी है, जरा बचके

-मनोहर पुरी-  हमारे पर्वूजों ने बहुत सोच-समझकर यह कहावत बनाई होगी कि काजल की कोठरी में कितना ही सयाना व्यक्ति जाये उसके ऊपर एक लकीर…

Read more