और भी हैं बदनसीब जफ़र दफ्न के लिए
Updated: August 3, 2012
आशुतोष शर्मा अपने देश से मुहब्बत इंसान की प्राकृतिक देन है। हजारों मील दूर रहने के बावजूद वह जन्मभूमि को चाहकर भी भूल नहीं पाता…
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घटते सामाजिक मूल्यों के जिम्मेदार हम तो नही?
Updated: August 3, 2012
रामस्वरूप रावतसरे हमारा संस्कार युक्त भारतीय समाज अपराधवृति प्रकार हो गया है । जिस किसी की भी बात सुनों वह अपराध की ही बात करेगा।…
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अन्ना आंदोलन : श्राद्ध अभी बाकी है मेरे दोस्त!
Updated: August 3, 2012
जगमोहन फुटेला देहात की एक पुरानी कहावत है कि किसी से बदला लेना हो तो उस के बेटे को कार ले के दे दो. पहले…
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आखिर नरेंद्र मोदी का कसूर क्या है?
Updated: August 6, 2012
राजीव गुप्ता भारत एक लोकतांत्रिक देश है ! अतः संविधान ने भारत की जनता को स्वतंत्र रूप से अपना प्रधान चुनने की व्यवस्था दी है…
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बाबा का आवाहन : मेरी मां शेरों वाली है
Updated: August 3, 2012
राकेश कुमार आर्य अहिंसावादी समाज की स्थापना के लिए तथा समाज के शांतिप्रिय लोगों के अधिकारों की सुरक्षार्थ भारत सदा से ही शास्त्र के साथ…
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रोको: किस ओर जा रहा है आदमी
Updated: August 4, 2012
राकेश कुमार आर्या अलीगढ़ के डॉ. नजमुद्दीन अंसारी और उनके कुछ जागरूक मुस्लिम साथियों ने देश में गोवध और दुधारू पशुओं को काटकर विदेशों में…
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व्यंग्य: गधों ने घास खाना बन्द कर दिया है
Updated: August 3, 2012
रामस्वरूप रावतसरे शिक्षा ही अवसरवादी हो गर्इ है । मैं अपने घर में बैठा था कि हमारे घर के तथा कथित नीति निर्धारक चाचा चतरू…
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असम : दंगों की वजह घुसपैठ
Updated: August 2, 2012
प्रमोद भार्गव असम में बड़े पैमाने पर हुए दंगों की वजह साफ हो रही है। बांग्लादेशी घुसपैठियों ने सीमावर्ती जिलों में आबादी के घनत्व का…
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नक्सलों और आदिवासियों में फर्क कीजिए
Updated: August 2, 2012
प्रभात कुमार रॉय नक्सलवाद अथवा माओवाद के विषय में प्रायः कोई राष्ट्रीय विचार विमर्श तभी होता है, जबकि कोई भयानक खूंरेज घटना अंजाम दे दी…
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गठबंधन में लेन-देन
Updated: August 2, 2012
प्रमोद भार्गव संदर्भ – कांग्रेस से राकांपा की नाराजगी । कांग्रेस बनाम राष्टीय कांग्रेस पार्टी के शरद पवार की रहस्यमय नूरा कुश्ती का अखिरकार सुखद…
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गजल:पालने से लेकर कांधों तक
Updated: August 2, 2012
सुजीत द्विवेदी पालने से लेकर कांधों तक कांपती है ज़िन्दगी, महज़ वक़्त के इशारों पर नाचती है ज़िन्दगी|| मन हुआ पागल क़ि ना जाना…
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अंधेरे में आधा भारत
Updated: August 1, 2012
संजय स्वदेश जुलाई के अंतिम दो दिन बिजली ने आधे भारत को गच्चा दे दिया। शहरी जिंदगी में हाहाकार मच गया। मतलब बिन बिजली सब…
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