व्याकुल भारत की अकुलाहट
Updated: November 5, 2012
प्रणय विक्रम सिंह भारत की सियासत रोज नर्इ करवटें बदल रही है। कभी पक्ष और विपक्ष के मध्य सिमटी रहने वाली राजनीति को नये आयामों…
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कवि और कल्पना
Updated: November 5, 2012
कविता भी क्या चीज़ है कल्पना की उड़ान कवि को किसी दूसरी ही दुनियाँ मे पंहुचा देती है। एक कवि की दुनियाँ और एक उस…
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टूटी है किसके हाथ में तलवार देखना…
Updated: November 5, 2012
तनवीर जाफ़री भारतीय राजस्व सेवा की नौकरी त्याग कर भ्रष्ट राजनैतिक व्यवस्था को सुधारने का बीड़ा उठाने वाले अरविंद केजरीवाल की इस समय एक ऐसी…
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असंगतिओं का जलप्रलय
Updated: November 5, 2012
गतिमय प्रिय स्मृतिओं की बढ़ती बाढ़ की गति ढूँढती है नए मैदानों के फैलावों को मेरे भीतर, पर यहाँ तो कोई निरंक स्थान नहीं है…
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भारत में अल्पसंख्यकों की समस्या
Updated: November 5, 2012
हमारे देश में अल्पसंख्यक शब्द का बार बार प्रयोग होता है विशेषत: चुनावी मौसम में तो कितने ही नेता वर्षाती मेढक की भांति अल्पसंख्यक अल्पसंख्यक…
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केजरीवाल जी भ्रष्टाचार के समंदर की सफाई नीचे से करनी होगी!
Updated: November 5, 2012
इक़बाल हिंदुस्तानी समाज में जागरूकता लाये बिना सिर्फ मीडिया से यह कैसे संभव? अपनी टीम के मास्टरमाइंड रहे अरविंद केजरीवाल को अन्ना हज़ारे का यह…
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बेगानी शादी में भाजपाई दीवाने
Updated: November 5, 2012
सिद्धार्थ शंकर गौतम सुब्रमण्यम स्वामी- भारतीय राजनीति का ऐसा व्यक्तित्व जिसने गांधी-नेहरु परिवार की सियासी राजनीतिक विरासत को देश निकाला का बीड़ा उठा रखा है।…
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पूजा का पर्व गोवर्धन
Updated: November 5, 2012
परमजीत कौर कलेर जगमगाते दीओं की रात क्या आती है कि वो लेकर आती है ढेर सारी खुशियां और उत्साह …हर कोई इस रोशनी के…
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बच्चों को दंडित किया तो शिक्षकों की खैर नहीं
Updated: November 5, 2012
हमारे देश मे प्राचीन काल से ही शिक्षकों द्वारा बच्चों को पढ़ाई ना करने या दिया हुआ कार्य पूरा ना करने पर सजा देने का प्रावधान…
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फेसबुक और विचार
Updated: November 3, 2012
जगदीश्वर चतुर्वेदी फेसबुक लेखन को कचड़ा लेखन मानने वालों की संख्या काफी है। ऐसे भी सुधीजन हैं जो यह मानते हैं कि केजुअल लेखन के…
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किस प्रकार जी रहे थे*
Updated: November 3, 2012
शंख घोष वे कैसे जी रहे थे, नये समय के पाठक अब इसे सिर्फ उनकी कविता के जरिये जानेंगे। नये दिनों की कविता कैसी हो…
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कविता – अवशेष
Updated: November 3, 2012
मोतीलाल आग जब सबकुछ जला देगी कुछ तिलिस्म जिंदगी भर के वास्ते धुंधला जाने के लिए उम्मीद को छोड़ कर कहीं से भी चलकर निरर्थक…
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