कविता ; खबरों की अब यही खबर है – श्यामल सुमन
Updated: April 30, 2012
श्यामल सुमन देश की हालत बुरी अगर है संसद की भी कहाँ नजर है सूर्खी में प्रायोजित घटना खबरों की अब यही खबर है …
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गीत ; आई नदी घर्रात जाये – प्रभुदयाल श्रीवास्तव
Updated: April 30, 2012
प्रभुदयाल श्रीवास्तव आई नदी घर्रात जाये मझधारे में हाथी डुब्बन कूलों कूलों पुक्खन पुक्खन कीट जमा सीढ़ी पर ऐसा जैसे हो मटमैला मक्खन डूबे घाट…
Read moreगीत ; सड़ी डुकरियां ले गये चोर – प्रभुदयाल श्रीवास्तव
Updated: April 30, 2012
प्रभुदयाल श्रीवास्तव इसी बात का का होता शोर सड़ी डुकरियां ले गये चोर| रजत पटल पर रंग सुनहरे करें आंकड़े बाजी बजा बजा डुगडुगी…
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संस्कृति ही है भारत की एकता का आधार
Updated: April 28, 2012
सुधांशु त्रिवेदी आज संपूर्ण विश्व एक संक्रमण काल से गुजर रहा है। कहा जा रहा है कि बदलते समीकरणों के अनुसार 21 वीं सदी भारत…
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ग्रामीण विकास में अधिक कारगर साबित होंगी महिला जनप्रतिनिधि
Updated: April 28, 2012
अशोक सिंह एक बार फिर संसद का सत्र खत्म हुआ और हमेशा की तरह महिलाओं के 33 प्रतिशत आरक्षण से जुड़ा बिल ठंडे बस्ते में…
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सतपुड़ा की अनूठी खेती पद्धति है उतेरा
Updated: April 28, 2012
बाबा मायाराम इन दिनों खेती-किसानी का संकट गहरा रहा है। नौबत यहां तक आ पहुंची है कि किसान अपनी जान दे रहे हैं। पिछले 16…
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समाज को आईना दिखाती रिपोर्ट
Updated: April 28, 2012
मो. अनीसुर्रहमान खान हाल ही में यूनीसेफ द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार भारत में 22 फीसदी लड़कियां कम उम्र में ही मां बन जाती हैं…
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मार्केटिंग कंपनियों की जाल में फंस रहे हैं ग्रामीण युवा
Updated: April 28, 2012
सूर्यकांत देवागंन पहले की अपेक्षा आज के समय में नौकरियों की बाढ़ आई हुई है। केंद्र व राज्य सरकारों में विभिन्न सेवा इकाईयों में भर्ती…
Read moreतार-तार होती राजनीति
Updated: April 28, 2012
शशांक शेखर भारतीय राजनीतिक इतिहास में इससे बुड़ी बात क्या होगी जब कहे जाने वाले स्टाम्प को वास्तविक रॉबोट की तरह खुद सरकार ने दिखाया…
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गीत ; चट्टू हो गई जीभ – प्रभुदयाल श्रीवास्तव
Updated: April 28, 2012
प्रभुदयाल श्रीवास्तव चट्टू हो गई जीभ जलेबी कौन खिलाये चस्का लगा मलाई बर्फी लड्डू रसगुल्ला एक इशारे पर पहुँचा देता कोई दुमछल्ला री मैया…
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कविता ; अखबारों का छपना देखा – श्यामल सुमन
Updated: April 28, 2012
श्यामल सुमन मुस्कानों में बात कहो चाहे दिन या रात कहो चाल चलो शतरंजी ऐसी शह दे कर के मात कहो जो कहते हैं…
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कविता ; सुमन अंत में सो जाए – श्यामल सुमन
Updated: April 28, 2012
श्यामल सुमन कैसा उनका प्यार देख ले आँगन में दीवार देख ले दे बेहतर तकरीर प्यार पर घर में फिर तकरार देख ले दीप…
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