व्यंग्य व्यंग्य बाण : डंडा सैल

व्यंग्य बाण : डंडा सैल

परसों शर्मा जी बहुत दिन बाद मिलने आये, तो उनकी सूजी हुई आंखों से दुख टपक रहा था। चेहरे से ऐसा लग रहा था मानो…

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राजनीति चीन के अनुकूल रही वार्ता

चीन के अनुकूल रही वार्ता

प्रमोद भार्गव विश्व – भूगोल पर नए शक्ति-केंद्रों के रुप में उभर रहे भारत और चीन की वार्ता, आखिरकार चीन के पक्ष में जाती दिखार्इ…

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कविता मैं सिर्फ तुम्हारी लिखी

मैं सिर्फ तुम्हारी लिखी

अब मैं सिर्फ तुम्हारी लिखी कविताएँ ही पढ़ता हूँ कविता ही क्या ? तुम्हें भी तो पढता हूँ… महज़ एक कोशिश !   तुम्हारी मुस्कान…

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जन-जागरण इन हत्याओं पर आंसू मत बहाइए, संकल्प लीजिए

इन हत्याओं पर आंसू मत बहाइए, संकल्प लीजिए

तर्क और बहानों से आगे बढ़ने का समय इन हत्याओं पर आंसू मत बहाइए, संकल्प लीजिए   माओवादी आतंकवाद के विकृत स्वरूप पर बौद्धिक विमर्शों…

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खेल जगत चोरी और सीनाजोरी

चोरी और सीनाजोरी

सिद्धार्थ मिश्र “स्‍वतंत्र” कभी भद्र जनों के खेलों के नाम से विख्‍यात क्रिकेट आज अभद्रता के सारे कीर्तिमानों को ध्‍वस्‍त करता नजर आ रहा है…

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विविधा बाबा अमरनाथ यात्रा के सन्दर्भ में

बाबा अमरनाथ यात्रा के सन्दर्भ में

सेवा में राष्ट्रपति राष्ट्रपति भवन भारत सरकार नई दिल्ली | विषय |- बाबा अमरनाथ यात्रा के सन्दर्भ में हम भक्तजन आपसे निवेदन | श्रीमान जी…

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कविता कितने प्यार से

कितने प्यार से

सींचा था मैंने उस रिश्ते को अपने ही हाथों मे संभाला था उसे किसी फूल की तरह   समझदार तो था मगर हरबार हौसला बढाता…

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गजल गज़ल-मैंने देखा खून आज

गज़ल-मैंने देखा खून आज

(राघवेन्द्र कुमार “राघव”) मैंने देखा खून आज , राह में गिरा हुआ । पूछा खून किसका है, कोई तो बताइए । क्या हुआ जो आप सब, क्रोध में उबल रहे ।…

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कविता मेरे होने, न होने के बीच का अवकाश है तुम्हारे लिये …

मेरे होने, न होने के बीच का अवकाश है तुम्हारे लिये …

मेरे होने, न होने के बीच का अवकाश है तुम्हारे लिये … कितना कुछ घुमड़ रहा है मेरे अंदर और बाहर से मेरे अंदर तक…

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टॉप स्टोरी लाल क्रांतिवाद बनाम लोकतंत्र।

लाल क्रांतिवाद बनाम लोकतंत्र।

भारत को आजाद कराने और उसे प्रजातंत्र बनाने में हम सबके पुऱखों ने कुरबानी दी । देश की आजादी की ललक में । सपना लोकतंत्र…

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विविधा क्या हासिल होगा माओवादियों को इस हमले से?

क्या हासिल होगा माओवादियों को इस हमले से?

यदि आतंक फैलाकर या बनाए रखकर ही माओवाद को ज़िंदा रखना माओवादियों का मकसद है, तो वे अपने मकसद में फौरी तौर पर इसलिए कामयाब…

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विविधा व्यंग्य बाण : बेशर्म कथा

व्यंग्य बाण : बेशर्म कथा

बात अधिक पुरानी नहीं है। शर्मा जी के मोहल्ले में एक जैसी सूरत और कद-काठी की दो जुड़वां बहनें रहती थीं। एक का नाम था…

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