विविधा ऐतिहासिक करालपूरा उपेक्षा का शिकार

ऐतिहासिक करालपूरा उपेक्षा का शिकार

चौधरी मोहम्मद अयूब कटारिया  धरती पर स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर का सीमावर्ती जिला कुपवाड़ा अपने अतीत और वर्तमान कारणों से परिचय का मोहताज नहीं…

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विविधा कब जगमग होगा गांव

कब जगमग होगा गांव

सलमान अब्दुस समद  बिजली की किल्लत से जुझ रहे बिहार को राज्य में स्थापित एनटीपीसी से पचास प्रतिशत बिजली देने के केंद्र का आश्वासन राज्य…

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पर्व - त्यौहार तुष्टिकरण का सबब है हज यात्रा में छूट

तुष्टिकरण का सबब है हज यात्रा में छूट

प्रमोद भार्गव यह हमारे देश में ही संभव है कि सांप्रदायिक तुषिटकरण को भी संवैधानिक नीति का दर्जा दे दिया जाता है। शाहबानो मामले में…

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प्रवक्ता न्यूज़ 60 साल की बूढी संसद को दरकार है सम्मान की

60 साल की बूढी संसद को दरकार है सम्मान की

शादाब जफर ‘‘शादाब’’ देश के लोकतंत्र के सब से बडे मंदिर हमारी संसद ने 13 मई को अपनी स्थापना के साठ वर्ष पूरे किये। 13…

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चिंतन भद्रजनों ने क्या कभी अपनी अभद्र भाषा पर गौर किया है ?

भद्रजनों ने क्या कभी अपनी अभद्र भाषा पर गौर किया है ?

विनायक शर्मा संसद की प्रथम बैठक की 60 वीं वर्षगांठ पर सदन में बोलते हुए लालूप्रसाद यादव ने एक बार फिर सांसदों के आचरण पर…

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राजनीति क्या २जी घोटाले का सच सामने आएगा?

क्या २जी घोटाले का सच सामने आएगा?

सिद्धार्थ शंकर गौतम १५ माह बाद जमानत पर तिहाड़ से बाहर आए पूर्व दूरसंचार मंत्री एवं द्रमुक सांसद ए.राजा ने जिस बेपरवाही से अपने समर्थकों…

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राजनीति नक्सल समस्याः जड़ में हल तलाश कीजिए

नक्सल समस्याः जड़ में हल तलाश कीजिए

शम्स तमन्ना रामेश्‍वरी(बदला हुआ नाम) 56 वर्ष, अब अपने घर वापस नहीं चाहती है। हालांकि उसका अपना घर और खेत सब मौजूद है। लेकिन जिस…

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विविधा खदानों में लगी आग से जल रहा झारखंड

खदानों में लगी आग से जल रहा झारखंड

अमरेन्द्र सुमन प्राकृतिक संपदा से भरपूर झारखंड के कोयला खदानों में लगी आग धीरे धीरे इसके अस्तित्व के लिए खतरा बनता जा रहा है। ब्लैक…

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कविता बडबडाहट……गाँधीजी कि पुण्यतिथि पर मेरी दो कड़वी कविताएँ

बडबडाहट……गाँधीजी कि पुण्यतिथि पर मेरी दो कड़वी कविताएँ

कई बार आदमी कुछ कहना चाहता है पर कुछ कह नहीं पाता,ये कुछ न कह पाना उसे बहुत कुछ कहने के लिए मथ देता है,उस…

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गजल Default Post Thumbnail

गजल-भेंट मज़दूरों की क्यों लेती बताओ चिमनियां-इकबाल हिंदुस्तानी

आये दिन गिरने लगीं जब गुलशनों में बिजलियां, अब संभलकर उड़ रही हैं गुलशनों में तितलियां।   उनके कपड़ों की नुमाइश का सबब बनती हैं…

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कविता कविता: जिन्दगी – लक्ष्मी नारायण लहरे

कविता: जिन्दगी – लक्ष्मी नारायण लहरे

 आपना पन कहें या दोस्ताना अजीब चाहत है इस जीवन में सिर्फ संघर्ष भरी राहें है अपनों के बीच भी हम अकेले है एक -दुसरे…

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राजनीति भारतीय संविधान और राष्ट्रपति

भारतीय संविधान और राष्ट्रपति

– राकेश कुमार आर्य 15 अगस्त 1947 को जब हम आजाद हुए तो उस समय हमारे पास कोई संविधान नहीं था। ब्रिटेन से हम तब…

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