प्रवक्ता न्यूज़ राष्ट्रीय भारतीयता के कवि दिनकर

राष्ट्रीय भारतीयता के कवि दिनकर

(पुण्यतिथि 24 अप्रैल पर विशेष) कुमार कृष्णन  हिंदी साहित्य में दिनकर की पहचान राष्ट्रकवि के रूप में है। उनका साहित्य राष्ट्रीय जागरण व संघर्ष के…

Read more
लेख नायकों की पुनर्स्थापना की आवश्यकता

नायकों की पुनर्स्थापना की आवश्यकता

डा.वेदप्रकाश     हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि- हमारे राष्ट्रीय नायक महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी महाराज हैं, मुगल शासक औरंगजेब…

Read more
राजनीति हर हाल में नोचने होंगे आतंक के पंख

हर हाल में नोचने होंगे आतंक के पंख

बस, अब और नहीं …. राजनीति करने के बजाय सरकार के साथ खड़े हो इस मुद्दे पर सभी दल। डॉ घनश्याम बादल आतंकवाद का एक…

Read more
लेख नैतिक पतन की ओर बढ़ रही लिव इन की बुराई को रोकना होगा 

नैतिक पतन की ओर बढ़ रही लिव इन की बुराई को रोकना होगा 

लिव इन में रह रही युवती के अपहरण का प्रयास , महिला पर चढ़ाई गाड़ी ।यह खबर आज के समाचार पत्रों में प्रकाशित है ।…

Read more
राजनीति हिंदू काफ़िरों.. सावधान..!

हिंदू काफ़िरों.. सावधान..!

~ कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटल  हिंदू काफ़िर है और काफ़िरों के साथ जिहादी आतंकी कैसा सलूक करते हैं।ये देखना है तो भारत में 7 वीं सदी…

Read more
राजनीति पहलगाम में मजहबी आतंक का सबसे बर्बर चेहरा

पहलगाम में मजहबी आतंक का सबसे बर्बर चेहरा

-ललित गर्ग-जम्मू-कश्मीर में स्थित पहलगाम, जिसे ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ के नाम से जाना जाता है, मंगलवार को एक भीषण, दर्दनाक एवं अमानवीय आतंकी हमले का गवाह…

Read more
राजनीति चिनगारी का खेल बुरा होता है !

चिनगारी का खेल बुरा होता है !

हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले में विदेशी नागरिकों समेत 26 की मौत हो गई, और मरने वालों में अधिकांश पुरुष हैं। वास्तव में यह…

Read more
कविता अभी तो मेंहदी सूखी भी न थी

अभी तो मेंहदी सूखी भी न थी

— पहलगाँव हमले पर एक कविता अभी तो हाथों से उसका मेंहदी का रंग भी नहीं छूटा था,कलाईयों में छनकती चूड़ियाँ नई थीं,सपनों की गठरी…

Read more
कविता पहलगाम के आँसू

पहलगाम के आँसू

वो बर्फ से ढकी चट्टानों की गोद में,जहाँ हवा भी गुनगुनाती थी,जहाँ नदियाँ लोरी सुनाती थीं,आज बारूद की गंध बसी है। वो हँसी जो बाइसारन…

Read more
कविता पहलगाम की चीख़ें

पहलगाम की चीख़ें

जब बर्फ़ीली घाटी में ख़ून बहा,तब दिल्ली में सिर्फ़ ट्वीट हुआ।गोलियाँ चलीं थी सरहद पार से,पर बहस चली—”गलती किसकी है सरकार से?” जो लड़ रहे…

Read more
राजनीति पहलगाम हमला: कब सीखेंगे सही दुश्मन पहचानना?

पहलगाम हमला: कब सीखेंगे सही दुश्मन पहचानना?

“पहलगाम का सच: दुश्मन बाहर है, लड़ाई घर के भीतर” पहलगाम हमला जिहादी मानसिकता का परिणाम है। मोदी सरकार ने हमेशा आतंकवाद का मुँहतोड़ जवाब…

Read more
लेख चरित्र निर्माण के बिना दौड़ता जीवन!

चरित्र निर्माण के बिना दौड़ता जीवन!

 आत्माराम यादव पीव जिन्दगी के 60 बसंत पंख लगाकर कब फुर्र से उड़ गए पता ही नहीं चला किन्तु एक पुराना वाकया याद आ गया जहा स्कुल से मिले चरित्र प्रमाणपात्र के बाद जीवन में पुलिस से प्रमाणित चरित्र प्रमाण पत्र माँगा गया, मैंने जबाव दिया की जब बिना चरित्र के अब तक गुजर गई तब वे पुलिस वाले जो खुद चरित्रहीन है वे कैसे और क्यों मेरे चरित्र की गारंटी लेंगेl चरित्र मेरा है इसलिए अपने चरित्र की गारंटी मैं खुद ले सकता हूँ, पुलिसवाले गारंटी दे यह बात गले नहीं उतरी थीl मेरे चरित्र के विषय में 100 प्रतिशत गारंटी मेरी मान्य होने चाहिए वाकी जो घटिया चरित्र को छुपाकर में अपने घर परिवार या बाल सखा आदि के साथ रहता हूँ वे मेरे सच्चे मित्र होने के साथ मेरे सुख दुःख के साथी भी है l मेरे विषय में मेरे मोहल्ले पड़ोस या साथ रहने वाले फिफ्टी फिफ्टी मेरे चरित्र का प्रमाण दे तो समझ आती है किन्तु जो पुलिस मुझे न जानते समझते मेरे चरित्र की गारंटी ले तो वैसी ही बात होगी जैसे आज महंगाई ढीठ- हरजाई-जैसी प्रेमिका के रूप में सोने की कीमतों को आसमान पर बिठाले है, भला सोने के उतार चढ़ाव को यह बाजार क्या जाने, जब बाजार भावों को नहीं समझ सकता तो पुलिस  जो कहीं भी मेरे न तो आगे है और न पीछे है वह चरित्र की गारंटी कैसे ले सकती है? जरा विचार कीजिये मैं जीवन में कुछ बनना चाहता हूँ किन्तु न तो सरकार बनाने को तैयार है और न ही इस देश में एसी…

Read more