विविधा वोटर कार्ड हाथ में, सूची में नाम नदारद

वोटर कार्ड हाथ में, सूची में नाम नदारद

-जग मोहन ठाकन-    हाल में संपन्न विधान सभा चुनावों में काफी लोग वोटर कार्ड होते हुए भी मतदाता सूची में नाम कटा होने की…

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राजनीति बिहार में प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा की हकीकत

बिहार में प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा की हकीकत

-आलोक कुमार-    बिहार में सुशासन का प्रचार तो खूब किया जाता है पर बिहार की जमीनी हकीकत ठीक इस प्रचार के विपरीत है। आईए बात…

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‘सन्त गुरू रविदास और आर्य समाज’

-मनमोहन कुमार आर्य-    भारत के प्रसिद्ध सन्तों में ’ शामिल गुरू रविदासजी ने अपनी अन्त: प्रेरणा पर सांसारिक भोगों में रूचि नहीं ली। बचपन…

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कब तक

कल भी मरी थी कल भी मरेगी आखिर वो कितनी बार जलेगी । पहले तो तन को भेड़िया बन नोच डाला शरीर से आत्मा तक…

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गजल जीवन मर्म

जीवन मर्म

पाषाण हृदय बनकर कुछ भी नहीं पाओगे । वक्त के पीछे तुम बस रोओगे पछताओगे ।। ये आस तभी तक है जब तक सांसें हैं।…

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राजनीति सांप्रदायिक हिंसा कानून ठंडे बस्ते में

सांप्रदायिक हिंसा कानून ठंडे बस्ते में

संदर्भ- सांप्रदायिक और लक्षित हिंसा रोकथाम (न्याय एवं क्षतिपूर्ति) विधेयक 2011 -प्रमोद भार्गव-     विपक्ष ने एक सुर में सुर मिलाकर सांप्रदायिक और लक्षित…

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विविधा खतरे में हैं अरावली पर्वत श्रृंखलाएं

खतरे में हैं अरावली पर्वत श्रृंखलाएं

-संदर्भः राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र बोर्ड का फैसला- -प्रमोद भार्गव-    राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र बोर्ड ने पर्यटन को बढ़ावा देने के बहाने अरावली पहाड़ियों में निर्माण…

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विविधा नक्सल उन्मूलन : ‘एक तथ्यात्मक विश्लेषण’

नक्सल उन्मूलन : ‘एक तथ्यात्मक विश्लेषण’

-आलोक कुमार-    नक्सल उन्मूलन के मोर्चे पर केन्द्र व राज्यों की सरकार और सुरक्षा बलों में निःसंदेह बेहतर तालमेल का अभाव है। राजनीति तिकड़मबाजी…

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राजनीति राजनीति की एक नई पारी

राजनीति की एक नई पारी

-अंकित कुमार पांडेय-   आम आदमी पार्टी की सरकार आने से राजनीतिक गलियारों में एक नई और सकारात्मक सोंच उभरने लगी। मगर नए वर्श और…

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विविधा प्यार को पुष्पित-पल्लवित करने का दिन बने वेलेंटाइन-डे

प्यार को पुष्पित-पल्लवित करने का दिन बने वेलेंटाइन-डे

-एम. अफसर खां सागर-    वेलेंटाइन-डे या यूं कह लें कि प्रेम दिवस ! प्यार करने का दिन या प्रेम के इजार करने का दिन या…

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राजनीति ‘अराजकता का पैरोकार बनकर ‘सुराज’ का सपना नहीं देखा जा सकता’

‘अराजकता का पैरोकार बनकर ‘सुराज’ का सपना नहीं देखा जा सकता’

-आलोक कुमार-    संविधान पर आस्था, लोकतंत्र पर विश्वास, संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान और न्याय व्यवस्था पर भरोसा जैसे शब्द अभी भी हमारे देश में…

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व्यंग्य बैंगन का भुरता बनाम सत्ता का जहर

बैंगन का भुरता बनाम सत्ता का जहर

–   जग मोहन ठाकन-    गुरूजी प्रवचन करके जैसे ही घर पर लौटे तो देखा कि बाहर कचरादानी में ताज़ा बैंगन का भुरता मंद-मंद मुस्करा…

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