सिनेमा रेशमी ख़्वाबों के ख़ूबसूरत लम्हे…

रेशमी ख़्वाबों के ख़ूबसूरत लम्हे…

फ़िरदौस ख़ान हम हफ़्ते में एक दिन अपनी पसंद की फ़िल्म ज़रूर देखते हैं…पिछले हफ़्ते फ़िल्म ‘कभी-कभी’ देखी. 27 फ़रवरी, 1976 को प्रदर्शित इस फ़िल्म…

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कविता रघुनाथ सिंह की कविता / कैसा है यह राष्ट्र हमारा

रघुनाथ सिंह की कविता / कैसा है यह राष्ट्र हमारा

कैसा है यह राष्ट्र हमारा हो रही हैं भ्रूण हत्याएं आई है जब से मशीन जो बता देती है निस्सहाय भ्रूण का लिंग और फिर…

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कविता कविता:जहाँ कहीँ भी होगा-मोतीलाल

कविता:जहाँ कहीँ भी होगा-मोतीलाल

मोतीलाल जहाँ कहीँ भी होगा उठती अंतस से हूक अवसाद के चक्रवात मेँ रेखांकित नहीँ उसका वजूद   गौर से यदि देखेँ मुखर होने की…

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चिंतन बेवजह शत्रुता का मतलब है पूर्वजन्म का प्रतिशोध

बेवजह शत्रुता का मतलब है पूर्वजन्म का प्रतिशोध

 डॉ. दीपक आचार्य दुनिया में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं होगा जिसके कोई मित्र या शत्रु न हों। व्यक्ति के जन्म के साथ ही राग-द्वेष के…

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समाज कार्टून विवादः बुध्दिजीवियों को ही समाज की सोच बदलनी होगी !

कार्टून विवादः बुध्दिजीवियों को ही समाज की सोच बदलनी होगी !

इक़बाल हिंदुस्तानी वोटबैंक की राजनीति का शिकार राजनेताओं से उम्मीद बेकार! एनसीईआरटी की किताबों मे बाबासाहब अंबेडकर के कार्टून को लेकर शुरू हुआ विवाद अब…

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राजनीति राष्ट्रपति मनोनयन हेतु राजनीतिक दलों की अपनी ढपली अपना राग

राष्ट्रपति मनोनयन हेतु राजनीतिक दलों की अपनी ढपली अपना राग

सिद्धार्थ शंकर गौतम मंगलवार को समाप्त हुए बजट सत्र के बाद अब सरकार के लिए नए राष्ट्रपति का चुनाव कठिन परीक्षा के रूप में सामने…

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कार्टून कार्टून: इंडियन प्रोब्लेम लीग– गोपाल गोयल

कार्टून: इंडियन प्रोब्लेम लीग– गोपाल गोयल

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विविधा पितृसत्ता को भूलो और बोलो “सत्यमेव जयते” / जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

पितृसत्ता को भूलो और बोलो “सत्यमेव जयते” / जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

सत्यमेव जयते सीरियल की इन दिनों खूब चर्चा है। सामाजिक समस्याओं पर समाज का ध्यान खींचने वाले इस सीरियल को लोग विभिन्न चैनलों पर देख…

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विविधा औपनिवेशिक ढांचा खत्म हो

औपनिवेशिक ढांचा खत्म हो

विमल कुमार सिंह ‘आइएएस’ की व्यवस्था को जितना जल्दी समाप्त कर दिया जाए, उतना अच्छा। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आइएएस की व्यवस्था समाप्त…

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चिंतन अब गायब हो जाती है खुशी मेहमानों के आने पर

अब गायब हो जाती है खुशी मेहमानों के आने पर

 डॉ. दीपक आचार्य एक जमाना था जब मेहमानों के आगमन की सूचना भर से मन मयूर नाच उठता था और बड़े ही उत्साह व उल्लास…

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कला-संस्कृति ‘सृष्टि सृजक‘ महर्षि कश्यप का पौराणिक स्वरूप

‘सृष्टि सृजक‘ महर्षि कश्यप का पौराणिक स्वरूप

राजेश कश्यप हमारे लगभग सभी पौराणिक ग्रन्थों में सृष्टि की रचना का बखूबी उल्लेख मिलता है। पौराणिक ग्रन्थ ‘सुख सागर’ में श्री शुकदेव मुनि जी…

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गजल गजल:गीत ज़िन्दगी के हम गुनगुनाते रहे-हिमकर श्याम

गजल:गीत ज़िन्दगी के हम गुनगुनाते रहे-हिमकर श्याम

जहां तक हुआ खुद को बहलाते रहे गीत ज़िन्दगी के हम गुनगुनाते रहे   छूटती रही ख़ुशियों की डोर हाथों से वक़्त हमें, हम उसे…

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