इण्डिया की मीडिया और भारत की मीडिया
Updated: December 9, 2011
सौरभ मालवीय आज सम्पूर्ण विश्व विज्ञान की प्रगति और संचार माध्यमों के कारण ऐसे दौर में पहुंच चुका है कि मीडिया अपरिहार्य बन गई है।…
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ये खोखले वादे
Updated: December 9, 2011
(आर. सिंह जी को पढ़ने-लिखने का शौक है। यही कारण है कि अभियंता की नौकरी से अवकाश प्राप्ति के बाद भी वे रचनाकर्म में जुटे…
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भयभीत कांग्रेस और लोकपाल
Updated: December 9, 2011
सुरेन्द्र चतुर्वेदी बाबा रामदेव के हरिद्वार लौट जाने और अन्ना हजारे के दिल्ली आ जाने के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता के संघर्ष को एक…
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शृंखलाबद्ध विस्फोटों ने खोली पुख्ता सुरक्षा प्रबंधों की पोल
Updated: December 9, 2011
नीरज कुमार दुबे आतंकवादियों की ओर से भारत की आर्थिक राजधानी मुम्बई को पुनः दहलाने में सफल होने से हमारी सुरक्षा व्यवस्था पर फिर से…
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गाय को नहीं, मुझे मार गोली
Updated: December 9, 2011
सामाजिक व राष्ट्रीय जागरण के अग्रदूत सुविख्यात उपन्यासकार प्रेमचंद उन दिनों गोरखपुर के एक विद्यालय में शिक्षक थे। उन्होंने गाय रखी हुई थी। एक दिन…
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धर्म की गुत्थियां खोलीं स्वामी विवेकानंद ने
Updated: December 9, 2011
एम. मजहर सलीम अपनी ओजपूर्ण आवाज से लोगों के दिल को छू लेने वाले स्वामी विवेकानन्द निःसंदेह विश्व-गुरु थे। उनके सुलझे हुए विचारों के उजाले…
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लोकपाल विधेयक : उतार-चढ़ाव भरा इतिहास
Updated: December 9, 2011
लालकृष्ण आडवाणी भारतीय संसद के इतिहास में, किसी अन्य विधेयक का इतिहास इतना उतार-चढ़ाव वाला नहीं रहा जितना कि लोकपाल विधेयक का है। लोकपाल शब्द,…
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मुंबई में फिर सीरियल ब्लास्ट / आतंकी हमला
Updated: December 9, 2011
१३ जुलाई, आज मुंबई फिर से बम धमाकों से दहल उठी, मुंबई में आज शाम सात बजे फिर से सीरियल ब्लास्ट हुए हैं। यह ब्लास्ट…
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महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में सामूहिक खेती योजना
Updated: December 9, 2011
डाँ रमेश प्रसाद द्विवेदी पहले हमने सुना था कि महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक एवं पारिवारिक स्थिति को सुधारने के लिए स्वयं सहायता समूह का गठन…
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वासा : लड़ाकू जहाज़ जो अपने पहले सफर में ही डूब गया
Updated: December 9, 2011
महेश दत्त शर्मा 10 अगस्त, 1628। स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम का एक बंदरगाह लोगों से खचाखच भरा था। ये लोग “वासा” नामक एक नए लड़ाकू…
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साहित्य में राजनीति एजेंडा
Updated: December 9, 2011
सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता झांसी की रानी में बदलाव प्रमोद भार्गव राजनीति के स्तर पर अब तक पाठ्य पुस्तकों में इतिहास के पन्नों को…
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एकलव्य- ऋण
Updated: December 9, 2011
गंगानन्द झा एकलव्य का सपना था कृति धनुर्धर होने का। यह भील बालक के लिए असामान्य सपना था; तत्कालीन व्यवस्था के लिए एक चुनौती; एकलव्य…
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