कविता कविता ; खबरों की अब यही खबर है – श्यामल सुमन

कविता ; खबरों की अब यही खबर है – श्यामल सुमन

श्यामल सुमन देश की हालत बुरी अगर है संसद की भी कहाँ नजर है सूर्खी में प्रायोजित घटना खबरों की अब यही खबर है  …

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कविता गीत ; आई नदी घर्रात जाये – प्रभुदयाल श्रीवास्तव

गीत ; आई नदी घर्रात जाये – प्रभुदयाल श्रीवास्तव

प्रभुदयाल श्रीवास्तव आई नदी घर्रात जाये मझधारे में हाथी डुब्बन कूलों कूलों पुक्खन पुक्खन कीट जमा सीढ़ी पर ऐसा जैसे हो मटमैला मक्खन डूबे घाट…

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गीत ; सड़ी डुकरियां ले गये चोर – प्रभुदयाल श्रीवास्तव

प्रभुदयाल श्रीवास्तव इसी बात का का होता शोर सड़ी डुकरियां ले गये चोर|   रजत पटल पर रंग सुनहरे करें आंकड़े बाजी बजा बजा डुगडुगी…

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कला-संस्कृति संस्कृति ही है भारत की एकता का आधार

संस्कृति ही है भारत की एकता का आधार

सुधांशु त्रिवेदी आज संपूर्ण विश्व एक संक्रमण काल से गुजर रहा है। कहा जा रहा है कि बदलते समीकरणों के अनुसार 21 वीं सदी भारत…

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महिला-जगत ग्रामीण विकास में अधिक कारगर साबित होंगी महिला जनप्रतिनिधि

ग्रामीण विकास में अधिक कारगर साबित होंगी महिला जनप्रतिनिधि

अशोक सिंह  एक बार फिर संसद का सत्र खत्म हुआ और हमेशा की तरह महिलाओं के 33 प्रतिशत आरक्षण से जुड़ा बिल ठंडे बस्ते में…

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खेत-खलिहान सतपुड़ा की अनूठी खेती पद्धति है उतेरा

सतपुड़ा की अनूठी खेती पद्धति है उतेरा

बाबा मायाराम इन दिनों खेती-किसानी का संकट गहरा रहा है। नौबत यहां तक आ पहुंची है कि किसान अपनी जान दे रहे हैं। पिछले 16…

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महिला-जगत समाज को आईना दिखाती रिपोर्ट

समाज को आईना दिखाती रिपोर्ट

मो. अनीसुर्रहमान खान हाल ही में यूनीसेफ द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार भारत में 22 फीसदी लड़कियां कम उम्र में ही मां बन जाती हैं…

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विविधा मार्केटिंग कंपनियों की जाल में फंस रहे हैं ग्रामीण युवा

मार्केटिंग कंपनियों की जाल में फंस रहे हैं ग्रामीण युवा

सूर्यकांत देवागंन  पहले की अपेक्षा आज के समय में नौकरियों की बाढ़ आई हुई है। केंद्र व राज्य सरकारों में विभिन्न सेवा इकाईयों में भर्ती…

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राजनीति Default Post Thumbnail

तार-तार होती राजनीति

शशांक शेखर भारतीय राजनीतिक इतिहास में इससे बुड़ी बात क्या होगी जब कहे जाने वाले स्टाम्प को वास्तविक रॉबोट की तरह खुद सरकार ने दिखाया…

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साहित्‍य गीत ; चट्टू हो गई जीभ – प्रभुदयाल श्रीवास्तव

गीत ; चट्टू हो गई जीभ – प्रभुदयाल श्रीवास्तव

प्रभुदयाल श्रीवास्तव चट्टू हो गई जीभ जलेबी कौन खिलाये   चस्का लगा मलाई बर्फी लड्डू रसगुल्ला एक इशारे पर पहुँचा देता कोई दुमछल्ला री मैया…

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कविता कविता ; अखबारों का छपना देखा – श्यामल सुमन

कविता ; अखबारों का छपना देखा – श्यामल सुमन

श्यामल सुमन मुस्कानों में बात कहो चाहे दिन या रात कहो चाल चलो शतरंजी ऐसी शह दे कर के मात कहो   जो कहते हैं…

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कविता कविता ; सुमन अंत में सो जाए – श्यामल सुमन

कविता ; सुमन अंत में सो जाए – श्यामल सुमन

 श्यामल सुमन कैसा उनका प्यार देख ले आँगन में दीवार देख ले दे बेहतर तकरीर प्यार पर घर में फिर तकरार देख ले   दीप…

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