कालजयी महानायक स्वामी विवेकानंद
Updated: December 16, 2011
गिरीश पंकज स्वामी विवेकानंद के जीवन की शुरुआत देखें तो अद्भुत रोमांच होता है। कैसे एक संघर्षशील नवयुवक धीरे-धीरे महागाथा में तब्दील होता चला जाता…
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युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद
Updated: December 16, 2011
अवनीश सिंह स्वामी विवेकानंद ने भारत में हिन्दू धर्म का पुनरुद्धार तथा विदेशों में सनातन सत्यों का प्रचार किया। इस कारण वे प्राच्य एवं पाश्चात्य देशों…
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जिला विकास संगम का संदर्भ एवं स्वरूप
Updated: December 16, 2011
के.एन. गोविन्दाचार्य प्रत्येक देश एवं समाज की एक तासीर होती है जो उसके इतिहास एवं भूगोल से बनती चली जाती है। इसे ही संस्कृति या…
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कहानी : प्रैक्टिकल
Updated: December 16, 2011
-चैतन्य प्रकाश “यह सब झूठ है, बेबुनियाद है, मेरे राजनैतिक विरोधियों की चालबाजी है।” फोन पर उत्तर देते हुए श्याम सुंदर ने कहा। उसके चेहरे…
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विकास बनाम पर्यावरण
Updated: December 16, 2011
सतीश सिंह सच कहा जाए पर्यावरण को बचाना 21वीं सदी का सबसे ज्वलंत मुद्दा है। लेकिन विश्व के किसी देश का ध्यान इस ओर नहीं…
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सियासत और सेक्स की कॉकटेल-कथा-2
Updated: December 16, 2011
मोहब्बत के बदले मौत… यौन शोषण की तोहमतों के घेरे में आए तीन विधायकों की `प्रेम? कथा’ आपने पढ़ी, अब बारी है, एक ऐसी ही…
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ठेठ गंवई लोकचेतना का पुरोधा नहीं रहा
Updated: December 16, 2011
शिवानन्द द्विवेदी भोजपुरी संगीत का एक बुलंद आवाज अब हमेशा के लिए थम गया। भोजपुरी की इस अपूरणीय क्षति से समूचा भोजपुरी समाज स्तब्ध है।…
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लोकगायक बालेश्वर: ‘माटी के देहियां माटी में’
Updated: December 16, 2011
प्रदीप चन्द्र पाण्डेय लोकगायक बालेश्वर को शायद यह पता नहीं था कि ‘ माटी के देहिया माटी में’ जिस गीत को वे डूबकर गाया करते…
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अनूठे गौ सेवक भाईजी
Updated: December 16, 2011
आशीष कुमार ‘अंशु’ ‘कुल्लू के अंदर दूध ना देने वाली गाएं किसानों के लिए बड़ी समस्या बनती जा रहीं हैं, इसी प्रकार बिलासपुर, मंडी में…
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सोशल मीडिया को और प्रासंगिक कैसे बनाएं
Updated: December 16, 2011
जगदीश्वर चतुर्वेदी फेसबुक और दूसरे सोशल नेटवर्क पर आकर्षक और प्रासंगिक विषयवस्तु की समस्या बनी हुई है। हिन्दी वाले सोशल नेटवर्क पर ज्यादातर व्यक्तिगत खोजखबर…
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कविता / मन का शृंगार
Updated: December 16, 2011
काश। एक कोरा केनवास ही रहता मन…। न होती कामनाओं की पौध न होते रिश्तों के फूल सिर्फ सफेद कोरा केनवास होता मन…। न होती…
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द्रोणाचार्य या चाणक्य?
Updated: December 16, 2011
शशांक शेखर सर्वविदित है कि भारत विविधताओं का देश रहा है। यहाँ गुरु को गोविन्द से ऊपर का स्थान दिया जाता है। भारत सदैव अपने…
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