कविता – उसे चुनना है
Updated: November 24, 2012
मैं अंतरिक्ष में भटक रहा हूँ पिंजरे में कैद मात्र शून्य की तरह लचीली रेखा भी मेरे साथ घुम रही है मैं आश्वस्त हूँ सभी…
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और क्या चाहिये…
Updated: November 24, 2012
राह है ,राही भी है ,मंज़िल भले ही दूर हो, एक पड़ाव चाहिये मुड़कर देखने के लिये। कला है, ,प्रतिभा है, रचना है,,, ,,…
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‘इस्लामिक द्विराष्ट्रवाद एवं संविधान
Updated: November 24, 2012
जब भारत स्वतन्त्र होने की प्रक्रिया से निकल रहा था तभी भारत के लिए संविधान निर्माण हेतु संविधान सभा का गठन हो गया था। 9…
Read moreहाथ पांव अपने हैं दिल दिमाग़ गिरवीं हैं…..
Updated: November 24, 2012
इक़बाल हिंदुस्तानी कै़द में सता लो तुम पर मिटा नहीं सकते, है सदा ए हक़ मेरी तुम दबा नहीं सकते। ध्ूाप का मुसाफिर…
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फांसी के पीछे की स्याह सियासत
Updated: November 24, 2012
सिद्धार्थ मिश्र‘स्वतंत्र’ देश की अखंडता पर कुठाराघात करने वाले कसाब को इस दुनिया से रूखसत हुए 48 घंटे से भी ज्यादा हो गये । इसके…
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आतंकियों की धमकी को हलके में न ले सरकारr
Updated: November 24, 2012
सिद्धार्थ शंकर गौतम देश की अस्मिता पर हमला करने वाले दुर्दांत आतंकी आमिर अजमल कसाब को दी गई फांसी पर विश्व भर में मिश्रित प्रतिक्रियाएं…
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भारतीय जनतंत्र अपने में अनूठा
Updated: November 21, 2012
अनिल अनुप भारतीय जनतंत्र शब्दों में बहुत बड़ा कहा जाता है पर गुणत्व में बहुत सी खामियां हैं। यदि जनतंत्र का आशय देशहित को ताक…
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नशा:राघवेन्द्र कुमार ‘राघव’
Updated: November 22, 2012
सड़क किनारे पड़ी थी एक लाश उसके पास कुछ लोग बैठे थे बदहवाश | उनमे चार छोटे बच्चे और उनकी माँ थी , बूढ़े माँ…
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तुम, मेरी देवी-विजय निकोर
Updated: November 22, 2012
भोर की अप्रतिम ओस में धुली निर्मल, निष्पाप प्रभात की हँसी-सी खिलखिला उठती, कभी दुपहर की उष्मा ओढ़े फिर पीली शाम-सी सरकती तुम्हारी याद रात…
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क्या बाकियों के फंदे तैयार हैं?
Updated: November 22, 2012
सिद्धाथ मिश्र‘स्वतंत्र’ मुंबई हमले के दोषी कसाब की फांसी ने जाहिर तौर पर देशवासियों को सुकून दिया है । इस विषय में सबसे महत्पूर्ण बात…
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जहाँ चप्पे चप्पे में सो रहा है इतिहास, वहाँ की नमन यात्रा
Updated: November 22, 2012
डा कुलदीप चंद अग्निहोत्री भारत ितब्बत सहयोग मंच ने इस वर्ष से तवांग यात्रा की शुरुआत की है । तवांग अरुणाचल प्रदेश का अंतिम छोर…
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बुरके के पीछे सिर्फ कट्टरपंथ
Updated: November 21, 2012
अनिल अनुप नकाब, हिजाब या बुरके के पीछे सिर्फ मुस्सिम कट्टरपंथ की शिकार ही नहीं छिपी होती, बल्कि रेडिकल विचार भी पनप रहे होते हैं,…
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