कविता : देह – विजय कुमार
Updated: January 25, 2012
देह के परिभाषा को सोचता हूँ ; मैं झुठला दूं ! देह की एक गंध , मन के ऊपर छायी हुई है !! …
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आरक्षण समाप्त करना है तो………
Updated: January 26, 2012
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ आरक्षण समाप्त करना है तो आरक्षित वर्ग के वर्गद्रोही अफसर तत्काल बर्खास्त किये जायें! भारत के संविधान के बारे में जानकारी…
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गाय के दूध का महत्व
Updated: February 18, 2012
हृदय रोग से बचाता हें गाय माता का दूध— भारतीय संस्कृति में गाय का बेहद उच्च स्थान है। इसे कामधेनु कहा गया है। इसका दूध…
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राष्ट्रीय दलों के लिए चुनौती बनते विधानसभा चुनाव
Updated: January 26, 2012
निर्मल रानी अगले महीने देश के 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों की तिथि ज्यों-ज्यों करीब आती जा रही है,राजनैतिक दल वैसे-वैसे अपने चुनाव…
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गणतंत्र दिवस पर शक्ति प्रदर्शन का औचित्य क्या है?
Updated: January 26, 2012
आजादी के लगभग तीन साल बाद भारत राष्ट्र के तत्कालीन सुविग्य्जनों और कानूनविदों ने भारतीय संविधान को अंगीकृत करते हुए उसकी प्रस्तावना में कहा था…
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न लोक ही बचा न तंत्र
Updated: January 26, 2012
डॉ. शशि तिवारी लोक का स्थान स्वयं ने ले लिया और तंत्र का स्थान परिवादवाद ने, बची-कुची कसर जातिवाद के तंत्र ने कर दी। बढ़ते…
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ये भी एक तरह की ‘पेड’ पत्रकारिता है !
Updated: January 26, 2012
जगमोहन फुटेला मैं ‘टोटल टीवी’ में उत्तर-पश्चिमी राज्यों का ब्यूरो देखता था जब एक दिन मुझे मेरे डायरेक्टर विनोद मेहता का फोन आया. उन ने…
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बसपा का अभेदक तिलिस्म
Updated: January 26, 2012
अब्दुल रशीद उत्तर प्रदेश के चुनाव में सत्ताधारी पार्टी की खामोशी सबको आश्चर्यचकित कर रही है क्योंकि न कहीं प्रचार दिख रहा है और न…
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क्या कांग्रेस ने कर ही लिया दिग्विजय सिंह से किनारा?
Updated: January 25, 2012
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह धीरे-धीरे ही सही मगर हाशिये पर धकेले जा रहे हैं| तीन वर्ष पूर्व दिग्विजय सिंह…
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ऐसा हो गणतंत्र हमारा
Updated: January 25, 2012
विनोद बंसल 26 जनवरी 1950 को, जब हमारा संविधान लागू हुआ, तब यह सोचा गया कि यह विश्व के चुनिन्दा देशों के अच्छे संवैधानिक प्रावधानों…
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हमारा गणतंत्र ‘धनतंत्र और गनतंत्र’ में तब्दील हो चुका है!
Updated: January 25, 2012
इक़बाल हिंदुस्तानी राजनेताओं की विश्वसनीयता ख़त्म होने से लोकतंत्र को ख़तरा ? गणतंत्र आज धनतंत्र और गनतंत्र में तब्दील होने से सवाल उठ रहा है…
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कविता : मेरा होना और न होना – विजय कुमार
Updated: January 23, 2012
मेरा होना और न होना …. उन्मादित एकांत के विराट क्षण ; जब बिना रुके दस्तक देते है .. आत्मा के…
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