समाजवाद का नया कारनामा
Updated: July 30, 2013
सिद्धार्थ मिश्र “स्वतंत्र” उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत से प्राप्त सत्ता सपा के हाजमे को बिगाड़ रही है । इसकी बानगी हमें कई अवसरों पर…
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प्रोत्साहन भले न दें प्रतिभाओं की हत्या तो न करें
Updated: July 30, 2013
डॉ. दीपक आचार्य दुनिया में हर क्षेत्र में प्रतिभाओं का जन्म होता रहा है और उनकी वजह से विश्व समुदाय को कुछ न कुछ प्राप्त…
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कविता : जीने का रहस्य
Updated: July 30, 2013
मिलन सिन्हा न जाने कितनी रातें आखों में काटी हमने प्रेम में नहीं, मुफलिसी में रातें ऐसे काटी हमने खाते-खाते मर रहें हैं …
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शराफत के पेरोकार
Updated: July 31, 2013
मोहल्ले वालों ने आसमान सिर पर उठा रखा था|पास पड़ौस के सभी धुरंधर उसके मकान के पास एकत्रित थे|सत्तरह मुँह सत्तरह बातें हो रही थीं|…
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कितने प्रश्नों को नकारेगी कांग्रेस
Updated: July 30, 2013
सिद्धार्थ मिश्र “स्वतंत्र” दागदार चेहरे हैं दाग बड़े गहरे हैं………….अटल जी की ये कविता आज और भी प्रासंगिक हो गयी हैं । राजनीति के इस…
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हिंदुत्व के वो महान बलिदानी और लुटेरा महमूद गजनवी
Updated: July 30, 2013
लुटेरों को राज्यसिंहासन और वास्तविक उत्तराधिकारियों को वनवास दिलाना भारतीय प्रचलित इतिहास का सबसे घातक छल प्रपंच है। जिन इतिहास लेखकों ने इस राष्ट्र अपघात को…
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हिंदीः अ से ह तक और हिंदी में समाहित अध्यात्म, दिव्यता, दर्शन, योग, ज्ञान और विज्ञान
Updated: July 29, 2013
डॉ. मृदुल कीर्ति आध्यात्मिक और दिव्य पक्ष – संस्कृत देव भाषा है, हिंदी संस्कृत से ही निःसृत दिव्य भाषा है, देव वाणी है । ‘…
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बड़े लोगों के बड़े ढाबे
Updated: July 29, 2013
जंबू द्वीप के बिहार प्रांत के छपरा में अमृत तुल्य मिड डे मील लेने के बाद बच्चों की मृत्यु से संत्रस्त हो यमराज यमपुरी में …
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पूंजी निवेश का उतरता ज्वार
Updated: July 29, 2013
प्रमोद भार्गव भारत में प्रत्यक्ष विदेशी पूंजी निवेश का ज्वार उतार पर है। इस स्थिति को इस अर्थ में ले सकते है कि प्राकृतिक संपदा…
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चंद्र ग्रहण
Updated: July 29, 2013
प्रभुदयाल श्रीवास्तव बहुत दिनों से सोच रहा हूं, मन में कब से लगी लगन है| आज बताओ हमें गुरुजी, कैसे होता सूर्य ग्रहण है| बोले…
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भारत की व्यथा
Updated: July 29, 2013
प्रवीण कुमार मै थी एक सोने की चिड़िया , मेरी थी हर बात निराली . सदाबहार नदी-तालों से ,खेतों में उगती हरियाली. …
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हवा की नाराजगी
Updated: July 29, 2013
हैरान हू, कि, आज हवा भी मुझसे नाराज है, पेरशान हूँ कि, जमीन मेरे भावनओं पर टिकी है, बसंत के मौसम में, मुरझाया हुआ सा…
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