फेसबुक और विचार
Updated: November 3, 2012
जगदीश्वर चतुर्वेदी फेसबुक लेखन को कचड़ा लेखन मानने वालों की संख्या काफी है। ऐसे भी सुधीजन हैं जो यह मानते हैं कि केजुअल लेखन के…
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किस प्रकार जी रहे थे*
Updated: November 3, 2012
शंख घोष वे कैसे जी रहे थे, नये समय के पाठक अब इसे सिर्फ उनकी कविता के जरिये जानेंगे। नये दिनों की कविता कैसी हो…
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कविता – अवशेष
Updated: November 3, 2012
मोतीलाल आग जब सबकुछ जला देगी कुछ तिलिस्म जिंदगी भर के वास्ते धुंधला जाने के लिए उम्मीद को छोड़ कर कहीं से भी चलकर निरर्थक…
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मानव हो मानव बने रहो
Updated: November 3, 2012
हर जड़ चेतन का उद्गम प्रकृति, हमने उसको भगवान कहा, तुमने उसको इस्लाम कहा या केश बांध ग्रंथ साब कहा, या फिर प्रभु यशु महान…
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‘गैर-बराबरी’ आखिर अर्थशास्त्र का मुद्दा बना
Updated: November 3, 2012
अरुण माहेश्वरी नवउदारवाद के लगभग चौथाई सदी के अनुभवों के बाद मुख्यधारा के राजनीतिक अर्थशास्त्र को बुद्ध के अभिनिष्क्रमण के ठीक पहले ‘दुख है’ के…
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पतन की राह पर अग्रसर संघ (भाग एक)
Updated: November 3, 2012
पवन कुमार अरविंद भाजपा के मौजूदा अध्यक्ष नितिन गडकरी वर्ष 2009 में महाराष्ट्र की राजनीति से राष्ट्रीय राजनीति के फलक पर अचानक आ धमके। गडकरी…
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पंडित प्रेम नाथ डोगरा का पुण्य स्मरण—–
Updated: November 3, 2012
डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री पंडित प्रेम नाथ डोगरा का जन्म २३ अक्तूबर १८८४ को हुआ था । उनकी मृत्यु २० मार्च १९७२ को हुई ।…
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राजनीति को विकृत करते व्यक्तिगत आक्षेप
Updated: November 3, 2012
सिद्धार्थ शंकर गौतम क्या व्यक्तिगत आक्षेपों से राजनीतिक हितों की पूर्ति होती है? इस विषय पर जनता के मत में अजीब सा विरोधाभाष दिखाई देता…
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देर तक रोता कोई बच्चा हंसाकर देखना…..
Updated: November 3, 2012
इक़बाल हिंदुस्तानी बाद में जिसका भी चाहो घर जलाकर देखना, पहले तुम छोटा सा खुद का घर बनाकर देखना। ज़ेहन पायेगा सकूं और दिल…
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राह से भटक गये हैं केजरीवाल: सिद्धार्थ मिश्र‘स्वतंत्र’
Updated: November 2, 2012
अन्ना आंदोलन की उपज अरविंद केजरीवाल सत्ता के गलियारों में आज अपनी सशक्त उपस्थिती दर्ज करा चुके हैं । लगभग दो साल चला उनका ये…
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चुनावों में जनहित के मुद्दों की जगह लेती अभद्र टिप्पणियां
Updated: November 1, 2012
निर्मल रानी गुजरात व हिमाचल प्रदेश राज्य जहां इस समय विधानसभा चुनावों से रूबरू हैं वहीं 2014 में होने वाले लोकसभा चुनावों की आहट भी…
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नरेन्द्र मोदी “प्रवृत्ति” का उदभव एवं विकास… (भाग-3)
Updated: November 1, 2012
सुरेश चिपलूनकर जैसा कि हमने पिछले भागों में देखा, “सेकुलरिज़्म” और “मुस्लिम वोट बैंक प्रेम” के नाम पर शाहबानो, महबूबा मुफ़्ती और मस्त गुल जैसे तीन…
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