महत्वपूर्ण लेख विश्वगुरू (भारत) को दर्पण तो, दिखाओ।

विश्वगुरू (भारत) को दर्पण तो, दिखाओ।

डॉ. मधुसूदन *जब भारत स्वयं ही अपने आप को बौनी विचारधाराओं के बराबर  मानता है, तो परदेशियों  को भारत की विशेषताओं का पता  कैसे चलें?…

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कविता बाहें

बाहें

       तुम थे तो तुम्हारी बाहों के साथ मेरी बाहों का विस्तार बहुत लंबा था । मुझको   लगता  था  मैं कुछ भी छू…

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शख्सियत ‘मैं हिंदू हूं और राष्ट्रवादी हूं’

‘मैं हिंदू हूं और राष्ट्रवादी हूं’

पिछले दिनों गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने राॅयटर्स को एक साक्षात्कार दिया। इसमें कही गई बातों की हर तरफ बड़ी चर्चा हुई। कुछ बातों…

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राजनीति महारथी से अधिरथ बना भारतीय नेतृत्व

महारथी से अधिरथ बना भारतीय नेतृत्व

स्वतंत्रता दिवस की 66वीं वर्षगांठ भारत मना रहा है। इस पावन अवसर पर हम एक दूसरे को शुभकामनाएं प्रेषित कर रहे हैं। सचमुच पिछले 66…

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जन-जागरण क्या हम आजाद है?

क्या हम आजाद है?

विकास कुमार गुप्ता महात्मा गांधी ने एकबार अपने लिखित वक्तव्य में कहा था “याद रखना, आजादी करीब हैं। सरकारे बहुत जोर से यह जरूर कहंेगी…

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शख्सियत अब कौन दहाड़ेगा मिशनरियों को ?

अब कौन दहाड़ेगा मिशनरियों को ?

अनिल द्विवेदी ‘आइ एम द किंग ऑफ रियासत बट दिस परसन इज द किंग ऑफ डेमोक्रेसी’ यानि मैं तो एक रियासत का राजा हूं लेकिन…

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विविधा किसका राज, कैसा धर्म

किसका राज, कैसा धर्म

अनिल द्विवेदी देर से ही सही, उस सच को देश के पूर्व गृहमंत्री लेकिन अब केंद्रीय वित्त मंती पी. चिदंबरम ने कुबूल कर ही लिया…

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कविता कहीं से काले बादल आही जाते हैं

कहीं से काले बादल आही जाते हैं

तेज़ चमकती धूप मे कहीं से, उमड़ धुमड़ कर काले बादल, आ ही जाते हैं। जैसे शांत मन मे अचानक, नकारात्मक संवेग कभी भी, छा…

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विश्ववार्ता ऐसे युद्ध के चलते शांति की गुंजाइश कहाँ?

ऐसे युद्ध के चलते शांति की गुंजाइश कहाँ?

नरेश भारतीय किसी भी देश के इतिहास में साढ़े छह दशक का काल खंड अपने पड़ोसी देशों के साथ अपनी सीमा समस्याओं के समाधान के…

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विश्ववार्ता चीन-पाक कोरिडोर और हमारी कुंभकर्णी नींद

चीन-पाक कोरिडोर और हमारी कुंभकर्णी नींद

बिपिन किशोर सिन्‍हा राष्ट्रीय सुरक्षा की लगातार अनदेखी गहरी चिन्ता का विषय है। १९६२ के पहले सुरक्षा की अनदेखी तिब्बत पर चीन के कब्जे और…

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आलोचना कबीर-तुलसी के काव्यों में स्त्री-विरोध

कबीर-तुलसी के काव्यों में स्त्री-विरोध

सारदा बैनर्जी भक्तिकालीन साहित्य में पाखंड-विरोध के समानांतर स्त्री-विरोध का स्वर भी स्पष्टतः मुखर हुआ है। खासकर कबीर जैसे प्रगतिशील और भक्त कवि ने अपने…

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जन-जागरण मंत्री जी, छॅ लाख लिजिए और देश के लिये जरा शहीद होके दिखाइए

मंत्री जी, छॅ लाख लिजिए और देश के लिये जरा शहीद होके दिखाइए

डा. अरविन्द कुमार सिंह मंत्री जी कृपया बताईये, भारतीय संविधान की किस धारा और अनुच्छेद में यह लिखा है कि देश के लिये सिर्फ वेतन…

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