मीडिया ज्वलंत मुद्दों पर बहस है ‘प्रवक्‍ता’ की खासियत

ज्वलंत मुद्दों पर बहस है ‘प्रवक्‍ता’ की खासियत

प्रिय संजीव जी,  नमस्कार!  पांच वर्ष पूर्व ‘प्रवक्ता’ के रूप में आपने जो वैचारिक अंकुर लगाए थे वह अब वृक्ष का आकार लेने लगा है।…

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लेख हिन्दी कविता में जन्मभूमि-वंदना

हिन्दी कविता में जन्मभूमि-वंदना

राकेश कुमार आर्य हमारे कवियों ने मां भारती के प्रति हर देशवासी को जागरूक बनाये रखने हेतु समय-समय पर देशभक्ति और जन्मभूमि के प्रति समर्पण…

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मीडिया बधाई प्रवक्ता..हिंदी को लोकतांत्रिक मंच देने के लिए / उमेश चतुर्वेदी

बधाई प्रवक्ता..हिंदी को लोकतांत्रिक मंच देने के लिए / उमेश चतुर्वेदी

हिंदी के श्रेष्‍ठ पत्रकारों में उमेश चतुर्वेदी जी का नाम उल्‍लेखनीय है। उनके विचार दबाव, प्रभाव और मतवादों से मुक्‍त होते हैं। ‘प्रवक्‍ता डॉट कॉम’…

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मीडिया प्रवक्ता डॉट कॉम ने मेरी हैसियत बढ़ाई / अनिल सौमित्र

प्रवक्ता डॉट कॉम ने मेरी हैसियत बढ़ाई / अनिल सौमित्र

प्रवक्ता डॉटकॉम अब वेब मीडिया में जान-पहचाना नाम हो गया है. भले ही इसके जन्म को 5 वर्ष पूरे हो रहे हैं, लेकिन अब यह…

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विविधा अनिवार्य मतदान की जरुरत

अनिवार्य मतदान की जरुरत

प्रमोद भार्गव मतदान की अनिवार्यता कोर्इ नर्इ बहस नहीं है, लेकिन मतदाता को नकारात्मक मतदान का जो अधिकार मिला है, उस परिप्रेक्ष्य में इसकी प्रसांगिकता…

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मीडिया राष्ट्र का सजग प्रहरी है प्रवक्ता डॉट कॉम

राष्ट्र का सजग प्रहरी है प्रवक्ता डॉट कॉम

प्रो.ब्रह्रादीप अलुने निर्भीक पत्रकारिता समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है । भारत की स्वतंत्रता में पत्रकारिता के सिपाहियों का गहरा योगदान…

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मीडिया मेरे संस्मरण

मेरे संस्मरण

वक्ताओं से भरे इस देश में  समाज के सभी वर्ग के सशक्त प्रवक्ता के रूप में खुद को पांच साल की छोटी अवधि में राष्ट्रीय…

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समाज बदलता बचपन और बिगडती ज़िन्दगी..!

बदलता बचपन और बिगडती ज़िन्दगी..!

भगवंत अनमोल एक मेरे पड़ोस में एक खन्ना साहब का परिवार है. वो किसी प्राइवेट कंपनी में ऊँचे पद पर है और उनकी अर्धांग्नी भी…

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कविता घनश्याम  काका

घनश्याम काका

घनश्याम  काका को, बहुत शिकायत हैं, अपने बेटे बहू से, शिकायतों की पूरी लिस्ट है जिसे, वो हर आये गये से शेयर करते हैं, जैसे…

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खेल जगत सचिन तेंदुल्कर जैसा दूसरा नहीं आ सकता

सचिन तेंदुल्कर जैसा दूसरा नहीं आ सकता

ए एन शिबली किसी भी खेल में खिलाडियों का आना जाना कोई नयी बात नहीं है. खेल ही नहीं बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में…

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व्यंग्य मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो

मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो

 जग मोहन ठाकन  जब कृष्ण कन्हैया के मुख पर मक्खन लगा देख यशोदा पूछती है तो बाल गोपाल कहते हैं , ‘‘ मैया मोरी मैं…

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कविता हिमालय के इस आँगन में

हिमालय के इस आँगन में

हिमालय के इस आँगन में उषा की प्रथम किरणे अभिनन्दन करती हुई हिम से ढके पर्वतों को सफ़ेद मोतियों से पिरोती हुई श्यामल नभ में…

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