कविता ; चिंता या चेतना – मोतीलाल
Updated: April 27, 2012
मोतीलाल अपना कोई भी कदम नए रुपों के सामने कर्म और विचार के अंतराल में अनुभव से उपजी हुई कोई मौलिक विवेचना नहीं बन पाता…
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कविता ; मंत्र – श्यामल सुमन
Updated: April 27, 2012
श्यामल सुमन लोकतंत्र! जिसकी आत्मा में पहले “लोक”, बाद में “तंत्र”। मगर अब नित्य पाठ हो रहा- “तंत्र” का नया मंत्र। परिणाम! नीयत, नैतिकता…
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ये है दिल्ली मेरी जान
Updated: April 27, 2012
लिमटी खरे अंधविश्वासी राजमाता और युवराज! जनता के सामने भले ही अंधविश्वास पर घंटों भाषण देने में राजनेताओं को महारथ हासिल हो पर जमीनी हकीकत…
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बोफोर्स का जिन्न फिर हुआ प्रकट
Updated: April 26, 2012
सिद्धार्थ शंकर गौतम इंदिरा गाँधी के पुत्र राजीव गाँधी के राजनीतिक जीवन को लील जाने वाले बोफोर्स घोटाले के पिटारे से इस बार ऐसा खुलासा…
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मिलावटी दूध का बढ़ता साम्राज्य
Updated: April 26, 2012
निर्मल रानी भारत में दूध को सबसे अधिक पवित्र,पौष्टिïक खाद्य एवं पेय पदार्थ माना जाता है। पीने के अतिरिक्त दूध का प्रयोग विभिन्न रूपों में…
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कविता – चिँता या चेतना-मोतीलाल
Updated: April 26, 2012
मोतीलाल अपना कोई भी कदम नए रुपोँ के सामने कर्म और विचार के अंतराल मेँ अनुभव से उपजी हुई कोई मौलिक विवेचना नहीँ बन पाता…
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परायेपन का अहसास
Updated: April 26, 2012
डॉ. दीपक आचार्य परायी सामग्री देती है परायेपन का अहसास जो अपना है वही दे सकता है अपनेपन का अहसास। जो पराया है उसे अपनाने…
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बाल पत्रिका देवपुत्र पर बवाल
Updated: July 22, 2012
प्रमोद भार्गव धार्मिक और राजनीतिक पूर्वग्रहों के चलते खासतौर से विधार्थियों में एक विशेष सोच विकसित करने की कोशिशें देश प्रदेश की सरकारें करती रही…
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घिर चुकी है कांग्रेस और उसकी सरकार
Updated: April 26, 2012
विनायक शर्मा संगठन पर कमजोर होती पकड़ और दिशाहीन गठबंधन सरकार का नेतृत्व करती कांग्रेस अपनी स्थापना और देश की स्वतंत्रता के बाद सबसे बुरा…
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क्या हैं राजनीति के गिरते स्तर के कारण?
Updated: April 26, 2012
निर्मल रानी ‘राज करने’ अथवा राज चलाने सम्बन्धी नीति को ही राजनीति कहा जाता है। लिहाज़ा स्पष्ट है कि राज करने या चलाने जैसी अति…
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अब भाई तुम्हारी निजता के चलते सोशल मीडिया बंद करदें…???
Updated: April 26, 2012
हिमांशु डबराल सोच के देखिये की भारत में स्वतंत्र प्रेस न हो तो क्या होगा? चाइना जैसा हाल…? सोच के भी अजीब लग रहा है……
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वर्तमान को प्रसन्नता से स्वीकारें
Updated: April 26, 2012
डॉ. दीपक आचार्य वर्तमान को प्रसन्नता से स्वीकारें भविष्य की आशंकाओं से मुक्त रहे जो लोग आज को सामने रखकर प्रसन्नता का भाव रखते हैं…
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