विविधा पितृसत्ता को भूलो और बोलो “सत्यमेव जयते” / जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

पितृसत्ता को भूलो और बोलो “सत्यमेव जयते” / जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

सत्यमेव जयते सीरियल की इन दिनों खूब चर्चा है। सामाजिक समस्याओं पर समाज का ध्यान खींचने वाले इस सीरियल को लोग विभिन्न चैनलों पर देख…

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विविधा औपनिवेशिक ढांचा खत्म हो

औपनिवेशिक ढांचा खत्म हो

विमल कुमार सिंह ‘आइएएस’ की व्यवस्था को जितना जल्दी समाप्त कर दिया जाए, उतना अच्छा। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आइएएस की व्यवस्था समाप्त…

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चिंतन अब गायब हो जाती है खुशी मेहमानों के आने पर

अब गायब हो जाती है खुशी मेहमानों के आने पर

 डॉ. दीपक आचार्य एक जमाना था जब मेहमानों के आगमन की सूचना भर से मन मयूर नाच उठता था और बड़े ही उत्साह व उल्लास…

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कला-संस्कृति ‘सृष्टि सृजक‘ महर्षि कश्यप का पौराणिक स्वरूप

‘सृष्टि सृजक‘ महर्षि कश्यप का पौराणिक स्वरूप

राजेश कश्यप हमारे लगभग सभी पौराणिक ग्रन्थों में सृष्टि की रचना का बखूबी उल्लेख मिलता है। पौराणिक ग्रन्थ ‘सुख सागर’ में श्री शुकदेव मुनि जी…

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गजल गजल:गीत ज़िन्दगी के हम गुनगुनाते रहे-हिमकर श्याम

गजल:गीत ज़िन्दगी के हम गुनगुनाते रहे-हिमकर श्याम

जहां तक हुआ खुद को बहलाते रहे गीत ज़िन्दगी के हम गुनगुनाते रहे   छूटती रही ख़ुशियों की डोर हाथों से वक़्त हमें, हम उसे…

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राजनीति मनमोहनी आश्वासनों का टूटता तिलिस्म

मनमोहनी आश्वासनों का टूटता तिलिस्म

सिद्धार्थ शंकर गौतम आज संप्रग सरकार अपने द्वितीय कार्यकाल के तीन वर्ष पूर्ण करने जा रही है| इन तीन वर्षों में सरकार तथा जनता; दोनों…

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विविधा आखिर कहां जा रहे हैं हम

आखिर कहां जा रहे हैं हम

नरेश शांडिल्य ‘चार रईसजादों ने चलती कार में एक लड़की से रात भर किया बलात्कार’, ‘पॉश कालोनी की तीन लड़कियां वेश्यावृत्ति का धंधा करती गिरफ्तार’,…

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कार्टून कार्टून: अनाज सड़ रहा है– गोपाल गोयल

कार्टून: अनाज सड़ रहा है– गोपाल गोयल

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व्यंग्य व्यंग्य-तो कोतवाल जी कहिन-अशोक गौतम

व्यंग्य-तो कोतवाल जी कहिन-अशोक गौतम

सरकार के घर तो दिन रात डाके पड़ते रहते हैं, कोर्इ पूछने वाला नहीं। कोर्इ सारा दिन दफतर की कुर्सी पर ऊंघने के बाद शाम…

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शख्सियत Default Post Thumbnail

‘‘ बरसो याद आयेगी प्रेम कुमार सड़ाना की आवाज ’’

शादाब जफर‘‘शादाब’’ कुछ खास तरह से, विदाई एक अपने को:- 31 मई को को पूरा हो रहा है इन का आकाशवाणी नजीबाबाद से सेवाकाल। ‘‘…

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चिंतन अनायास जो विचार आए लिख लें

अनायास जो विचार आए लिख लें

डॉ. दीपक आचार्य अनायास जो विचार आए लिख लें दुबारा कभी पास नहीं फटकते ये दिव्य तरंगों का बहुत ही व्यापक संसार हमारे इर्द-गिर्द दिन-रात…

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विविधा जनसांख्यिकीय परिवर्तन गंभीर संकट की चेतावनी

जनसांख्यिकीय परिवर्तन गंभीर संकट की चेतावनी

राजेन्द्र चड्ढा   भारत में हिन्दू और अन्य मतावलंबियों की जनसंख्या में तेजी से बढ़ रहे असंतुलन ने सीमावर्ती और मध्य भारत में तीव्रता से…

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