ज्वलंत मुद्दों पर बहस है ‘प्रवक्ता’ की खासियत
Updated: October 14, 2013
प्रिय संजीव जी, नमस्कार! पांच वर्ष पूर्व ‘प्रवक्ता’ के रूप में आपने जो वैचारिक अंकुर लगाए थे वह अब वृक्ष का आकार लेने लगा है।…
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हिन्दी कविता में जन्मभूमि-वंदना
Updated: October 14, 2013
राकेश कुमार आर्य हमारे कवियों ने मां भारती के प्रति हर देशवासी को जागरूक बनाये रखने हेतु समय-समय पर देशभक्ति और जन्मभूमि के प्रति समर्पण…
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बधाई प्रवक्ता..हिंदी को लोकतांत्रिक मंच देने के लिए / उमेश चतुर्वेदी
Updated: October 14, 2013
हिंदी के श्रेष्ठ पत्रकारों में उमेश चतुर्वेदी जी का नाम उल्लेखनीय है। उनके विचार दबाव, प्रभाव और मतवादों से मुक्त होते हैं। ‘प्रवक्ता डॉट कॉम’…
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प्रवक्ता डॉट कॉम ने मेरी हैसियत बढ़ाई / अनिल सौमित्र
Updated: October 14, 2013
प्रवक्ता डॉटकॉम अब वेब मीडिया में जान-पहचाना नाम हो गया है. भले ही इसके जन्म को 5 वर्ष पूरे हो रहे हैं, लेकिन अब यह…
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अनिवार्य मतदान की जरुरत
Updated: October 14, 2013
प्रमोद भार्गव मतदान की अनिवार्यता कोर्इ नर्इ बहस नहीं है, लेकिन मतदाता को नकारात्मक मतदान का जो अधिकार मिला है, उस परिप्रेक्ष्य में इसकी प्रसांगिकता…
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राष्ट्र का सजग प्रहरी है प्रवक्ता डॉट कॉम
Updated: October 14, 2013
प्रो.ब्रह्रादीप अलुने निर्भीक पत्रकारिता समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है । भारत की स्वतंत्रता में पत्रकारिता के सिपाहियों का गहरा योगदान…
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मेरे संस्मरण
Updated: October 14, 2013
वक्ताओं से भरे इस देश में समाज के सभी वर्ग के सशक्त प्रवक्ता के रूप में खुद को पांच साल की छोटी अवधि में राष्ट्रीय…
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बदलता बचपन और बिगडती ज़िन्दगी..!
Updated: October 15, 2013
भगवंत अनमोल एक मेरे पड़ोस में एक खन्ना साहब का परिवार है. वो किसी प्राइवेट कंपनी में ऊँचे पद पर है और उनकी अर्धांग्नी भी…
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घनश्याम काका
Updated: October 14, 2013
घनश्याम काका को, बहुत शिकायत हैं, अपने बेटे बहू से, शिकायतों की पूरी लिस्ट है जिसे, वो हर आये गये से शेयर करते हैं, जैसे…
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सचिन तेंदुल्कर जैसा दूसरा नहीं आ सकता
Updated: October 14, 2013
ए एन शिबली किसी भी खेल में खिलाडियों का आना जाना कोई नयी बात नहीं है. खेल ही नहीं बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में…
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मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो
Updated: October 14, 2013
जग मोहन ठाकन जब कृष्ण कन्हैया के मुख पर मक्खन लगा देख यशोदा पूछती है तो बाल गोपाल कहते हैं , ‘‘ मैया मोरी मैं…
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हिमालय के इस आँगन में
Updated: October 14, 2013
हिमालय के इस आँगन में उषा की प्रथम किरणे अभिनन्दन करती हुई हिम से ढके पर्वतों को सफ़ेद मोतियों से पिरोती हुई श्यामल नभ में…
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