सृष्टि की रचना का पहला दिन
Updated: March 28, 2014
नवसंवत्सर, गुड़ी पड़वा 31 मार्च के अवसर पर -प्रमोद भार्गव- विक्रम संवत का पहला महीना है चैत्र। इसका पहला दिन गुड़ी पड़वा कहलाता है। ब्रह्म…
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मनोरञ्जक संस्कृत रचनाएं
Updated: March 28, 2014
-डॉ. मधुसूदन – ***ऐसा कवि जिसने, “ठठं ठठं ठं, ठठठं ठठं ठ” पर कविता रचकर दिखाई; ***ऐसा बलवान, जिसे शीत की बाधा नहीं होती; ***एक…
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क्या चुनाव में इनकी भी होगी बात?
Updated: March 28, 2014
-रमेश पाण्डेय- देश में दो ऐसे क्षेत्र हैं जिनका नाम विशेष कारणों से बदला गया। एक है मगध जो बौद्ध बिहारों की अधिकता के कारण…
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‘आर्य समाज और वैदिक धर्म’
Updated: March 27, 2014
वैदिक धर्म की प्रचारक संस्था आर्य समाज की स्थापना दिवस पर -मनमोहन कुमार आर्य- किसी के पूछने पर जब हम स्वयं को आर्य समाजी कहते…
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राजनीति के भारतीय मानक और चाणक्य की दृष्टि
Updated: March 27, 2014
-कन्हैया झा- अगले माह देश में आम चुनाव होने वाले हैं. देश की दो मुख्य पार्टियों के अलावा अनेक राज्य स्तरीय पार्टियां मैदान में हैं.…
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कांग्रेस के घोषणा पत्र में चालबाजी
Updated: March 27, 2014
-रमेश पाण्डेय- दो शब्द हैं, चालाकी और चालबाजी। इन दोनों शब्द के निहितार्थ तो एक जैसे हैं पर मायने अलहदा है। चालाकी वह है जो…
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मोदी बनाम अन्य!
Updated: March 27, 2014
-फखरे आलम- चुनाव के क्रम में, और मतदान से पूर्व जहां महात्वाकांक्षी और देशभक्त, समाज सेवी और कर्मठ नेताओं, राजनेताओं का अन्य पार्टी से भाजपा…
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बिहार में स्वास्थ्य कुव्यवस्था लाइव
Updated: March 27, 2014
-आलोक कुमार- हमारे बिहार में एक कहावत बहुत ही प्रचलित है – ऊपर से फिट-फाट, नीचे से मोकामा घाट। इसका भावार्थ ये है कि बाहर…
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मिक्सिंग और फिक्सिंग
Updated: March 27, 2014
-मिलन सिन्हा- उसने पहले ढंग से जाना गेम का सब ट्रिक्स फिर मैच को अच्छे से किया फिक्स जब शोर हुआ तब राजनीति से किया…
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अहंकार बलिदान बड़ा है, देह के बलिदान से
Updated: March 27, 2014
-मधुसूदन- मिट्टी में जब, गड़ता दाना, पौधा ऊपर, तब उठता है। पत्थर से पत्थर, जुड़ता जब, नदिया का पानी, मुड़ता है। अहंकार दाना, गाड़ो तो,…
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राजनीति और नैतिकता
Updated: March 30, 2014
-अमरेन्द्र किशोर- भारतीय राजनीति और समाज का यह परिवर्तन का दौर है। बदलाव के बयार में कुछ भ्रम है, पशोपेश है और कुछ अंतर्विरोध है।…
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काजल की कोठरी है, जरा बचके
Updated: March 27, 2014
-मनोहर पुरी- हमारे पर्वूजों ने बहुत सोच-समझकर यह कहावत बनाई होगी कि काजल की कोठरी में कितना ही सयाना व्यक्ति जाये उसके ऊपर एक लकीर…
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