स्त्री अधिकार और गांधी चिंतन
Updated: December 9, 2011
सुभाष सेतिया महिलाओं के प्रति गांधीजी के सकारात्मक दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वे महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले अधिक सुदृढ़ और…
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धर्म का अधिकार, दायित्व एवं कर्त्तव्य
Updated: December 9, 2011
आनंद सुब्रमण्यम शास्त्री धर्म, मनुष्य को अपने विचारों के प्रति निष्ठावान रहते हुए सबके विचारों को महत्व एवं आदर देने का उपदेश देता है। धर्म…
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भ्रष्टाचारी का, भ्रष्टाचार के लिए, भ्रष्ट शासन
Updated: December 9, 2011
जितेन्द्र कुमार नामदेव इतिहास गवाह है जब-जब अति हुई है उसका अंत भी हुआ है। भारत को आजादी के बाद एक सम्पूर्ण लोकतान्त्रिक गणराज्य बनाने…
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प्रधानमंत्री के लिए बुद्धिमत्तापूर्ण सलाह
Updated: December 9, 2011
लालकृष्ण आडवाणी बी. रमन एक अच्छे गुप्तचर अधिकारी रहे हैं, सेवानिवृत्ति के बाद भी जिनका काफी सम्मान से नाम लिया जाता है। 28 जून को…
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क्या महज ‘‘औपचारिक‘‘ रह गई है गांधी टोपी!
Updated: December 9, 2011
लिमटी खरे कांग्रेस का इतिहास गौरवमयी रहा है, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। एक दशक से कांग्रेस अपने मूल मार्ग से…
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जमीन की सियासी जंग
Updated: July 7, 2011
क्षेत्रपाल शर्मा सर्वोच्च न्यायालय ने आखिरकार हस्तक्षेप करते हुए यह आदेश पारित कर ही दिया कि जमीन , उ. प्र. के किसानों को वापस कर…
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भ्रष्टाचार मिटाना ही होगा
Updated: December 9, 2011
पंडित सुरेश नीरव भ्रष्टाचार मिटाना ही होगा। देश को भ्रष्टाचार से जब तक मुक्त नहीं कराया जाएगा तब तक देश तरक्की नहीं कर पाएगा। भ्रष्टाचार…
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हिन्दू धर्म की चुनौतियां
Updated: December 9, 2011
अशोक शास्त्री कुछ ऐसी तस्वीर साफ दिखाई देती है कि बादरायण (वेद व्यास) से शंकर तक, जो हिन्दुत्व की इबारत लिखी गई है, वो मोजूदा…
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माया की साख पर आंच
Updated: July 6, 2011
संजय सक्सेना उत्तर प्रदेश में दस महीने के भीतर दो सीएमओ हत्याकांडो की गुत्थी सुलझाने में लगी पुलिस के लिए एक बार फिर मुश्किल खड़ी…
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अब माओवादी भी लड़ेंगे भ्रष्टाचार से!
Updated: December 9, 2011
भटकाव भरे आंदोलन ऐसे भ्रम फैलाकर जनता की सहानुभूति चाहते हैं संजय द्विवेदी यह कहना कितना आसान है कि माओवादी भी अब भ्रष्टाचार के दानव…
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ठंडी ठंडी फुहार बारिश की
Updated: December 9, 2011
शादाब जफर ‘शादाब’ “बारिश’’ ठंडी ठंडी फुहार बारिश की हाय कैसी बहार बारिश की किश्तियां खूब हम चलाते थे कापिया फाड कर बनाते थै याद…
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परम्पराओं पर आघात मत सहो
Updated: December 9, 2011
कड़ी परीक्षा है संस्कृति की सत्य तो अब कहना होगा मेरी परम्पराएँ पावन दृढ इस पे रहना होगा काले अंग्रेजों सुन लो तुम वेदनेत्र यह…
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