हिंद स्‍वराज व्याकुल भारत की अकुलाहट

व्याकुल भारत की अकुलाहट

प्रणय विक्रम सिंह भारत की सियासत रोज नर्इ करवटें बदल रही है। कभी पक्ष और विपक्ष के मध्य सिमटी रहने वाली राजनीति को नये आयामों…

Read more
व्यंग्य कवि और कल्पना

कवि और कल्पना

कविता भी क्या चीज़ है कल्पना की उड़ान कवि को किसी दूसरी ही दुनियाँ मे पंहुचा देती है। एक कवि की दुनियाँ और एक उस…

Read more
समाज टूटी है किसके हाथ में तलवार देखना…

टूटी है किसके हाथ में तलवार देखना…

तनवीर जाफ़री भारतीय राजस्व सेवा की नौकरी त्याग कर भ्रष्ट राजनैतिक व्यवस्था को सुधारने का बीड़ा उठाने वाले अरविंद केजरीवाल की इस समय एक ऐसी…

Read more
कविता असंगतिओं का जलप्रलय

असंगतिओं का जलप्रलय

गतिमय प्रिय स्मृतिओं की बढ़ती बाढ़ की गति ढूँढती है नए मैदानों के फैलावों को मेरे भीतर, पर यहाँ तो कोई निरंक स्थान नहीं है…

Read more
समाज भारत में अल्पसंख्यकों की समस्या

भारत में अल्पसंख्यकों की समस्या

हमारे देश में अल्पसंख्यक शब्द का बार बार प्रयोग होता है विशेषत: चुनावी मौसम में तो कितने ही नेता वर्षाती मेढक की भांति अल्पसंख्यक अल्पसंख्यक…

Read more
राजनीति केजरीवाल जी भ्रष्टाचार के समंदर की सफाई नीचे से करनी होगी!

केजरीवाल जी भ्रष्टाचार के समंदर की सफाई नीचे से करनी होगी!

इक़बाल हिंदुस्तानी समाज में जागरूकता लाये बिना सिर्फ मीडिया से यह कैसे संभव? अपनी टीम के मास्टरमाइंड रहे अरविंद केजरीवाल को अन्ना हज़ारे का यह…

Read more
राजनीति बेगानी शादी में भाजपाई दीवाने

बेगानी शादी में भाजपाई दीवाने

 सिद्धार्थ शंकर गौतम सुब्रमण्यम स्वामी- भारतीय राजनीति का ऐसा व्यक्तित्व जिसने गांधी-नेहरु परिवार की सियासी राजनीतिक विरासत को देश निकाला का बीड़ा उठा रखा है।…

Read more
वर्त-त्यौहार पूजा का पर्व गोवर्धन

पूजा का पर्व गोवर्धन

परमजीत कौर कलेर जगमगाते दीओं की रात क्या आती है कि वो लेकर आती है ढेर सारी खुशियां और उत्साह …हर कोई इस रोशनी के…

Read more
समाज बच्चों को दंडित किया तो शिक्षकों की खैर नहीं

बच्चों को दंडित किया तो शिक्षकों की खैर नहीं

हमारे देश मे प्राचीन काल से ही शिक्षकों द्वारा बच्चों को पढ़ाई ना करने या दिया हुआ कार्य पूरा ना करने पर सजा देने का प्रावधान…

Read more
विविधा फेसबुक और विचार

फेसबुक और विचार

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी फेसबुक लेखन को कचड़ा लेखन मानने वालों की संख्या काफी है। ऐसे भी सुधीजन हैं जो यह मानते हैं कि केजुअल लेखन के…

Read more
शख्सियत किस प्रकार जी रहे थे*

किस प्रकार जी रहे थे*

शंख घोष वे कैसे जी रहे थे, नये समय के पाठक अब इसे सिर्फ उनकी कविता के जरिये जानेंगे। नये दिनों की कविता कैसी हो…

Read more
कविता कविता – अवशेष

कविता – अवशेष

मोतीलाल आग जब सबकुछ जला देगी कुछ तिलिस्म जिंदगी भर के वास्ते धुंधला जाने के लिए उम्मीद को छोड़ कर कहीं से भी चलकर निरर्थक…

Read more