जापानी भाषा कैसे सक्षम बनी ?–डॉ. मधुसूदन
Updated: December 18, 2012
ॐ –जापानी भाषा कैसे विकसी ? ॐ –जापान को देवनागरी की सहायता. ॐ —जापानी, हमारी भाषा से कमज़ोर थी. ॐ —अनुवाद करो या बरखास्त हो…
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भ्रष्टाचारी पति की पत्नी को भी मिली सजा
Updated: December 18, 2012
सीबीआई विशेष न्यायालय का अनूठा फैसला प्रमोद भार्गव दिल्ली की सीबीआई अदालत ने भ्रष्टाचार के मामले में अनूठा फैसला सुनाकर दण्ड का भय कायम करने…
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कठघरे में सीबीआई की साख
Updated: December 18, 2012
डॉ. आशीष वशिष्ठ देश की प्रमुख जांच एजेंसियों में शुमार सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टीगेशन अर्थात सीबीआई का प्रयोग राजनीतिक हित साधने और विरोधियों को औकात…
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कहां जांयें हम
Updated: December 15, 2012
भालू चीता शेर सियार सब, रहने आये शहर में| बोले’अब तो सभी रहेंगे, यहीं आपके घर में|’ तरुवर सारे काट लिये हैं , नहीं…
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पुसंवाद को कितना डिस्टर्ब करता है स्त्रीवादी सोच – सारदा बनर्जी
Updated: December 17, 2012
क्या वजह है कि कोई स्त्री लेखिका जब पितृसत्ताक समाज के पुंसवादी रवैये की आलोचना करती हैं तो उन्हें पुरुषों की कटुक्ति का सामना करना…
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मेरी दृष्टि में ‘शांतिनिकेतन’ – सारदा बनर्जी
Updated: December 17, 2012
यदि रवीन्द्रनाथ को जानना, समझना और अनुभव करना हो तो ‘शांतिनिकेतन’ सबसे उत्तम स्थान है। रवीन्द्रनाथ जिस विश्व-शांति का उद्घोष शांतिनिकेतन की प्रतिष्ठा द्वारा करना…
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हाथी और चूहा
Updated: December 17, 2012
दो चूहों को बीच सड़क पर, मिल गये हाथी दादा| एक चूहा दूजे से बोला, क्या है भाई इरादा? कई दिनों से हाथ सुस्त हैं,…
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हमारी माँ अगर होती
Updated: December 15, 2012
हमारी माँ अगर होती, हमारे साथ में पापा| फटकने दुख नहीं देती ,हमारे पास में पापा|| सुबह उठकर हमें वह दूध ,हँस हँस कर…
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क्यों कहा जस्टिस काटजू ने ‘बेवक़ूफ़’ हैं 90 प्रतिशत भारतीय’
Updated: December 17, 2012
तनवीर जाफ़री अपनी तीखी व तल्ख़ टिप्पणी, स्पष्टवादिता तथा न्यायधीश रहते हुए कई मुकद्दमों में बेबाक व ऐतिहासिक निर्णय सुनाए जाने के लिए चर्चा में…
Read moreवही सफलता पाता है
Updated: December 17, 2012
पीपल मेरे पूज्य पिताजी, तुलसी मेरी माता है| बरगद को दादा कहने से, मन पुलकित हो जाता है| बगिया में जो आम लगा है,…
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हाथी मामा
Updated: December 15, 2012
हाथी मामा पहिन पजामा, पहुंच गये स्कूल| जैसे ही पढ़ने वह बैठे, टूट गया स्टूल| चित्त गिरे धरती पर मामा, कुछ भी समझ न पाये|…
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के. रहमान और शिक्षा का विषाक्तीकरण-डॉ. मनोज चतुर्वेदी
Updated: December 15, 2012
संप्रग-1 तथा संप्रग-2 ने आपने नए-नए कारनामों से भारतीय राजनीति तथा शिक्षा को विषाक्त करने का प्रयास किया है। सोनिया गांधी-मनमोहन सिंह सरकार के नए-नए…
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