राजनीति समाजवाद का नया कारनामा

समाजवाद का नया कारनामा

सिद्धार्थ मिश्र “स्‍वतंत्र” उत्‍तर प्रदेश में पूर्ण  ब‍हुमत  से  प्राप्‍त सत्‍ता सपा के हाजमे को बिगाड़ रही है । इसकी बानगी हमें कई अवसरों पर…

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चिंतन प्रोत्साहन भले न दें प्रतिभाओं की हत्या तो न करें

प्रोत्साहन भले न दें प्रतिभाओं की हत्या तो न करें

डॉ. दीपक आचार्य दुनिया में हर क्षेत्र में प्रतिभाओं का जन्म होता रहा है और उनकी वजह से विश्व समुदाय को कुछ न कुछ प्राप्त…

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कविता कविता : जीने का रहस्य

कविता : जीने का रहस्य

 मिलन सिन्हा   न जाने कितनी रातें आखों  में  काटी  हमने प्रेम में नहीं, मुफलिसी में रातें ऐसे काटी हमने   खाते-खाते मर  रहें  हैं …

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कहानी शराफत‌ के पेरोकार‌

शराफत‌ के पेरोकार‌

मोहल्ले वालों ने आसमान सिर पर उठा रखा था|पास पड़ौस के सभी धुरंधर उसके मकान के पास एकत्रित थे|सत्तरह मुँह सत्तरह बातें हो रही थीं|…

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राजनीति कितने  प्रश्‍नों को  नकारेगी  कांग्रेस

कितने प्रश्‍नों को नकारेगी कांग्रेस

सिद्धार्थ मिश्र “स्‍वतंत्र” दागदार चेहरे हैं दाग  बड़े गहरे हैं………….अटल जी की ये कविता आज और भी प्रासंगिक हो गयी हैं । राजनीति के इस…

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महत्वपूर्ण लेख हिंदुत्व के वो महान बलिदानी और लुटेरा महमूद गजनवी

हिंदुत्व के वो महान बलिदानी और लुटेरा महमूद गजनवी

लुटेरों को राज्यसिंहासन और वास्तविक उत्तराधिकारियों को वनवास दिलाना भारतीय प्रचलित इतिहास का सबसे घातक छल प्रपंच है। जिन इतिहास लेखकों ने इस राष्ट्र  अपघात को…

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विविधा हिंदीः अ से ह तक और हिंदी में समाहित अध्यात्म, दिव्यता, दर्शन, योग, ज्ञान और विज्ञान

हिंदीः अ से ह तक और हिंदी में समाहित अध्यात्म, दिव्यता, दर्शन, योग, ज्ञान और विज्ञान

डॉ. मृदुल कीर्ति आध्यात्मिक और दिव्य पक्ष – संस्कृत देव भाषा है, हिंदी संस्कृत से ही निःसृत दिव्य भाषा है, देव वाणी है । ‘…

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राजनीति बड़े लोगों  के  बड़े  ढाबे

बड़े लोगों के बड़े ढाबे

जंबू द्वीप के बिहार प्रांत के छपरा में अमृत तुल्य मिड डे मील लेने के बाद बच्चों की मृत्यु से संत्रस्त हो यमराज यमपुरी में …

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आर्थिकी पूंजी निवेश का उतरता ज्वार

पूंजी निवेश का उतरता ज्वार

प्रमोद भार्गव भारत में प्रत्यक्ष विदेशी पूंजी निवेश का ज्वार उतार पर है। इस स्थिति को इस अर्थ में ले सकते है कि प्राकृतिक संपदा…

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बच्चों का पन्ना चंद्र ग्रहण‌

चंद्र ग्रहण‌

प्रभुदयाल श्रीवास्तव बहुत दिनों से सोच रहा हूं, मन में कब से लगी लगन है| आज बताओ हमें गुरुजी, कैसे होता सूर्य ग्रहण है| बोले…

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कविता भारत   की  व्यथा

भारत की व्यथा

प्रवीण  कुमार        मै थी एक सोने की चिड़िया , मेरी थी हर बात निराली . सदाबहार  नदी-तालों  से ,खेतों में उगती हरियाली.  …

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कविता हवा की नाराजगी

हवा की नाराजगी

हैरान हू, कि, आज हवा भी मुझसे नाराज है, पेरशान हूँ कि, जमीन मेरे भावनओं पर टिकी है, बसंत के मौसम में, मुरझाया हुआ सा…

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